- 47% विद्यार्थियों की मानसिक सुख-समृद्धि निम्न या बहुत निम्न; शुरुआती सर्वे के बाद विश्वविद्यालय 5 से 7 हजार छात्रों तक बढ़ाएगा दायरा
भारत 19
कानपुर। पढ़ाई, करियर और बदलती जीवनशैली के दबाव के बीच युवाओं की मानसिक स्थिति को लेकर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के शुरुआती सर्वे में चौंकाने वाले संकेत सामने आए हैं। विश्वविद्यालय के 101 विद्यार्थियों पर किए गए प्रारंभिक सर्वे में 30 प्रतिशत छात्र चिंता की संभावित श्रेणी में, जबकि 19 प्रतिशत में अवसाद के संकेत मिले हैं। वहीं करीब 47 प्रतिशत विद्यार्थियों की मानसिक सुख-समृद्धि निम्न या बहुत निम्न पाई गई। हालांकि विशेषज्ञों ने साफ किया है कि इन आंकड़ों को मानसिक बीमारी की पुष्टि नहीं माना जा सकता। ये संकेत विद्यार्थियों की आगे मनोवैज्ञानिक जांच, जागरूकता और समय रहते सहायता की जरूरत की ओर इशारा करते हैं।
औसत चिंता सीमा पर, फिर भी कई छात्र परेशान
सर्वे में विद्यार्थियों का औसत चिंता अंक 10.1 रहा, जो सीमांत स्तर को दर्शाता है। वहीं औसत अवसाद अंक 7.7 रहा, जो संभावित बीमारी की सीमा से नीचे है। मानसिक सुख-समृद्धि के आकलन में 47 प्रतिशत छात्र निम्न या बहुत निम्न स्तर पर मिले, जबकि 53 प्रतिशत विद्यार्थियों की स्थिति अच्छी या उच्च श्रेणी में रही। विश्वविद्यालय के अनुसार, सर्वे में केवल चिंता और अवसाद ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की मानसिक सुख-समृद्धि, तनाव से निपटने की क्षमता, भावनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक रिश्तों को भी समझने की कोशिश की गई है।
मां से जुड़ाव ज्यादा, पिता के साथ अलग तस्वीर
सर्वे में माता-पिता से भावनात्मक जुड़ाव को लेकर भी अंतर सामने आया। विद्यार्थियों का मां के साथ जुड़ाव अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित और मध्यम स्तर का मिला, जबकि पिता के साथ कुछ विद्यार्थियों में दूरी वाला भावनात्मक जुड़ाव अधिक दिखाई दिया। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसे सीधे तौर पर माता-पिता और बच्चों के खराब रिश्ते के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे परवरिश का तरीका, आपसी संवाद, पारिवारिक माहौल और सामाजिक अपेक्षाएं जैसे कई कारण हो सकते हैं।
अब पांच से सात हजार विद्यार्थियों तक पहुंचेगा सर्वे
विश्वविद्यालय प्रशासन अब इस शुरुआती आकलन को बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। अगले चरण में 5,000 से 7,000 विद्यार्थियों को सर्वे में शामिल किया जाएगा, ताकि जेनरेशन जेड के मानसिक स्वास्थ्य और उनसे जुड़े सामाजिक-पारिवारिक पहलुओं की ज्यादा व्यापक तस्वीर सामने आ सके। कुलपति प्रो. विनय पाठक ने कहा कि जेनरेशन जेड की मानसिक जरूरतों को प्राथमिकता देना जरूरी है। बड़े स्तर पर सर्वे से विद्यार्थियों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और उनके लिए बेहतर सहायता व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलेगी।
समय रहते पहचान और मदद पर जोर
केंद्र फॉर वेल बीइंग की प्रभारी एवं नैदानिक मनोवैज्ञानिक सृजन श्रीवास्तव के मुताबिक, सर्वे का उद्देश्य केवल तनाव, चिंता या अवसाद के संकेतों की पहचान करना नहीं है। इसका बड़ा लक्ष्य विद्यार्थियों को समय रहते सही सहायता और परामर्श उपलब्ध कराना है। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका शुक्ला ने विद्यार्थियों के लिए ऐसा माहौल तैयार करने पर जोर दिया, जहां वे बिना झिझक अपनी परेशानियां साझा कर सकें।
101 छात्रों का आकलन अभी शुरुआती चरण
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि 101 विद्यार्थियों पर किया गया सर्वे प्रारंभिक पूर्व-पायलट अध्ययन है। अगले चरण में 10 टीमें बड़े समूह के विद्यार्थियों तक पहुंचेंगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि विस्तृत आंकड़ों से विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति को ज्यादा वास्तविक और व्यापक तरीके से समझने में मदद मिलेगी और उसी आधार पर परामर्श तथा मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बेहतर बनाया जा सकेगा।


