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किराये की कमाई के लालच में चढ़ा दीं चार मंजिलें

– सत्य निकेतन हादसे की FIR में खुलासा, पुरानी इमारत पर क्षमता से ज्यादा बोझ डालकर छात्रों के लिए चलाया जा रहा था पीजी; निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप

भारत 19

नई दिल्ली। सत्य निकेतन की पांच मंजिला पीजी की जिस इमारत में सात जिंदगियां मलबे में दब गईं, उसकी कहानी अब सिर्फ एक हादसे की नहीं रह गई है। पुलिस की FIR में सामने आया है कि किराये से ज्यादा कमाई के लालच में पुरानी इमारत पर चार अतिरिक्त मंजिलें खड़ी कर दी गईं। आरोप है कि संरचनात्मक क्षमता की जानकारी होने के बावजूद निर्माण कराया गया और बाद में इसी इमारत को छात्रों के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल किया गया। हादसे के बाद सामने आए ये तथ्य भवन मालिकों के साथ-साथ निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

FIR में मालिक पर गंभीर आरोप

दक्षिण कैंपस थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, सत्य निकेतन स्थित Hostel Daze PG वाली इमारत में भूतल के ऊपर चार मंजिलें थीं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि इमारत में बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रह रहे थे। FIR में आरोप लगाया गया है कि मालिक और उसके भाई ने किराये के लालच में इमारत की ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कराया, जबकि उन्हें इसकी संरचनात्मक क्षमता की जानकारी थी। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 290 (इमारत गिराने, मरम्मत या निर्माण में लापरवाही) और 125 (दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। FIR संख्या 153/2026 है।

पांच मंजिल का बोझ, पुरानी नींव बनी निशाना

हादसे के बाद सामने आए नगर निगम के शुरुआती आकलन ने भी इमारत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। MCD के मुताबिक, संपत्ति का कोई स्वीकृत भवन नक्शा रिकॉर्ड में नहीं मिला, बेसमेंट में निर्माण अनधिकृत था और इमारत के पास फायर एनओसी भी नहीं थी। पांचवीं मंजिल भी निर्धारित FAR नियमों के अनुरूप अनुमत नहीं थी। यानी जिस इमारत में छात्र पीजी के रूप में रह रहे थे, वहां केवल अतिरिक्त मंजिलों का सवाल नहीं था। निर्माण अनुमति, बेसमेंट और अग्नि सुरक्षा, तीनों स्तरों पर गंभीर खामियां सामने आई हैं।

हादसे के समय चल रहा था मरम्मत का काम

पुलिस और शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। बेसमेंट में पानी जमा होने और वहां किए जा रहे काम को भी जांच के दायरे में रखा गया है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हालिया निर्माण या मरम्मत ने पहले से कमजोर संरचना पर कितना अतिरिक्त दबाव डाला। MCD के अधिकारियों के मुताबिक, लगातार बारिश और सीपेज से संरचना कमजोर होने की आशंका भी जांची जा रही है। हालांकि अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

12 से 15 हजार रुपये तक था किराया

इमारत में रहने वाले छात्रों से प्रति बेड करीब 12 हजार से 15 हजार रुपये महीने तक किराया लिया जाता था। भवन में लगभग 15 कमरे बताए गए हैं और कई कमरों में दो से तीन छात्र रहते थे। इस तरह एक छोटी और घनी आबादी वाली इमारत में बड़ी संख्या में छात्रों को पीजी के तौर पर रखा जा रहा था। एक छात्र के मुताबिक, वह करीब 14 हजार रुपये महीने किराया देता था और बिजली का भुगतान अलग था। हादसे से पहले इमारत में पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी समस्याएं थीं।

सात मौतों ने खोल दी व्यवस्था की पोल

सत्य निकेतन हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें पांच छात्र और दो मजदूर शामिल हैं। पांच अन्य छात्र घायल हुए हैं। करीब 27 घंटे चले बचाव अभियान के बाद मलबे में तलाश का काम पूरा किया गया। हादसे के बाद केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि नगर निगम की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। MCD ने दक्षिण क्षेत्र के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें उपायुक्त और चार इंजीनियर शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने MCD और DU से मांगा जवाब

मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। अदालत ने सत्य निकेतन हादसे की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश देते हुए दिल्ली में चल रहे पीजी और हॉस्टलों का ऑडिट कराने को कहा है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि हादसे की जिम्मेदारी केवल भवन मालिकों तक सीमित नहीं की जा सकती और MCD तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की भूमिका की भी जांच जरूरी है। अदालत ने खास तौर पर इस तथ्य पर चिंता जताई कि दिल्ली विश्वविद्यालय में पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने के कारण दूसरे शहरों से आने वाले छात्रों को निजी पीजी पर निर्भर रहना पड़ता है।

अब दिल्ली के सभी पीजी की होगी जांच

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध और असुरक्षित पीजी पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने सभी प्रमुख पीजी हब में संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट एक सप्ताह में पूरा करने का निर्देश दिया है। इसके तहत भवनों की सुरक्षा, अनुमति और नियमों के अनुपालन की जांच की जाएगी। MCD ने भी सभी जोन में भवनों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अधिकारियों को 10 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। सत्य निकेतन की FIR अब इस हादसे को महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि अवैध निर्माण, किराये की कमाई और निगरानी तंत्र की विफलता से जुड़ा मामला बना रही है। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।

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