- ट्रंप के सैन्य अधिकार सीमित करने वाला प्रस्ताव 49-50 से गिरा; न्यूयॉर्क में अमेरिका-ईरान वार्ताकार हॉर्मुज खोलने और आर्थिक नाकेबंदी में राहत के चरणबद्ध रास्ते पर बातचीत कर रहे हैं
भारत 19 डेस्क
वॉशिंगटन में ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका में एक साथ सैन्य अधिकारों और कूटनीति, दोनों मोर्चों पर घटनाक्रम तेज हो गया है। अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान में सैन्य कार्रवाई के अधिकार को सीमित करने वाले प्रस्ताव को 49 के मुकाबले 50 वोटों से खारिज कर दिया। इसी बीच Reuters के मुताबिक न्यूयॉर्क में अमेरिका और ईरान के वार्ताकार हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी में राहत के बदले युद्ध से बाहर निकलने का चरणबद्ध रास्ता तलाश रहे हैं। यानी वॉशिंगटन में सैन्य कार्रवाई के अधिकार को लेकर बहस जारी है, जबकि कूटनीतिक स्तर पर संघर्ष खत्म करने की संभावित रूपरेखा पर बातचीत चल रही है।
सीनेट में 49-50 से खारिज हुआ युद्ध शक्तियां प्रस्ताव
अमेरिकी सीनेट ने गुरुवार को H.Con.Res.89 को 49 के मुकाबले 50 वोटों से खारिज कर दिया। प्रस्ताव में War Powers Resolution के तहत राष्ट्रपति से ईरान के खिलाफ उन सैन्य कार्रवाइयों को रोकने की मांग की गई थी, जिन्हें कांग्रेस ने अधिकृत नहीं किया है। अमेरिकी सीनेट के आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे War Powers Resolution (Iran) के रूप में दर्ज किया गया है। प्रस्ताव के खारिज होने के बाद ट्रंप प्रशासन की ईरान संबंधी सैन्य कार्रवाई पर इस प्रस्ताव के जरिए नई कांग्रेस सीमा लागू नहीं हुई। हालांकि, मतदान से राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच युद्ध संबंधी संवैधानिक अधिकारों को लेकर चल रही बहस समाप्त नहीं हुई है।
युद्ध अधिकारों पर कांग्रेस और राष्ट्रपति की बहस जारी
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों और कांग्रेस के युद्ध संबंधी संवैधानिक अधिकारों की सीमा पर बहस जारी है। सीनेट के रिकॉर्ड में ईरान से जुड़े युद्ध शक्तियां प्रस्तावों पर पहले भी कई मतदान दर्ज हैं। जून में सीनेट ने एक अलग प्रस्ताव 50-48 से स्वीकार किया था, जबकि बाद के प्रयासों में प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की स्थिति अलग रही। ताजा 49-50 का मतदान इसी संवैधानिक और राजनीतिक बहस की निरंतरता है।
न्यूयॉर्क में हॉर्मुज को लेकर समझौते की तलाश
सीनेट में मतदान के साथ अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। Reuters के अनुसार दोनों देशों के वार्ताकार चरणबद्ध समझौते की संभावनाएं तलाश रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल सकता है और इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगी आर्थिक नाकेबंदी में राहत की दिशा में कदम उठा सकता है। यह अभी बातचीत का प्रस्ताव है, अंतिम समझौता नहीं।
हॉर्मुज बना युद्ध से बाहर निकलने की बातचीत का केंद्र
हॉर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रमुख सौदेबाजी बिंदु बन गया है। ईरान के लिए अमेरिकी आर्थिक दबाव में राहत महत्वपूर्ण है, जबकि अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल करना चाहता है। Reuters के मुताबिक, दोनों पक्ष अपनी प्रमुख सौदेबाजी ताकत को पहले छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी वजह से बातचीत में एक साथ समझौते के बजाय चरणबद्ध व्यवस्था का विकल्प तलाशा जा रहा है।
ईरान पहले भी हॉर्मुज खोलने की शर्त रख चुका
यह प्रस्ताव पहली बार सामने नहीं आया है। 22 सितंबर को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने Reuters को बताया था कि अमेरिका अगर सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी हटाता है तो ईरान एक सप्ताह के भीतर हॉर्मुज दोबारा खोल सकता है। ईरानी पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की संभावना भी जताई थी। ताजा बातचीत में इसी तरह के प्रस्ताव को चरणबद्ध समझौते के रूप में आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशे जाने की खबर है।
दोनों पक्ष दबाव का साधन पहले छोड़ने से हिचक रहे
वार्ता की सबसे बड़ी अड़चन यह है कि अमेरिका और ईरान दोनों पहले कदम के रूप में अपनी प्रमुख सौदेबाजी ताकत छोड़ना नहीं चाहते। ईरान चाहता है कि उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही अमेरिकी नाकेबंदी में राहत मिले, जबकि अमेरिका हॉर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बहाल करना चाहता है। Reuters के अनुसार इसी गतिरोध के कारण चरणबद्ध समझौते की संभावना पर चर्चा हो रही है।
हॉर्मुज वार्ता का असर तेल बाजार पर भी
हॉर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। इसलिए वहां जहाजों की आवाजाही में लंबे समय तक व्यवधान का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। Reuters की रिपोर्टिंग में हॉर्मुज को लेकर कूटनीतिक प्रगति के संकेतों के बीच तेल बाजार की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। इससे अमेरिका-ईरान वार्ता का महत्व केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार भी इस घटनाक्रम पर नजर रखता है।
सैन्य और कूटनीतिक दोनों रास्ते फिलहाल खुले
सीनेट में प्रस्ताव खारिज होने से ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति पर इस प्रस्ताव के जरिए नई कांग्रेस सीमा लागू नहीं हुई। दूसरी ओर, न्यूयॉर्क में चल रही बातचीत बताती है कि कूटनीतिक रास्ता भी सक्रिय है। फिलहाल किसी अंतिम युद्धविराम या शांति समझौते की घोषणा नहीं हुई है। Reuters के अनुसार वार्ता अभी संभावित समझौते की शर्तों और उनके क्रम पर केंद्रित है।
अब हॉर्मुज और आर्थिक राहत पर अगले कदम पर नजर
अमेरिका-ईरान घटनाक्रम अब दो समानांतर रास्तों पर आगे बढ़ रहा है। सीनेट में युद्ध शक्तियों को लेकर प्रस्ताव खारिज हो चुका है, जबकि न्यूयॉर्क में वार्ताकार संघर्ष से बाहर निकलने की संभावित रूपरेखा तलाश रहे हैं। आगे की बातचीत में सबसे अहम बिंदु यह रहेगा कि हॉर्मुज खोलने और अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी में राहत को एक ही चरणबद्ध समझौते से जोड़ा जा सकता है या नहीं। अभी यह बातचीत का प्रस्ताव है और किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है।


