- महिला की तस्वीर से छेड़छाड़ कर जंतर-मंतर प्रदर्शन में इस्तेमाल करने का आरोप; अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम एफआईआर में दर्ज, पुलिस अब तस्वीर के स्रोत और उसे तैयार व प्रसारित करने वालों की भूमिका खंगाल रही है
भारत 19
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान एक महिला की कथित डीपफेक तस्वीर के इस्तेमाल का मामला अब पुलिस जांच तक पहुंच गया है। महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसकी तस्वीर के साथ डिजिटल छेड़छाड़ कर उसे आपत्तिजनक रूप दिया गया और प्रदर्शन स्थल पर बैनर-पोस्टर के जरिए प्रदर्शित किया गया। एफआईआर में अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को नामजद किया गया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इन नामों का एफआईआर में दर्ज होना अपने आप में उनकी आपराधिक भूमिका साबित नहीं करता। मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है।
तस्वीर से छेड़छाड़ कर बैनर लगाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक महिला की निजी तस्वीर का इस्तेमाल उसकी अनुमति के बिना किया गया। आरोप है कि तस्वीर को एआई और फेस-स्वैप तकनीक की मदद से बदला गया और फिर उसे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान लगाए गए बैनर और पोस्टर में इस्तेमाल किया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित तस्वीर से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए। शिकायत के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा और निजता प्रभावित हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मूल तस्वीर कहां से ली गई, उसमें बदलाव किसने किया और तैयार सामग्री को प्रदर्शन स्थल तक किसने पहुंचाया।
जांच में अब डिजिटल साक्ष्य सबसे अहम
मामले की जांच में पुलिस के सामने सबसे अहम कड़ी डिजिटल सामग्री होगी। कथित डीपफेक तस्वीर की मूल फाइल, उसके संपादन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, पोस्टर की डिजाइन और छपाई तथा सोशल मीडिया पर उसके प्रसार की जानकारी जांच का हिस्सा बन सकती है। जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि तस्वीर सबसे पहले किसने तैयार की और उसे किस खाते या माध्यम से प्रसारित किया गया। इससे कथित सामग्री तैयार करने और उसे सार्वजनिक करने में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
CJP से जुड़े नेताओं का AI विवाद नया नहीं
डीपफेक तस्वीर का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं से जुड़ा एक अलग एआई विवाद पहले से दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच चुका है। भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने सितंबर में CJP, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दो करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया था। मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित एआई-निर्मित सामग्री से जुड़ा था। 10 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका ने संबंधित पोस्ट हटाने पर सहमति जताई थी। अदालत की कार्यवाही में एआई से तैयार सामग्री और उसकी सत्यता की पुष्टि के मुद्दे पर भी चर्चा हुई थी।
FIR में नाम और आरोपी होने में फर्क
इस मामले में रिपोर्टिंग करते समय एक कानूनी बारीकी महत्वपूर्ण है। एफआईआर में नाम दर्ज होना और जांच के बाद आरोपी के रूप में दोष तय होना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना तथ्यात्मक रूप से सुरक्षित है कि चारों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित तस्वीर बनाने, पोस्टर तैयार कराने, उसे प्रदर्शित करने या सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में किसकी क्या भूमिका थी।
हाईकोर्ट की आज की सुनवाई पर पुष्टि जरूरी
आपके शुरुआती इनपुट में इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में 25 सितंबर को अर्जेंट सुनवाई का उल्लेख था। उपलब्ध ताजा विश्वसनीय रिपोर्टों की खोज में इस विशेष एफआईआर मामले की आज की अर्जेंट सुनवाई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। इसलिए इसे कॉपी में तथ्य के रूप में जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।


