27 सितंबर तक यूपी में बारिश का दौर, पूर्वी हिस्से में बहुत भारी बारिश की चेतावनी; 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं हवा के झोंके, कई जिलों में गरज-चमक और वज्रपात का खतरा
भारत 19
कानपुर। उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में 25 से 27 सितंबर के बीच बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां बनी रहने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है, जबकि 27 सितंबर को भी भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 से 27 सितंबर तक भारी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है।
कानपुर में इस बारिश ने मानसूनी सीजन के आंकड़ों को एक बार फिर ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। उपलब्ध स्थानीय आंकड़ों के मुताबिक एक जून से 26 सितंबर तक कानपुर में 1193.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य मानसूनी बारिश 773 मिलीमीटर से करीब 54.42 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 1998 में कानपुर में 1272.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी और इस साल का आंकड़ा उस रिकॉर्ड के काफी करीब पहुंच चुका है।
17 जिलों में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट
जिला-स्तरीय मौसम चेतावनी के मुताबिक अगले 24 घंटे में बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संत कबीर नगर, बस्ती, महाराजगंज, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या और अंबेडकर नगर में मौसम ज्यादा खराब रहने की आशंका है। इन जिलों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर बारिश की तीव्रता अलग-अलग रह सकती है।
60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं हवा के झोंके
जिला-स्तरीय चेतावनी के मुताबिक बारिश के दौरान हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि तेज झोंके करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। गरज-चमक और आकाशीय बिजली के दौरान अचानक मौसम खराब होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में पेड़ों, बिजली के खंभों, कमजोर निर्माण और खुले स्थानों से दूरी बनाए रखना जरूरी होगा।
पूर्वी यूपी में दो दिन बहुत भारी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। 27 सितंबर को भी पूर्वी यूपी में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 से 27 सितंबर तक भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से सक्रिय हुआ मानसून
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. नौशाद खान के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बनी मौसम प्रणाली के कारण मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर सक्रिय हुई हैं। प्रदेश में बारिश बढ़ने के पीछे बंगाल की खाड़ी में बनी मौसम प्रणाली का प्रभाव बताया जा रहा है। इसके असर से पूर्वी और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं और उत्तर प्रदेश में भी मानसूनी गतिविधि फिर सक्रिय हुई है। इसी वजह से अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रहने का अनुमान है।
कानपुर मंडल में अगले दो दिन सक्रिय रहेगा मौसम
कानपुर में 24 सितंबर को 24 घंटे में 33.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी और अधिकतम तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा। 25 सितंबर को भी बारिश के साथ तापमान में गिरावट और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। कानपुर देहात, कन्नौज, औरैया और इटावा में भी 26 और 27 सितंबर तक बादल, बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
बारिश से गर्मी घटी, जलभराव बढ़ा सकता है परेशानी
लगातार बारिश और बादलों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के तापमान में गिरावट आई है और गर्मी तथा उमस से राहत मिली है। हालांकि ज्यादा बारिश वाले इलाकों में निचले क्षेत्रों में जलभराव, यातायात प्रभावित होने और स्थानीय जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका है। तेज हवाओं के दौरान पेड़ और बिजली के खंभे गिरने जैसी घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने बारिश प्रभावित लोगों को राहत के निर्देश दिए
बारिश और अतिवृष्टि को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित लोगों का तेजी से सर्वे कराने और पात्र लोगों को राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जनहानि, पशुहानि, मकान या फसल को नुकसान होने की स्थिति में तत्काल आकलन और राहत कार्य पर जोर दिया गया है। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
खेतों में बढ़ी नमी, जलभराव से फसलों को खतरा
जिन खेतों में पानी नहीं रुका है, वहां बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ने का फायदा मिल सकता है और खरीफ फसलों के लिए सिंचाई की जरूरत कुछ समय के लिए कम हो सकती है। लेकिन लगातार पानी जमा रहने से धान समेत अन्य फसलों की जड़ों में ऑक्सीजन की कमी, पौधों के गिरने और रोगों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी जरूरी होगी, जबकि आगामी रबी फसलों पर बारिश का असर अक्टूबर तक मिट्टी की नमी और खेतों की स्थिति पर निर्भर करेगा।
सितंबर की बारिश को जल्दी ठंड से जोड़ना जल्दबाजी
सितंबर के आखिर में बारिश और तापमान में गिरावट से फिलहाल मौसम में ठंडक महसूस हो रही है, लेकिन इसे जल्दी ठंड आने का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता। अक्टूबर से जनवरी के बीच तापमान का रुख बाद की मौसम प्रणालियों और पश्चिमी विक्षोभ समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा। मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार 27 सितंबर के बाद बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती हैं।
28 सितंबर से मौसम में बदलाव के संकेत
मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार 27 सितंबर के बाद उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती हैं। 28 सितंबर से मौसम में बदलाव के संकेत हैं और कुछ इलाकों में आंशिक बादल छाए रहने के साथ तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि स्थानीय स्तर पर बारिश की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।


