- यूपी एसटीएफ के मुताबिक अरुण कुमार यादव उर्फ ‘डेविल’ ने परीक्षा सर्वर और कंप्यूटर नेटवर्क में सेंध लगाकर नकल का इंतजाम किया; प्रॉक्सी सर्वर, सर्वर में बदलाव, रास्पबेरी पाई और स्क्रीन साझा करने के तरीके सामने आए
भारत 19
लखनऊ। एसएससी जीडी कांस्टेबल की ऑनलाइन परीक्षा में कथित नकल कराने के मामले में यूपी एसटीएफ ने दिल्ली से अरुण कुमार यादव उर्फ ‘डेविल’ को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में परीक्षा में नकल कराने के चार तरीके सामने आने का दावा किया गया है। इनमें परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर को बाहर के सर्वर से जोड़ना, परीक्षा सर्वर की फाइलों में बदलाव करना, रास्पबेरी पाई और बदली हुई स्क्रीन के जरिए परीक्षा की स्क्रीन बाहर तक पहुंचाना तथा बाहर बैठे सॉल्वर से स्क्रीन साझा करना शामिल है।
परीक्षा केंद्र में बैठता था अभ्यर्थी, मदद बाहर से
पूरे मामले को आसान भाषा में समझें तो अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में कंप्यूटर के सामने बैठता था, लेकिन उसके कंप्यूटर तक बाहर बैठे सॉल्वर की पहुंच बनाने की कोशिश की जाती थी। एसटीएफ के अनुसार, इसके लिए परीक्षा कंप्यूटर को प्रॉक्सी सर्वर से जोड़ा जाता था। इसके बाद बाहर बैठा सॉल्वर परीक्षा की स्क्रीन देख सकता था और प्रश्न हल करने में अभ्यर्थी की मदद कर सकता था। जांच में परीक्षा सर्वर की महत्वपूर्ण फाइलों में बदलाव कर ऐसी व्यवस्था तैयार करने की बात सामने आई है। यानी आरोप केवल सामान्य तरीके से नकल कराने का नहीं है, बल्कि ऑनलाइन परीक्षा की तकनीकी व्यवस्था में सेंध लगाने का है।
‘डेविल’ ने नकल के लिए चार तरीके अपनाए
एसटीएफ के मुताबिक पूछताछ में ऑनलाइन परीक्षा में धांधली के चार तरीके सामने आए हैं। पहला तरीका, प्रॉक्सी सर्वर: परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर को प्रॉक्सी सर्वर के रास्ते से जोड़कर परीक्षा नेटवर्क को दरकिनार करने की कोशिश की जाती थी। दूसरा तरीका, परीक्षा सर्वर में बदलाव: एसटीएफ के अनुसार ‘डेविल’ और उसके सहयोगी अमित राणा ने परीक्षा सर्वर की महत्वपूर्ण फाइलों को खोलकर उनमें जरूरी बदलाव किए। इसके बाद कंप्यूटर को प्रॉक्सी सर्वर से जोड़ने वाली विशेष व्यवस्था तैयार की गई। तीसरा तरीका, रास्पबेरी पाई और बदली हुई स्क्रीन: छोटे कंप्यूटर रास्पबेरी पाई और बदली हुई टीएफटी स्क्रीन की मदद से परीक्षा कंप्यूटर की स्क्रीन को बाहर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। चौथा तरीका, स्क्रीन साझा करना: एक सॉफ्टवेयर और लिंक के जरिए परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर की स्क्रीन बाहर बैठे सॉल्वर के साथ साझा की जाती थी। वह प्रश्न देखकर अभ्यर्थी को उत्तर देने में मदद करता था।
रास्पबेरी पाई से लेकर स्क्रीन तक बरामद
एसटीएफ के मुताबिक ‘डेविल’ के पास से बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं। इनमें 11 रास्पबेरी पाई, 12 टीएफटी स्क्रीन, 14 वीडियो कैप्चर उपकरण, दो लैपटॉप और आठ वीजीए स्विच शामिल हैं। इसके अलावा कई अडैप्टर, डोंगल, ब्रॉडबैंड उपकरण और दो सोल्डरिंग मशीन भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी इन उपकरणों को कथित परीक्षा धांधली की तकनीकी व्यवस्था से जोड़कर देख रही है।
‘डेविल’ तक कैसे पहुंची एसटीएफ की जांच
एसटीएफ ने अरुण कुमार यादव को 22 सितंबर 2026 को दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके से गिरफ्तार किया। वह गौतमबुद्धनगर के नॉलेज पार्क थाने में दर्ज परीक्षा धांधली के मामले में वांछित था। जांच में सामने आया कि इस मामले में पहले गिरफ्तार हैकर अमित राणा के साथ अरुण की भूमिका भी सामने आई। एसटीएफ के मुताबिक दोनों ने परीक्षा सर्वर की महत्वपूर्ण फाइलों में बदलाव कर परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर को प्रॉक्सी सर्वर से जोड़ने की व्यवस्था तैयार की थी।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से शुरू हुआ सफर
एसटीएफ के मुताबिक अरुण कुमार बीए पास है और उसने दिल्ली के जहांगीरपुरी स्थित आईटीआई से कंप्यूटर फंडामेंटल का एक वर्षीय पाठ्यक्रम किया था। पूछताछ के अनुसार, 2019 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान वह ऑनलाइन परीक्षा कराने वाले एक व्यक्ति के संपर्क में आया। यहीं से उसने परीक्षा की तकनीकी व्यवस्था को समझना शुरू किया और बाद में ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली करने वाले नेटवर्क से जुड़ गया।
2024 की नर्सिंग परीक्षा में भी नाम आया
एसटीएफ के अनुसार अरुण कुमार का नाम 2024 की सीतापुर नर्सिंग स्टाफ ऑफिसर ऑनलाइन परीक्षा में कथित धांधली के मामले में भी सामने आया था। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने उस मामले में मुख्य आरोपी को प्रॉक्सी सर्वर लगाने और परीक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया था। उस मामले में भी अरुण वांछित बताया गया था।
पांच राज्यों तक नेटवर्क पहुंचने का दावा
जांच एजेंसी के मुताबिक ‘डेविल’ से जुड़े कथित नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों तक जुड़े हैं। अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और कितनी परीक्षाओं में इस तरह की तकनीकी मदद दी गई। एसटीएफ की पहले की कार्रवाई में ग्रेटर नोएडा के परीक्षा केंद्र से जुड़े मामले में सात लोगों की गिरफ्तारी और करीब 50 लाख रुपये नकद समेत तकनीकी उपकरणों की बरामदगी की जानकारी सामने आई थी। ‘डेविल’ की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 12 बताई गई है।
ऑनलाइन परीक्षा में नकल का बदला तरीका
इस मामले की खास बात यह है कि कथित धांधली केवल परीक्षा कक्ष में छिपाकर रखी गई सामग्री से नकल कराने तक सीमित नहीं थी। जांच के मुताबिक परीक्षा कंप्यूटर, सर्वर, स्क्रीन और बाहर बैठे सॉल्वर के बीच तकनीकी संपर्क बनाने की कोशिश की गई। यही वजह है कि एसटीएफ की जांच अब केवल अभ्यर्थियों और सॉल्वर तक सीमित नहीं है। तकनीकी व्यवस्था तैयार करने वाले लोगों, परीक्षा केंद्र से जुड़े व्यक्तियों और बाहर से परीक्षा में मदद करने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, एसटीएफ की ओर से सामने आए ये आरोप जांच का हिस्सा हैं। इनकी अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।


