- चार LPD के लिए इलेक्ट्रिक प्रणोदन तकनीक विकसित होगी, भारतीय सेना के लिए ब्रिटिश LMM की खरीद और उत्पादन सहयोग पर भी बढ़ी तैयारी
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नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए दो अहम समझौतों को जल्द अंतिम रूप देने की तैयारी में हैं। इनमें भारतीय नौसेना के लिए चार लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) में इलेक्ट्रिक प्रणोदन तकनीक विकसित करने और भारतीय सेना के लिए ब्रिटिश लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल (LMM) की खरीद से जुड़ा समझौता शामिल है। दोनों परियोजनाओं में भारत में तकनीकी क्षमता और उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर है।
चार युद्धपोतों के लिए इलेक्ट्रिक प्रणोदन
पहला समझौता भारतीय नौसेना के प्रस्तावित चार LPD के लिए इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (IFEP) तकनीक से संबंधित है। इसका उद्देश्य बड़े नौसैनिक पोतों के लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक प्रणोदन क्षमता विकसित करना है। इस तकनीक में जहाज की ऊर्जा उत्पादन और प्रणोदन व्यवस्था को एकीकृत किया जाता है। इससे पोत की प्रणोदन जरूरतों के साथ रडार, सेंसर, संचार और अन्य उच्च ऊर्जा वाली प्रणालियों को बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ सकती है। भारत और ब्रिटेन ने नवंबर 2024 में इस क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौते की मंशा संबंधी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत दोनों देशों ने इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली के संयुक्त डिजाइन, विकास और उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने की सहमति जताई थी।
भारत में होगी इलेक्ट्रिक प्रणाली की जांच
इलेक्ट्रिक प्रणोदन कार्यक्रम में भारत में भूमि आधारित परीक्षण सुविधा विकसित करना भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। GE Vernova और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) इस दिशा में सहयोग कर रहे हैं। ऐसी सुविधा में समुद्र में पोत पर प्रणाली लगाने से पहले उसके प्रदर्शन और तकनीकी क्षमता की जांच की जा सकेगी। इससे भारत में इस क्षेत्र की विशेषज्ञता और भविष्य के नौसैनिक पोतों के लिए तकनीकी आधार मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
भारतीय सेना के लिए LMM मिसाइलों की खरीद
दूसरा अहम समझौता भारतीय सेना के लिए ब्रिटेन की लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल (LMM) की आपूर्ति से जुड़ा है। दोनों देशों ने पहले ही इस मिसाइल की शुरुआती खरीद के लिए सरकार-से-सरकार माध्यम से आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। LMM हल्की और बहुउद्देश्यीय मिसाइल है। इसका इस्तेमाल विभिन्न हवाई लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है। इसका हल्का आकार इसे ऐसी प्रणालियों में उपयोग के लिए उपयुक्त बनाता है, जिन्हें तेजी से तैनात किया जा सके।
मिसाइल उत्पादन में भारतीय कंपनियों की भूमिका
भारत-ब्रिटेन का सहयोग केवल तैयार मिसाइलों की खरीद तक सीमित नहीं है। Thales UK और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) LMM के भारत में सह-उत्पादन की दिशा में भी काम कर रहे हैं। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को मिसाइल निर्माण की तकनीक और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने का अवसर मिलेगा। आगे चलकर भारत में निर्मित मिसाइलों के दूसरे बाजारों में जाने की संभावना भी बन सकती है।
दोनों समझौते आत्मनिर्भरता से जुड़े
इन दोनों प्रस्तावित समझौतों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इनका फोकस केवल विदेशी रक्षा उपकरण खरीदने पर नहीं है। इलेक्ट्रिक प्रणोदन के मामले में भारत में तकनीक के विकास और परीक्षण की क्षमता तैयार करने की कोशिश है। वहीं LMM कार्यक्रम में भारतीय कंपनी को उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने पर जोर है। इससे भारत की बढ़ती रक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ घरेलू रक्षा उद्योग की तकनीकी क्षमता मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
भारत-ब्रिटेन रक्षा संबंधों में नया चरण
भारत और ब्रिटेन पिछले कुछ वर्षों में रक्षा सहयोग को खरीद से आगे बढ़ाकर सह-विकास और सह-उत्पादन की दिशा में ले जाने पर जोर दे रहे हैं। इलेक्ट्रिक प्रणोदन और LMM से जुड़े प्रस्ताव इसी व्यापक सहयोग का हिस्सा हैं। यदि दोनों समझौतों पर जल्द हस्ताक्षर होते हैं तो भारतीय नौसेना को बड़े युद्धपोतों के लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक प्रणोदन क्षमता विकसित करने का रास्ता मिलेगा। वहीं LMM कार्यक्रम से भारतीय सेना की क्षमता बढ़ने के साथ घरेलू मिसाइल उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


