- 1 नवंबर से एफएसडीए निरीक्षण में सख्ती; अलग किचन के साथ कच्चे मांस, चाकू, कटिंग बोर्ड और बर्तनों तक के लिए होंगे अलग इंतजाम
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के होटल और रेस्टोरेंट में अब शाकाहारी और मांसाहारी भोजन तैयार करने की व्यवस्था अलग रखने की तैयारी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने होटल, रेस्टोरेंट, फास्ट-फूड चेन, ढाबों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर विशेष जोर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 1 नवंबर 2026 से इन मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। इसका मतलब यह है कि होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को वेज और नॉनवेज भोजन की तैयारी में अलगाव के साथ खाद्य पदार्थों के भंडारण, उपकरणों और साफ-सफाई की व्यवस्था भी दुरुस्त करनी होगी।
वेज-नॉनवेज के लिए अलग रसोई क्यों जरूरी होगी
नई व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य क्रॉस-कंटैमिनेशन यानी एक खाद्य पदार्थ से दूसरे में संभावित सूक्ष्मजीवी या अन्य संदूषण को रोकना है। खास तौर पर कच्चे मांस, पोल्ट्री और समुद्री खाद्य पदार्थों को तैयार करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया गया है। खाद्य सुरक्षा के मौजूदा मानकों में भी कच्चे और पके भोजन तथा शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के लिए अलग-अलग उपकरण और भंडारण व्यवस्था रखने की बात कही गई है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में सामने आया कदम मुख्य रूप से इन मानकों के अनुपालन और उनके प्रवर्तन को सख्त करने से जुड़ा है।
चाकू, कटिंग बोर्ड और बर्तन भी होंगे अलग
होटल और रेस्टोरेंट में सिर्फ रसोई अलग करना पर्याप्त नहीं होगा। निरीक्षण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वेज और नॉनवेज भोजन के लिए कटिंग बोर्ड, चाकू और बर्तन अलग रखे जा रहे हैं या नहीं। कच्चे मांस, पोल्ट्री या समुद्री खाद्य पदार्थों के संपर्क में आए उपकरणों को शाकाहारी भोजन तैयार करने में इस्तेमाल करने से बचना होगा। इसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों के बीच किसी भी तरह के संभावित संदूषण को रोकना है।
कच्चे मांस के लिए अलग क्षेत्र बनाना होगा
नॉनवेज भोजन तैयार करने वाले प्रतिष्ठानों में कच्चे मांस, पोल्ट्री और समुद्री उत्पादों के लिए अलग तैयारी क्षेत्र रखने पर विशेष जोर दिया गया है। इन खाद्य पदार्थों को दूसरे कच्चे या तैयार खाद्य पदार्थों से अलग रखने की व्यवस्था भी करनी होगी। भंडारण के दौरान भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि कच्चे मांस का संपर्क दूसरे खाद्य पदार्थों से न हो।
मांस तैयार करने के बाद सतह साफ करनी होगी
कच्चे मांस या पोल्ट्री की तैयारी के बाद इस्तेमाल की गई सतहों की उचित सफाई भी जरूरी होगी। खाद्य सुरक्षा मानकों के मुताबिक ऐसी सतहों को उपयुक्त क्लीनिंग एजेंट से साफ करने, पानी से धोने और सैनिटाइज करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसका मकसद कच्चे मांस के संपर्क में आने वाली सतहों के जरिए दूसरे खाद्य पदार्थों में संदूषण का जोखिम कम करना है।
किचन से स्टोरेज तक हर जगह होगी जांच
एफएसडीए के निरीक्षण में सिर्फ खाना पकाने की प्रक्रिया नहीं देखी जाएगी। डाइनिंग एरिया, किचन, स्टोरेज और ड्रेनेज सिस्टम की स्थिति भी जांच का हिस्सा होगी। फर्श, दीवार और छत की स्थिति ऐसी होनी चाहिए जिससे खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक या माइक्रोबियल संदूषण का खतरा न पैदा हो। ड्रेनेज सिस्टम के ठीक तरह से काम करने और किचन में स्वच्छता की स्थिति को भी जांचा जाएगा।
होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को रिकॉर्ड रखने होंगे
निरीक्षण के दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों से खाद्य लाइसेंस या पंजीकरण, कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड, पानी की जांच रिपोर्ट, पेस्ट कंट्रोल से जुड़े दस्तावेज, कच्चे माल की खरीद के रिकॉर्ड और सफाई संबंधी रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं। विभाग का फोकस केवल भोजन की गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि पूरे प्रतिष्ठान की खाद्य-सुरक्षा व्यवस्था पर रहेगा।
मेन्यू में भी देनी होगी जरूरी जानकारी
नई व्यवस्था का असर मेन्यू पर भी पड़ सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों में एलर्जी पैदा करने वाली सामग्री की जानकारी के साथ कृत्रिम रंग और कृत्रिम स्वीटनर के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी देने पर भी जोर है। भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कुकिंग मीडियम की जानकारी भी उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है।
बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त नियम लागू होंगे
जिन खाद्य प्रतिष्ठानों के पास केंद्रीय खाद्य लाइसेंस है या जिनके 10 या उससे अधिक आउटलेट हैं, उनके लिए मेन्यू या बोर्ड पर प्रति सर्विंग कैलोरी और सर्विंग साइज जैसी जानकारी प्रदर्शित करने के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को भोजन की पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना है।
नियम टूटे तो होटल-रेस्टोरेंट पर होगी कार्रवाई
एफएसडीए की ओर से खाद्य प्रतिष्ठानों में मानकों के अनुपालन पर जोर दिया जा रहा है। निरीक्षण में गंभीर कमियां मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालिया निरीक्षण अभियानों में प्रदेश के कई शहरों में फास्ट-फूड और रेस्टोरेंट प्रतिष्ठानों की जांच की गई है तथा कमियां मिलने पर सुधार नोटिस और अन्य कार्रवाई की गई है।
एक नवंबर से सख्ती, अभी तैयारी का दौर
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। यह कहना सही नहीं होगा कि 25 सितंबर से ही उत्तर प्रदेश के हर होटल और रेस्टोरेंट में अलग रसोई बनाना अनिवार्य हो गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार एफएसडीए ने खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर जोर दिया है और 1 नवंबर 2026 से इनके अनुपालन को निरीक्षण में सख्ती से सुनिश्चित कराने की तैयारी है। यानी होटल-रेस्टोरेंट संचालकों के लिए अभी अपनी रसोई, स्टोरेज और उपकरणों की व्यवस्था को निर्धारित मानकों के अनुरूप करने का समय है।
असल बदलाव सिर्फ अलग किचन तक सीमित नहीं
उत्तर प्रदेश में आने वाली सख्ती को सिर्फ वेज और नॉनवेज के लिए अलग रसोई की व्यवस्था के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। असल जोर खाद्य पदार्थों की पूरी तैयारी प्रक्रिया में अलगाव और स्वच्छता पर है। कच्चे मांस और अन्य खाद्य पदार्थों के बीच संपर्क रोकना, अलग उपकरण इस्तेमाल करना, उचित भंडारण करना और किचन की साफ-सफाई बनाए रखना इसके प्रमुख हिस्से हैं।


