- कानपुर में 11वें आयुर्वेद दिवस पर विशेषज्ञों ने साझा किए उपचार अनुभव; मधुमेह के घाव, अर्श-भगंदर, नशामुक्ति और महिला स्वास्थ्य पर भी हुई चर्चा
भारत 19 | कानपुर। आयुर्वेद के उपचार क्षेत्र में अब अस्थमा, पीसीओडी-पीसीओएस, मधुमेह से जुड़े घाव, अर्श-भगंदर और नशामुक्ति जैसी स्वास्थ्य समस्याओं पर भी अलग-अलग उपचार पद्धतियों के अनुभव सामने आ रहे हैं। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में बुधवार को आयोजित 11वें आयुर्वेद दिवस में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने अपने उपचार अनुभव साझा किए। संगोष्ठी में उपचार के साथ जीवनशैली में सुधार और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर भी जोर दिया गया।
अस्थमा में कर्णवेदन चिकित्सा पर साझा किया अनुभव
शामली के डॉ. राजकुमार तायल ने अस्थमा में कर्णवेदन चिकित्सा की उपयोगिता पर जानकारी दी। उन्होंने करीब 20 हजार मरीजों पर इस पद्धति के प्रयोग का दावा किया। संगोष्ठी में उनके अनुभव को आयुर्वेद के उपचार क्षेत्र में चर्चा के एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया।
मधुमेह के घावों के उपचार की बताई पद्धति
लखनऊ के डॉ. संजीत साहू ने मधुमेह के मरीजों में अल्सर और जलने के घावों के उपचार में आयुर्वेदिक पद्धतियों के इस्तेमाल की जानकारी दी। उन्होंने उपचार के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और अपने अनुभवों के बारे में बताया। अतर्रा-बांदा के वरिष्ठ सर्जन डॉ. ए.के. सिंह ने क्षार सूत्र विधि से अर्श और भगंदर के उपचार की जानकारी दी। वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनम गुप्ता ने महिलाओं में होने वाली पीसीओडी और पीसीओएस जैसी समस्याओं में आयुर्वेदिक उपचार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
नशामुक्ति और महिला स्वास्थ्य पर भी हुआ मंथन
वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने नशामुक्ति में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने औषधीय पौधों के आंतरिक और बाहरी उपयोग तथा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में उनकी उपयोगिता की जानकारी दी। डॉ. संगीता सारस्वत ने महिला स्वास्थ्य और पुंसवन संस्कार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
धन्वंतरि पूजन के साथ शुरू हुआ समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय की औषधि वाटिका में भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा पर माल्यार्पण और हवन-पूजन से हुई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, जिला विकास अधिकारी आत्म प्रकाश रस्तोगी और क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. कप्तान सिंह समेत अन्य अधिकारियों ने औषधि वाटिका का भ्रमण किया। इस दौरान आचार्य चरक और आचार्य सुश्रुत की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण किया गया।
उपचार के साथ जीवनशैली सुधार पर जोर
आयुर्वेद दिवस समारोह में विशेषज्ञों ने उपचार के साथ जीवनशैली में सुधार और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर भी जोर दिया। संगोष्ठी में सामने आए अनुभवों में अस्थमा, मधुमेह से जुड़े घाव, पीसीओडी-पीसीओएस, अर्श-भगंदर और नशामुक्ति जैसे अलग-अलग स्वास्थ्य विषय शामिल रहे। विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने कोविड काल के दौरान अपने परिवार में आयुर्वेद की उपयोगिता का अनुभव भी साझा किया। कार्यक्रम में पूर्व क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. निरंकार गोयल, डॉ. रवि कुमार गुप्ता, नीमा के पदाधिकारी, आयुर्वेदिक कॉलेज के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

