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कानपुर नगर निगम में टेंडर घोटाले के बीच ईटीएफ प्रभारी का इस्तीफा

  • 2 सितंबर को नगर आयुक्त को भेजे नोटिस में पार्षदों के दबाव और प्रवर्तन टीम के खिलाफ कार्रवाई के आरोप; दिसंबर 2024 की घटनाओं का हवाला

भारत 19कानपुर। नगर निगम में टेंडर घोटाले की जांच के बीच अब प्रवर्तन टास्क फोर्स (ईटीएफ) को लेकर भी विवाद सामने आया है। ईटीएफ प्रभारी लेफ्टिनेंट कर्नल आलोक नारायण (सेवानिवृत्त) ने पद से हटने के लिए तीन माह का नोटिस दिया है। 2 सितंबर को नगर आयुक्त को भेजे पत्र में उन्होंने प्रवर्तन कार्रवाई में कथित हस्तक्षेप, पार्षदों के दबाव और टीम के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि उनका पहला कार्यकाल जनवरी 2019 से दिसंबर 2023 तक था। अगस्त 2024 में उन्हें फिर से ईटीएफ की जिम्मेदारी दी गई, इसी दौरान प्रदेश के सभी ईटीएफ के लिए उन्हें नोडल अधिकारी भी बनाया गया।

पॉलीथिन वाहन पकड़ा तो नगर निगम में बढ़ा विवाद

इस्तीफा नोटिस में सबसे प्रमुख मामला 17 दिसंबर 2024 का बताया है। ईटीएफ प्रभारी  के मुताबिक ईटीएफ ने प्रतिबंधित पॉलीथिन ले जा रहे वाहन को पकड़ा था। कार्रवाई के बाद कुछ पार्षद नगर निगम पहुंचे और वाहन को छोड़ने का दबाव बनाया। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया है कि उस दौरान प्रवर्तन दल को हटाने की धमकी भी दी गई। उन्होंने मामले की जानकारी तत्कालीन नगर आयुक्त को देने और इसकी जांच कराने का अनुरोध किया। तब इस विवाद की नगर निगम में खूब चर्चा हुई। तीन दिन बाद पार्षदों की बैठक हुई और उसके बाद प्रवर्तन दस्ते के खिलाफ विरोध की खबरें प्रकाशित हुई थीं।

दो कर्मचारियों की सेवा समाप्ति को भी जोड़ा

ईटीएफ प्रभारी ने अपने पत्र में 20 दिसंबर 2024 की एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक प्रवर्तन टीम के एक टीम लीडर और एक स्क्वाड कमांडर की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। पत्र में दावा किया गया है कि इस कार्रवाई के पीछे पार्षदों की शिकायत और दबाव की भूमिका थी। ईटीएफ प्रभारी ने इसे प्रवर्तन दल के काम में हस्तक्षेप से जोड़ते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है।

सदन में ईटीएफ हटाने की कोशिश का आरोप

नोटिस में 24 और 26 दिसंबर 2024 को हुई नगर निगम सदन की बैठकों का भी जिक्र है। ईटीएफ प्रभारी के अनुसार इन बैठकों में प्रवर्तन दल को हटाने और उसकी जगह दूसरी व्यवस्था बनाने से जुड़े प्रस्ताव रखे गए थे। पत्र में दिसंबर 2024 की तीन घटनाओं को क्रमवार रखा गया है, पहले वाहन पकड़े जाने के बाद विवाद, फिर प्रवर्तन टीम के दो अधिकारियों की सेवा समाप्ति और इसके बाद सदन में ईटीएफ को लेकर प्रस्ताव।

टेंडर घोटाले की जांच के बीच सामने आया पत्र

ईटीएफ प्रभारी का इस्तीफा नोटिस ऐसे वक्त आया है जब नगर निगम की ठेकेदारी व्यवस्था पहले से जांच के घेरे में है। टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद 125 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त किए गए हैं। पांच कंपनियों को ब्लैकलिस्ट और छह कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। दो ठेकेदारों की गिरफ्तारी भी हुई है। इसके बाद एसआईटी ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर टेंडर और फर्म पंजीकरण से जुड़ी फाइलों की जांच की। अधिकारियों से पूछताछ के साथ संबंधित दस्तावेज भी जांच के लिए लिए गए। यही नहीं, हाल में ऐसी फर्म को नगर निगम का ठेका दिए जाने पर भी सवाल उठे हैं, जिसे दूसरे शहरों में ब्लैकलिस्ट किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ठेका निर्धारित दर से करीब दोगुनी कीमत पर दिए जाने का आरोप है।

बजट बंटवारे को लेकर भी पार्षद आमने-सामने

नगर निगम में विकास बजट के बंटवारे को लेकर भी विवाद चल रहा है। 2 सितंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक भाजपा के बागी पार्षदों ने पिछले साढ़े तीन साल में 594 करोड़ रुपये के 765 विकास कार्यों के आवंटन पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ वार्डों को करोड़ों रुपये के काम मिले, जबकि कई वार्डों को कोई राशि नहीं मिली। इसी विवाद के बीच करीब 125 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर दोबारा कराने की तैयारी की जानकारी भी सामने आई है। इन टेंडरों के लिए 16 सितंबर की तारीख प्रस्तावित बताई गई है।

ईटीएफ विवाद ने नगर निगम की मुश्किल बढ़ाई

टेंडर जांच और बजट आवंटन को लेकर पहले से घिरे नगर निगम में ईटीएफ प्रभारी का इस्तीफा नोटिस नया विवाद खड़ा करता है। हालांकि पत्र में लगाए गए पार्षदों के खिलाफ आरोप ईटीएफ प्रभारी का पक्ष हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन पत्र में दिसंबर 2024 की घटनाओं का तारीखवार उल्लेख और उसी दौर में प्रवर्तन दस्ते को लेकर हुआ विवाद यह जरूर बताता है कि ईटीएफ और पार्षदों के बीच टकराव पहले भी सामने आ चुका है। अब नगर निगम प्रशासन के सामने यह सवाल है कि इस्तीफा नोटिस में लगाए गए आरोपों की जांच होगी या नहीं। खासकर ऐसे समय में जब नगर निगम की टेंडर व्यवस्था की जांच एसआईटी कर रही है और विकास बजट के आवंटन को लेकर पार्षदों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं।

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