- कानपुर के प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन में 2500 से ज्यादा वकीलों का बड़ा फैसला; 55 से अधिक जिलों की भागीदारी, शनिवार की राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार के साथ न्यायिक जवाबदेही बिल और न्यायिक नियुक्ति आयोग की मांग
भारत 19
कानपुर। अधिवक्ताओं और न्यायपालिका के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव के बीच प्रदेशभर के वकीलों ने आंदोलन को नई धार देने का फैसला किया है। कानपुर में जुटे 55 से अधिक जिलों के 2500 से ज्यादा अधिवक्ताओं ने दो दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन के दूसरे दिन चार प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए। इनमें सबसे अहम फैसला है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से वकीलों पर हड़ताल न करने का दबाव नहीं हटता, तब तक हर बुधवार प्रदेशभर के अधिवक्ता हड़ताल करेंगे। इसके साथ ही शनिवार की राष्ट्रीय लोक अदालत के बहिष्कार का भी फैसला लिया गया।
हर बुधवार हड़ताल, शनिवार लोक अदालत का बहिष्कार
सम्मेलन में पारित प्रस्ताव के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के रुख में बदलाव तक हर बुधवार प्रदेशभर के अधिवक्ता काम से विरत रहेंगे। इसके अलावा शनिवार को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का पूरे प्रदेश में बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। इन फैसलों से सम्मेलन में अधिवक्ताओं के आंदोलन को लेकर तय रुख साफ हो गया है।

मोहम्मद तौहीद उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन
2500 से ज्यादा वकीलों ने मिलकर तय की रणनीति
कानपुर बार एसोसिएशन और दि लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 10 और 11 सितंबर को आयोजित सम्मेलन में 55 से अधिक जिलों के 2500 से ज्यादा अधिवक्ता शामिल हुए। अधिवक्ताओं की सुरक्षा, न्यायिक व्यवस्था, हड़ताल पर रोक और पेशे से जुड़ी समस्याओं पर प्रदेशभर के प्रतिनिधियों ने विचार-विमर्श किया।

विनय कुमार मिश्रा महामंत्री बार एसोसिएशन
न्यायिक जवाबदेही बिल और नियुक्ति आयोग की मांग
सम्मेलन में केंद्र सरकार से न्यायिक जवाबदेही बिल लाने की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही न्यायिक नियुक्तियों के लिए न्यायिक नियुक्ति आयोग गठित करने की मांग भी उठाई गई। अधिवक्ताओं ने न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।
एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने पर जोर
अधिवक्ताओं की सुरक्षा के मुद्दे पर एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग भी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रही। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों, हड़ताल पर रोक और अदालतों में अंडरटेकिंग के नियमों को लेकर भी चर्चा की गई। सम्मेलन में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव पर भी विचार हुआ। अधिवक्ताओं के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और जीवन बीमा उपलब्ध कराने की मांग पर भी चर्चा की गई।
दोनों बार एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से कराया आयोजन
दो दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन का आयोजन कानपुर बार एसोसिएशन और दि लॉयर्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया। कानपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र कुमार अवस्थी ‘लल्लन’, महामंत्री विनय कुमार मिश्रा, दि लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र वर्मा और महामंत्री राजीव यादव की सहमति से सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। सम्मेलन में प्रदेश भर से आए अधिवक्ताओं ने सुरक्षा, सम्मान, न्यायिक व्यवस्था और पेशे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए आगे की रणनीति तय की।


