- योगी-1 में अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री रहे मोहसिन रजा को यूपी अल्पसंख्यक आयोग की कमान, कैबिनेट रैंक भी मिलेगा; योगी-2 में मंत्री पद से बाहर रहने और 2025 में हज समिति की जिम्मेदारी खत्म होने के बाद चुनाव से पहले मिली अहम भूमिका के सियासी मायने तलाशे जा रहे
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के बीच भाजपा ने अपने पुराने मुस्लिम चेहरे मोहसिन रजा को फिर महत्वपूर्ण भूमिका में ला दिया है। उन्हें उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। अध्यक्ष पद के साथ उन्हें कैबिनेट रैंक भी मिलेगा। योगी सरकार के पहले कार्यकाल में अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज विभाग के राज्यमंत्री रहे रजा की यह नियुक्ति इसलिए खास है क्योंकि दूसरे कार्यकाल में उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी।
लंबे अंतराल के बाद फिर बड़ा राजनीतिक मंच
2017 में योगी सरकार में मंत्री बनने के बाद मोहसिन रजा भाजपा के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल हो गए थे। 2022 में सरकार की वापसी पर उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया और दानिश आजाद अंसारी को मंत्रिमंडल में जगह मिली। हालांकि उसी साल रजा को यूपी राज्य हज समिति का अध्यक्ष बनाया गया और राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया। 2025 में समिति के पुनर्गठन के बाद यह जिम्मेदारी भी उनके पास नहीं रही। अब अल्पसंख्यक आयोग की अध्यक्षता के साथ उनकी राजनीतिक वापसी हुई है।
चुनाव से पहले नियुक्ति का संदेश अहम
रजा की नियुक्ति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका समय है। 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक है और 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा झटका लग चुका है। पार्टी 33 सीटों पर सिमट गई, जबकि सपा 37 और कांग्रेस छह सीटें जीतने में सफल रही। ऐसे माहौल में भाजपा के पुराने मुस्लिम चेहरे को कैबिनेट रैंक वाले पद पर लाना महज प्रशासनिक नियुक्ति नहीं माना जा सकता। इसका एक संदेश यह भी है कि पार्टी चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समाज तक अपने राजनीतिक संवाद को फिर सक्रिय करना चाहती है। हालांकि प्रदेश में मुस्लिमों का बड़ा हिस्सा विपक्षी दलों के साथ रहा है, लेकिन भाजपा का उन तक पहुंच बनाना और सरकार की योजनाओं का संदेश पहुंचाना लगातार राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहा है।
मोहसिन रजा क्यों है अहम
मोहसिन रजा की उपयोगिता सिर्फ उनके मुस्लिम होने तक सीमित नहीं है। वह लंबे समय से भाजपा के भीतर से मुस्लिम समाज के मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने वाले मुखर चेहरों में रहे हैं। मंत्री रहते हुए भी उन्होंने इसी भूमिका को आगे बढ़ाया। अब अल्पसंख्यक आयोग उन्हें ऐसा संस्थागत मंच देता है, जहां से वह अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों पर सरकार और समाज के बीच संवाद की भूमिका निभा सकते हैं। कैबिनेट रैंक इस जिम्मेदारी को राजनीतिक वजन भी देता है।
भाजपा के लिए सोशल इंजीनियरिंग का एक और मोर्चा
2024 के चुनावी झटके के बाद भाजपा के सामने उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने की चुनौती है। पार्टी गैर-यादव ओबीसी, दलित और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर जोर दे रही है। ऐसे में मुस्लिम समाज के बीच संवाद के लिए पुराने चेहरे को फिर सक्रिय करना इसी व्यापक रणनीति की एक कड़ी हो सकता है। मोहसिन रजा की वापसी से भाजपा के पास मुस्लिम समाज के बीच संवाद के लिए अनुभवी राजनीतिक चेहरा फिर मौजूद होगा, जबकि दानिश आजाद अंसारी सरकार में युवा मुस्लिम प्रतिनिधित्व का चेहरा बने हुए हैं।


