- एप्रेजल समिति की सशर्त स्वीकृति की संस्तुति; दाल, मसाले, मूंगफली, फ्रोजन खाद्य और रेडी-टू-कुक इकाइयों से किसानों को बाजार, युवाओं को रोजगार की उम्मीद
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण के जरिए खेत से बाजार तक की दूरी घटाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत 10 नई परियोजनाओं को शर्तों के साथ मंजूरी की संस्तुति की गई है। इनमें दाल, मसाले, मूंगफली, फ्रोजन खाद्य और रेडी-टू-कुक उत्पादों से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं। इनके शुरू होने से स्थानीय किसानों की उपज की खरीद बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।
दाल से फ्रोजन खाद्य तक कई इकाइयां शामिल
खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय में अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बीएल मीणा की अध्यक्षता में एप्रेजल समिति की बैठक में पोर्टल पर प्राप्त नए निवेश प्रस्तावों की पात्रता, संबंधित अभिलेखों और निर्धारित मानकों की विस्तृत जांच की गई। परीक्षण के बाद 10 प्रस्तावों को जरूरी शर्तें पूरी करने के आधार पर स्वीकृति के लिए संस्तुति दी गई, जिनमें कैटल फीड, अनाज एवं रिफाइंड मसाले, मूंगफली प्रसंस्करण, फ्रोजन और अन्य खाद्य उत्पाद, रेडी-टू-कुक उत्पाद, तेल-आटा-दाल-बेसन निर्माण तथा दाल मिल जैसी गतिविधियां शामिल हैं। फ्रोजन फल एवं सब्जी प्रसंस्करण से जुड़ी परियोजनाएं भी इनमें शामिल हैं। कुछ परियोजनाओं में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी है। इससे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में वैकल्पिक ऊर्जा के इस्तेमाल की संभावना बढ़ेगी।
स्थानीय किसानों से कच्चा माल खरीदने पर जोर
एप्रेजल समिति ने परियोजनाओं को संस्तुति देते समय कई जरूरी शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें स्थानीय किसानों से कच्चे माल की खरीद प्रमुख है। इसके अलावा प्लांट मैप, अग्निशमन और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रमाणपत्र, उत्पादन क्षमता के उपयोग, विद्युत बिल और अन्य जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें भी पूरी करनी होंगी। स्थानीय स्तर पर कृषि उपज की खरीद और प्रसंस्करण होने से किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार का अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। वहीं कच्चे माल को तैयार उत्पाद में बदलने से उसकी मूल्यवृद्धि की संभावना भी बढ़ेगी।
गांव-गांव पहुंचेगी योजना की जानकारी
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत मिलने वाले अनुदान, प्रोत्साहन और सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि योजनाओं की जानकारी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि महिलाएं, स्वयं सहायता समूह, युवा, किसान और छोटे उद्यमी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कर सकें। सरकार का जोर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर है।
युवाओं को रोजगार देने वाला बनने पर जोर
उपमुख्यमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण को युवाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनका कहना है कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने वाला उद्यमी बनाने की दिशा में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को भी इस क्षेत्र से जोड़ने पर जोर दिया गया है। छोटी और मध्यम प्रसंस्करण इकाइयों के जरिए ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
कृषि उपज को स्थानीय स्तर पर मिलेगा मूल्य
उत्तर प्रदेश में गेहूं, धान, दलहन, तिलहन, फल और सब्जियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। सरकार इन कृषि उत्पादों को केवल कच्चे माल के रूप में बेचने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत कर मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने पर जोर दे रही है। इससे किसानों को नए खरीदार और बाजार मिल सकते हैं। साथ ही प्रसंस्करण इकाइयों के आसपास पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
आत्मनिर्भर गांव की दिशा में खाद्य उद्योग
उपमुख्यमंत्री के अनुसार विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में आत्मनिर्भर गांव, समृद्ध किसान, सशक्त महिला और रोजगारयुक्त युवा महत्वपूर्ण आधार हैं। खाद्य प्रसंस्करण को इसी कड़ी से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।


