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भारतीय-अमेरिकी वोटरों में डेमोक्रेट्स की पकड़ ढीली

  • डेमोक्रेट्स से नाता कायम, लेकिन अब पहले जैसी पकड़ नहीं; सर्वे में 46% भारतीय-अमेरिकी खुद को डेमोक्रेट, 29% ने स्वतंत्र बताया

भारत 19 डेस्क
अमेरिकी राजनीति में लंबे समय से डेमोक्रेटिक पार्टी का मजबूत आधार रहे भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के रुख में धीरे-धीरे बदलाव दिख रहा है। डेमोक्रेट्स अब भी इस समुदाय की पहली पसंद हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई है। ताजा Indian American Attitudes Survey में 46 फीसदी भारतीय-अमेरिकियों ने खुद को डेमोक्रेट बताया, जबकि 29 फीसदी ने किसी पार्टी से जुड़ाव के बजाय खुद को स्वतंत्र मतदाता बताया। रिपब्लिकन के साथ 19 फीसदी मतदाता हैं। यानी डेमोक्रेट्स की बढ़त बरकरार है, मगर उससे दूर होने वाले मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सीधे रिपब्लिकन खेमे में जाने के बजाय इंडिपेंडेंट पॉलिटिक्स की ओर बढ़ा है।

डेमोक्रेट्स 46 फीसदी, रिपब्लिकन 19 प्रतिशत

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और YouGov के संयुक्त सर्वे के अनुसार 2026 में 46 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी खुद को डेमोक्रेट बताते हैं, जबकि 19 प्रतिशत रिपब्लिकन और 29 प्रतिशत स्वतंत्र मतदाता हैं। 2020 में डेमोक्रेटिक पहचान रखने वालों की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत थी। यानी छह साल में डेमोक्रेटिक पहचान छह प्रतिशत अंक घटी है। इसी अवधि में रिपब्लिकन पहचान 15 से बढ़कर 19 प्रतिशत हुई है। हालांकि इस बदलाव का पूरा फायदा रिपब्लिकन पार्टी को नहीं मिला है। डेमोक्रेट्स से दूर हुए मतदाताओं का बड़ा हिस्सा इंडिपेंडेंट यानी स्वतंत्र मतदाताओं के खेमे में गया है। 2024 से 2026 के बीच स्वतंत्र मतदाताओं की हिस्सेदारी 25 से बढ़कर 29 प्रतिशत हो गई।

राष्ट्रपति चुनाव में भी डेमोक्रेटिक बढ़त

सर्वे में भारतीय-अमेरिकियों से पूछा गया कि अगर 2024 का राष्ट्रपति चुनाव दोबारा हो तो वे किसे वोट देंगे। इसके जवाब में 57 प्रतिशत ने कमला हैरिस के पक्ष में वोट करने की बात कही, जबकि 25 प्रतिशत ने डोनाल्ड ट्रंप को चुना। 10 प्रतिशत मतदाताओं ने किसी तीसरे उम्मीदवार का विकल्प चुना और पांच प्रतिशत ने कहा कि वे मतदान नहीं करेंगे। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले डेमोक्रेट्स के लिए कुछ कमजोर तस्वीर पेश करता है। उस समय 62 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने हैरिस और 30 प्रतिशत ने ट्रंप का समर्थन करने की बात कही थी। वहीं 2020 में जो बाइडन के पक्ष में 68 प्रतिशत और ट्रंप के पक्ष में 22 प्रतिशत मतदाता थे। इस तरह भारतीय-अमेरिकी समुदाय अब भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है, लेकिन 2020 की तुलना में डेमोक्रेटिक वर्चस्व कमजोर हुआ है।

युवा पुरुषों का ट्रंप से मोहभंग

सर्वे का एक दिलचस्प पहलू युवा भारतीय-अमेरिकी पुरुषों के रुख में बदलाव है। 2024 में 18 से 39 वर्ष के भारतीय-अमेरिकी पुरुषों में ट्रंप को 40 प्रतिशत समर्थन मिला था। 2026 में यह घटकर 24 प्रतिशत रह गया। इसी आयु वर्ग की महिलाओं में ट्रंप का समर्थन 25 से घटकर 16 प्रतिशत हो गया। हालांकि दूसरी तरफ 40 वर्ष से अधिक आयु के भारतीय-अमेरिकी पुरुषों और महिलाओं में हैरिस के समर्थन में कमी दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि समुदाय के भीतर राजनीतिक बदलाव एकतरफा नहीं है।

ट्रंप से 71 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी नाराज

भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के डेमोक्रेटिक झुकाव को समझने में ट्रंप की लोकप्रियता भी अहम है। सर्वे के मुताबिक 71 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी ट्रंप के राष्ट्रपति के रूप में प्रदर्शन से असंतुष्ट हैं, जबकि केवल 29 प्रतिशत ने उनके कामकाज को मंजूरी दी। ट्रंप की आव्रजन नीति को लेकर भी समुदाय में व्यापक असहमति सामने आई। 64 प्रतिशत ने उनकी आव्रजन नीति को नापसंद किया। घरेलू आर्थिक नीतियों से 68 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों से 70 प्रतिशत मतदाता असहमत दिखे। एच-1बी वीजा को लेकर भी भारतीय-अमेरिकी समुदाय की चिंता महत्वपूर्ण है। सर्वे में दो-तिहाई से अधिक लोगों ने नए एच-1बी आवेदनों पर 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया।

आर्थिक मुद्दे सबसे बड़ी प्राथमिकता

भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के लिए राजनीतिक पसंद तय करने में भारत-अमेरिका संबंधों से ज्यादा घरेलू आर्थिक मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। सर्वे में 21 प्रतिशत लोगों ने महंगाई और कीमतों को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। 17 प्रतिशत ने रोजगार और अर्थव्यवस्था को सबसे अहम मुद्दा माना। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा 13 प्रतिशत और आव्रजन 11 प्रतिशत के साथ प्रमुख मुद्दे रहे। इसके विपरीत केवल चार प्रतिशत लोगों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और दो प्रतिशत ने भारत-अमेरिका संबंधों को अपना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

सर्वे में 1000 भारतीय-अमेरिकी शामिल

2026 Indian American Attitudes Survey में 1,000 भारतीय-अमेरिकी वयस्कों को शामिल किया गया। YouGov ने यह सर्वे 25 नवंबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच किया। सर्वे में अमेरिकी नागरिकों के साथ गैर-नागरिक भारतीय-अमेरिकियों को भी शामिल किया गया है। सर्वे का अधिकतम मार्जिन ऑफ एरर ±3.6 प्रतिशत है। कार्नेगी का यह सर्वे 2020 और 2024 में किए गए इसी अध्ययन की अगली कड़ी है। हालांकि 2026 में सैंपल फ्रेम में बदलाव कर मिश्रित नस्लीय पृष्ठभूमि वाले भारतीय-अमेरिकियों को बेहतर तरीके से शामिल किया गया है। इसलिए अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों की तुलना करते समय कुछ सावधानी बरतने की जरूरत है।

भारतीय-अमेरिकी वोट बैंक क्यों अहम

अमेरिका में भारतीय मूल के 52 लाख से अधिक लोग रहते हैं। आर्थिक रूप से प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से तेजी से सक्रिय हो रहा यह समुदाय राष्ट्रपति चुनावों में महत्वपूर्ण वोट बैंक बन चुका है। 2026 का सर्वे इस समुदाय की राजनीति में एक दिलचस्प बदलाव दिखाता है। भारतीय-अमेरिकी अब भी डेमोक्रेटिक पार्टी के सबसे मजबूत प्रवासी समर्थक समूहों में शामिल हैं, लेकिन पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा कमजोर हुई है। रिपब्लिकन पार्टी को कुछ अतिरिक्त समर्थन मिला है, जबकि बड़ी संख्या में मतदाता खुद को स्वतंत्र बता रहे हैं। यानि आने वाले अमेरिकी चुनावों में भारतीय-अमेरिकी वोटरों की लड़ाई केवल डेमोक्रेट बनाम रिपब्लिकन नहीं होगी, बल्कि स्वतंत्र और अनिर्णीत मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की भी होगी। यही वर्ग चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

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