- दो साल की परियोजनाओं के लिए पांच लाख तक अनुदान, छात्रों को मिलेंगे प्रयोग और नई तकनीक से जुड़ने के अवसर
भारत 19
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में शोध को नई दिशा देने के लिए सी.वी. रमन रिसर्च प्रोजेक्ट्स स्कीम-2026 शुरू की गई है। योजना के तहत शिक्षकों को नए वैज्ञानिक विचारों को शोध परियोजनाओं में बदलने के लिए आर्थिक सहयोग मिलेगा। इसका असर केवल शिक्षकों के शोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परियोजनाओं से जुड़ने वाले छात्रों को नई तकनीक, प्रयोग, आंकड़ों के विश्लेषण और समस्या समाधान की व्यावहारिक समझ भी मिल सकेगी। विश्वविद्यालय का प्रयास शोध को समाज की जरूरतों, नवाचार और भविष्य के अवसरों से जोड़ने का है।
माइनर और मेजर प्रोजेक्ट के लिए मिलेगा अनुदान
योजना के तहत शिक्षकों के लिए दो स्तरों पर शोध अनुदान की व्यवस्था की गई है। माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए अधिकतम दो लाख रुपये और मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए पांच लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलेगी। दोनों परियोजनाओं की अधिकतम अवधि दो वर्ष निर्धारित की गई है। शोध प्रस्ताव 21 सितंबर से 21 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे। वैज्ञानिक शोध की सबसे बड़ी ताकत किसी समस्या को नए तरीके से देखने की क्षमता होती है। योजना के जरिए शिक्षकों को अपने विचारों को प्रयोग में बदलने के लिए संस्थागत आर्थिक सहयोग मिलेगा। इससे नई तकनीक, नए मॉडल, स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान और अंतर्विषयक शोध की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
शोध परियोजनाओं में छात्रों को मिलेगा सीधा अवसर
इस योजना का सीधा लाभ छात्रों को भी मिल सकता है। शोध परियोजनाओं में विद्यार्थियों की भागीदारी उन्हें केवल किताबों तक सीमित ज्ञान से आगे ले जाकर प्रयोग, आंकड़ों के विश्लेषण, वैज्ञानिक उपकरणों के इस्तेमाल और समस्या समाधान की वास्तविक प्रक्रिया से जोड़ सकती है। इससे छात्रों को शोध की व्यावहारिक समझ विकसित करने और वैज्ञानिक सोच को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय में विकसित होने वाले शोध आगे चलकर स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, तकनीक, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र की जरूरतों से जुड़ सकते हैं। इससे छात्रों को नई शोध दिशाओं के साथ स्टार्टअप, पेटेंट और तकनीकी नवाचार की संभावनाओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा। शोध को भविष्य के रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञ समिति करेगी शोध प्रस्तावों का मूल्यांकन
योजना का संचालन डीन, प्रोजेक्ट्स एवं एक्सटर्नल रिसोर्स जनरेशन डॉ. अनुराधा कलानी की देखरेख में किया जा रहा है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य उत्कृष्ट, मौलिक और प्रभावकारी शोध को संस्थागत स्तर पर मजबूत करना है। योजना के तहत प्राप्त शोध प्रस्तावों का मूल्यांकन विशेषज्ञ समिति करेगी। यह पहल लगातार आगे बढ़ती है तो इसका असर केवल वर्तमान शोधकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों के लिए ऐसा शोध वातावरण तैयार हो सकता है, जहां नई समस्या से नया सवाल, नए सवाल से नया प्रयोग और नए प्रयोग से नया समाधान निकलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

