- ग्रीन रे इंटरनेशनल के निदेशकों और एजेंटों पर कम समय में निवेश की रकम दोगुनी करने का झांसा देकर पैसा जुटाने का आरोप; मुरादाबाद से तीन वांछित आरोपी गिरफ्तार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी दर्ज हैं मामले
भारत 19
लखनऊ। कम समय में निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये जुटाने के मामले में उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने ग्रीन रे इंटरनेशनल से जुड़े तीन आरोपियों को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया है। ईओडब्ल्यू के मुताबिक कंपनी के निदेशकों और एजेंटों ने निवेशकों को आकर्षक योजनाओं का भरोसा दिलाकर रकम जमा कराई और करीब 78 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है। कंपनी बंद होने के बाद आरोपी फरार हो गए थे।
दोगुनी रकम का वादा, फिर बढ़ता गया निवेश
ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार ग्रीन रे इंटरनेशनल की योजनाओं में लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने का भरोसा दिया जाता था। इस लालच में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी रकम निवेश की। निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए शुरुआत में कुछ लोगों को रकम वापस भी की जाती थी, जिससे योजना के प्रति विश्वास बना रहा और नए लोग इसमें जुड़ते गए। जांच एजेंसी के मुताबिक बेरोजगार युवाओं को भी ग्राहक और एजेंट के तौर पर नेटवर्क से जोड़कर ज्यादा लोगों तक निवेश योजनाएं पहुंचाई गईं। आरोप है कि कंपनी के संचालकों और एजेंटों ने मिलकर निवेशकों से रकम जुटाई और बाद में करीब 78 करोड़ रुपये का गबन कर लिया। इसके बाद कंपनी बंद कर दी गई और आरोपी फरार हो गए।
मुरादाबाद में 2016 के मुकदमे से जुड़ी गिरफ्तारी
ईओडब्ल्यू ने 24 सितंबर 2026 को मुरादाबाद के गलशहीद थाने में वर्ष 2016 में दर्ज मुकदमे से जुड़े तीन वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फुरकान अहमद, फिरासत अली और इब्राहिम सैफी के रूप में हुई है। फुरकान को कटघर, फिरासत अली को मूंढापांडे और इब्राहिम सैफी को भोजपुर थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। ईओडब्ल्यू का आरोप है कि तीनों कंपनी से जुड़े उस नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसने निवेशकों को रकम दोगुनी करने का भरोसा देकर पैसा जुटाया। मामले में जांच अभी जारी है।
ओडिशा और बंगाल तक फैला कंपनी का मामला
ग्रीन रे इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ कंपनीज के खिलाफ केवल उत्तर प्रदेश में ही मामले नहीं हैं। ईओडब्ल्यू के मुताबिक ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई जिलों और थानों में भी मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई कर रही है। इससे मामले की जांच का दायरा केवल मुरादाबाद में सामने आए 78 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कंपनी से जुड़ी निवेश योजनाओं और दूसरे राज्यों में जुटाई गई रकम की भी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
ग्रीन रे पर पहले भी हुई थी सेबी की कार्रवाई
ग्रीन रे इंटरनेशनल का पुराना नियामकीय रिकॉर्ड भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। सेबी ने फरवरी 2014 में कंपनी और उसके निदेशकों को बिना पंजीकरण सामूहिक निवेश योजना चलाने के मामले में योजनाएं बंद करने और निवेशकों की रकम लौटाने का निर्देश दिया था। सेबी के अनुसार कंपनी ने 31 मार्च 2011 तक 45.50 करोड़ रुपये जुटाए थे। बाद में सेबी के आदेश का पालन नहीं किए जाने पर 2018 में कंपनी और संबंधित निदेशकों पर एक करोड़ रुपये का संयुक्त जुर्माना लगाया गया था। सेबी के आदेश में यह भी कहा गया था कि कंपनी ने पहले के निर्देशों के बावजूद उनका पालन नहीं किया। हालांकि, 2014 में सेबी द्वारा दर्ज 45.50 करोड़ रुपये और मौजूदा ईओडब्ल्यू मामले के 78 करोड़ रुपये को एक ही रकम मानना सही नहीं होगा। दोनों कार्रवाई अलग-अलग समय और अलग रिकॉर्ड से संबंधित हैं।
निवेश का भरोसा कैसे बना, जांच में यह भी अहम
इस कथित निवेश धोखाधड़ी का तरीका केवल ज्यादा रिटर्न का वादा करने तक सीमित नहीं था। ईओडब्ल्यू के मुताबिक शुरुआत में कुछ निवेशकों को रकम लौटाई जाती थी। इससे योजना में पैसा लगाने वालों का भरोसा बना और वे दूसरे लोगों को भी निवेश के लिए जोड़ते गए। इसके बाद जब बड़ी रकम कंपनी के पास पहुंच गई तो उसके संचालकों पर रकम हड़पने और कंपनी बंद कर फरार होने का आरोप है। अब जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाने का सवाल है कि 78 करोड़ रुपये की रकम का पूरा धन-प्रवाह कहां गया और इसमें निदेशकों तथा एजेंटों की क्या भूमिका थी।
तीन गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा बढ़ा
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ईओडब्ल्यू अब कथित निवेश नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों और रकम के लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल में दर्ज मामलों के कारण दूसरे राज्यों में कंपनी से जुड़े पुराने मामलों की जानकारी भी इस जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।


