- जौहरी फाटक में कच्चे मकान की छत-दीवार ढही, मलबे में दबे महिला और युवक को बचाया; बिरहाना रोड में जर्जर मकान गिरा, खाली होने से टली जनहानि
भारत 19
कानपुर। लगातार बारिश के बीच शहर में कच्चे और जर्जर मकानों के गिरने की दो घटनाएं सामने आईं। फीलखाना के जौहरी फाटक में एक कच्चे मकान की छत और दूसरे की दीवार गिरने से करीब 60 वर्षीय महिला और 28 वर्षीय युवक मलबे में दब गए। पुलिस, फायर सर्विस और राहत टीमों ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजा। वहीं बिरहाना रोड की नील वाली गली में एक पुराना जर्जर मकान भरभराकर गिर गया। हादसे के समय मकान के अंदर कोई नहीं था, जिससे जनहानि टल गई।
जौहरी फाटक में मलबे में दबे महिला-युवक
फीलखाना थाना क्षेत्र के जौहरी फाटक की बेहद संकरी गली में अगल-बगल बने दो कच्चे मकान बारिश के बीच अचानक क्षतिग्रस्त हो गए। एक की छत और दूसरे की दीवार गिरने से दोनों लोग मलबे में दब गए। सूचना मिलते ही फीलखाना पुलिस मौके पर पहुंची। फायर सर्विस और एनडीआरएफ को भी सूचना दी गई। पुलिस और राहत टीम ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। इसके बाद दोनों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
बिरहाना रोड पर जर्जर मकान भरभराकर गिरा
बारिश के बीच बिरहाना रोड स्थित नील वाली गली में एक पुराना जर्जर मकान भी अचानक गिर गया। मकान गिरने से आसपास अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक भवन में पहले से दरारें थीं और बारिश के कारण इसकी स्थिति और कमजोर हो गई थी। बताया गया कि मकान ट्रस्ट का था और इसमें मुन्नी देवी अपने दो बेटों के साथ रहती थीं। हालांकि हादसे के समय मकान के अंदर कोई मौजूद नहीं था। सूचना पर स्थानीय पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और मलबा हटाने का काम शुरू किया।
बारिश में कच्चे-जर्जर मकानों की सुरक्षा पर सवाल
दो अलग-अलग इलाकों में मकानों के गिरने की घटनाओं ने शहर की घनी बस्तियों में कच्चे और जर्जर मकानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। संकरी गलियों में पुराने और कमजोर भवनों की पहचान तथा बारिश से पहले उनकी स्थिति का आकलन कितना प्रभावी है, यह भी महत्वपूर्ण है। जौहरी फाटक में कच्चे मकान में लोगों के रहने की स्थिति एक और सवाल खड़ा करती है—क्या ऐसे परिवारों की आवासीय जरूरतों और मकान की स्थिति का सरकारी स्तर पर नियमित सर्वे हो रहा है?
आवास योजना के सर्वे की भी हो पड़ताल
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत पात्र परिवारों की आवास स्थिति का सर्वे किया जाता है। ऐसे में जौहरी फाटक जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में रहने वाले कच्चे मकानों के परिवारों को लेकर सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी है। यह सामने आना चाहिए कि इस इलाके में कच्चे मकानों में रहने वाले कितने परिवारों का सर्वे हुआ, कितने पात्र पाए गए, कितनों ने योजना के लिए आवेदन किया और कितनों को पक्के आवास का लाभ मिला। यदि सर्वे के बाद भी परिवार असुरक्षित कच्चे मकानों में रह रहे हैं तो उनकी मौजूदा आवासीय स्थिति का दोबारा आकलन हुआ या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
जर्जर मकानों की पहचान और कार्रवाई कितनी प्रभावी
बिरहाना रोड का मकान पहले से जर्जर बताया जा रहा था और स्थानीय लोगों के मुताबिक उसमें दरारें भी थीं। ऐसे में यह भी देखा जाना चाहिए कि नगर निगम के रिकॉर्ड में भवन की स्थिति दर्ज थी या नहीं और यदि भवन खतरनाक श्रेणी में था तो उसे लेकर कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं। लगातार बारिश के बीच शहर में ऐसे मकानों की संख्या और उनकी मौजूदा स्थिति का आकलन अब जरूरी हो गया है। जौहरी फाटक में दो लोगों का समय रहते रेस्क्यू हो गया और बिरहाना रोड में मकान खाली होने से जनहानि टल गई, लेकिन दोनों घटनाओं ने कमजोर आवासों की सुरक्षा और सरकारी सर्वे की जमीनी पहुंच पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।


