- 270 से अधिक शोधपत्र और छह पुस्तकों का योगदान, एआई रिसर्च को मशीनों की निगरानी से मेडिकल इमेजिंग, रोबोटिक्स और एयरोस्पेस तक पहुंचाया; सम्मान 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा।
भारत 19
कानपुर। मशीन खराब होने से पहले उसकी गड़बड़ी का संकेत पकड़ने से लेकर मेडिकल इमेज में बीमारी से जुड़े संकेत तलाशने और एयरोस्पेस तकनीक के लिए एआई विकसित करने तक—आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर निश्चल कुमार वर्मा का शोध कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ता है। व्यापक शोध योगदान के लिए उन्हें इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (INAE) का फेलो चुना गया है। यह सम्मान 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा। प्रो. वर्मा का शोध पारंपरिक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से आगे बढ़कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, कंप्यूटर विजन और बुद्धिमान नियंत्रण जैसी तकनीकों को वास्तविक इंजीनियरिंग समस्याओं से जोड़ता है।
270 से ज्यादा शोधपत्र, छह किताबों से जुड़ा नाम
आईआईटी कानपुर के अनुसार प्रो. वर्मा 270 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित कर चुके हैं और छह पुस्तकों के लेखक, सह-लेखक या संपादक रहे हैं। उनका शोध अकादमिक प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उद्योग और विभिन्न सरकारी संस्थानों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी इसका इस्तेमाल हुआ है। उनकी टीम ने बोइंग कंपनी के लिए एआई आधारित तकनीकें विकसित की हैं। इसके अलावा डीआरडीओ, डीएसटी, सीएसआईआर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय समेत विभिन्न संस्थाओं से जुड़े प्रोजेक्ट भी पूरे किए गए हैं।
सेंसर और एआई बताएगा मशीन में कहां गड़बड़ी
प्रो. वर्मा की प्रमुख शोध उपलब्धियों में इंटेलिजेंट कंडीशन-बेस्ड मॉनिटरिंग शामिल है। इसका उद्देश्य मशीन खराब होने के बाद मरम्मत करने के बजाय सेंसर और एआई की मदद से पहले ही गड़बड़ी के संकेत पहचानना है। उनके शोध में एयर कंप्रेसर, टर्बाइन और दूसरी घूमने वाली मशीनों की स्थिति और संभावित खराबी का विश्लेषण शामिल रहा है।
मशीनों से मेडिकल इमेजिंग तक एआई का विस्तार
प्रो. वर्मा के शोध की पहुंच स्वास्थ्य क्षेत्र तक भी है। उनके कार्य में मेडिकल इमेज विश्लेषण, स्वास्थ्य निगरानी, जैव सूचना विज्ञान और बीमारी से जुड़े डेटा के विश्लेषण में मशीन लर्निंग के इस्तेमाल पर काम शामिल है। उनकी प्रयोगशाला में कंप्यूटर विजन, स्वचालित वाहन, 3-डी ऑब्जेक्ट रिकंस्ट्रक्शन और स्मार्ट डिवाइस आधारित इमेज प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों पर भी काम हो रहा है।
एयरोस्पेस से रोबोटिक्स तक बढ़ रहा शोध का दायरा
प्रो. वर्मा की मौजूदा शोध दिशा का विस्तार स्वचालित कारखानों, विमान और ड्रोन की पूर्व-खराबी पहचान, स्मार्ट ग्रिड, रोबोटिक्स, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य निगरानी और साइबर-फिजिकल सिस्टम तक हो सकता है। उनकी प्रयोगशाला अब बड़े भाषा मॉडल (LLM), डीप लर्निंग और एआई आधारित बुद्धिमान प्रणालियों पर भी काम कर रही है।
एआई मशीन के भविष्य का भी लगाएगा अनुमान
प्रो. वर्मा के शोध की अहम दिशा मशीनों और प्रणालियों की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करने के साथ उनके संभावित भविष्य के व्यवहार का अनुमान लगाना है। यही पूर्वानुमान आधारित एआई तकनीक आगे चलकर उद्योग, परिवहन, स्वास्थ्य और रक्षा प्रणालियों में स्वचालन, पूर्व-खराबी पहचान और सुरक्षा को मजबूत करने में उपयोगी हो सकती है। यानी शोध का दायरा सिर्फ यह जानने तक सीमित नहीं है कि मशीन अभी कैसी है, बल्कि डेटा के आधार पर यह समझने की दिशा में भी है कि मशीन आगे क्या करने वाली है।


