- जांच में कुछ कम्पाउंडेड हींग में जरूरी 5% अल्कोहल-सॉल्यूबल एक्सट्रैक्ट के मुकाबले 0-3% मिला; Laljee Godhoo की कच्ची हींग में 15-32% स्टार्च पाया गया
भारत 19
नई दिल्ली। रसोई में इस्तेमाल होने वाली कम्पाउंडेड हींग की गुणवत्ता को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दो प्रमुख ब्रांडों पर कार्रवाई की है। Everest और Laljee Godhoo (LG) की कम्पाउंडेड हींग के नमूनों को जांच में निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। उसके बाद FSSAI ने हींग से संबंधित उत्पादों की बिक्री रोकने की कार्रवाई की है। कंपनियों के बाकी खाद्य उत्पादों पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
मामला एक उपभोक्ता शिकायत के बाद शुरू हुई निगरानी से सामने आया। शिकायत मिलने पर FSSAI ने बाजार में उपलब्ध कम्पाउंडेड हींग के प्रमुख ब्रांडों की जांच शुरू की। इसके तहत कानूनी प्रक्रिया के अनुसार नमूने लिए गए और प्रयोगशालाओं में उनकी जांच कराई गई। जांच के बाद दोनों कंपनियों के संबंधित उत्पादों में गड़बड़ी सामने आई। FSSAI के अनुसार कम्पाउंडेड हींग में अल्कोहल-सॉल्यूबल एक्सट्रैक्ट कम से कम 5 प्रतिशत होना चाहिए। जांच में कुछ नमूनों में यह मात्रा 5 प्रतिशत के बजाय 0 से 3 प्रतिशत तक पाई गई। नियामक के मुताबिक यह निर्धारित मानक से कम है। इसका मतलब है कि संबंधित उत्पादों में मानक के मुताबिक जरूरी मात्रा में कच्ची हींग मौजूद नहीं थी।
Everest की कम्पाउंडेड हींग के नमूने भी मानक से नीचे
जांच में Everest की कम्पाउंडेड हींग के नमूनों में भी अल्कोहल-सॉल्यूबल एक्सट्रैक्ट निर्धारित स्तर से कम मिला। कंपनी की पीली और काली कम्पाउंडेड हींग के नमूनों में यह क्रमश: 3.29 प्रतिशत और 4.4 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि मानक 5 प्रतिशत है। FSSAI ने जांचे गए संबंधित उत्पादों को ‘Misbranded and Sub-standard’ श्रेणी में रखा है।
LG की कच्ची हींग में 32% तक स्टार्च
Laljee Godhoo की इकाई से तैयार कम्पाउंडेड हींग के अलावा कच्ची हींग के छह नमूनों की भी जांच की गई। इनमें स्टार्च की मात्रा 15 से 32 प्रतिशत के बीच मिली। FSSAI के मुताबिक कच्ची हींग में स्टार्च की अधिकतम अनुमत मात्रा 1 प्रतिशत है। इस आधार पर इन नमूनों को भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।
क्या होती है कम्पाउंडेड हींग
कम्पाउंडेड हींग ऐसी हींग होती है जिसमें कच्ची हींग के साथ कुछ अन्य निर्धारित खाद्य सामग्री मिलाई जाती है। FSSAI के मानकों में गोंद, स्टार्च और आटे जैसे घटकों के इस्तेमाल की अनुमति है, लेकिन अंतिम उत्पाद में तय गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य है। इसलिए कम्पाउंडेड हींग होना अपने आप में नियमों का उल्लंघन नहीं है। कार्रवाई का आधार जांच में उत्पादों का निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरना है।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी निगरानी
FSSAI के मुताबिक कार्रवाई की शुरुआत एक उपभोक्ता शिकायत से हुई। इसके बाद देश भर में कम्पाउंडेड हींग की निगरानी बढ़ाई गई और विभिन्न इकाइयों से कानूनी नमूने लिए गए। मुंबई स्थित संबंधित इकाइयों के नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराई गई। गुजरात के उमरगांव स्थित Everest इकाई में राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन के साथ संयुक्त निरीक्षण और सैंपलिंग भी की गई।
कंपनियों को सुधार की योजना देने के निर्देश
FSSAI ने दोनों कंपनियों को सुधारात्मक कार्रवाई की विस्तृत योजना देने को कहा है। बाजार में मौजूद मानक से नीचे पाए गए उत्पादों को स्वेच्छा से वापस लेने की सलाह भी दी गई है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना कंपनियों की जिम्मेदारी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।


