Hot Topics

उकठा रोगरोधी चने की किस्म, सीएसए की बड़ी उपलब्धि

  • KWR-108 का वर्षों पहले उकठा संक्रमित खेत में किया गया सफल परीक्षण, पूर्वी यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए अनुकूल; 22-23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक संभावित उपज

भारत 19

विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। चना किसानों की बड़ी समस्या बने उकठा रोग के खिलाफ रोगरोधी चने की किस्म विकसित करना चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) की अहम वैज्ञानिक उपलब्धि रही है। विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने KWR-108 का परीक्षण ऐसे खेत में किया था, जो उकठा रोग से संक्रमित था। संक्रमित परिस्थितियों में भी इस प्रजाति से अच्छी पैदावार मिलने के बाद यह किसानों के लिए उपयोगी किस्म बनी।

सीएसए के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने रबी दलहन अनुसंधान की वार्षिक बैठक में बताया कि KWR-108 विश्वविद्यालय की पुरानी विकसित प्रजातियों में शामिल है। वर्षों पहले विश्वविद्यालय के उकठा संक्रमित खेत में इसकी बुवाई कर परीक्षण किया गया था। रोग के बावजूद इसकी अच्छी पैदावार हुई। इसके बाद यह प्रजाति किसानों तक पहुंची और उकठा प्रभावित क्षेत्रों में चना उत्पादन के लिए उपयोग होने लगी।

संक्रमित खेत में परीक्षण ने साबित की क्षमता

KWR-108 की सबसे बड़ी विशेषता उकठा रोग के प्रति रोग रोधी क्षमता है। चने में उकठा रोग गंभीर होने पर पौधे सूख सकते हैं और उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे क्षेत्रों में रोगरोधी किस्म फसल नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद करती है। रोग रोधी क्षमता के कारण रोग प्रबंधन पर होने वाली अतिरिक्त लागत घटाने और उत्पादन को अपेक्षाकृत स्थिर रखने की संभावना भी रहती है।

तीन राज्यों के लिए अनुकूल, 23 क्विंटल तक उपज

KWR-108 को पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए अनुकूल बताया गया है। इसकी संभावित उपज करीब 22 से 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

उकठा रोग से चना उत्पादन को रहता है खतरा

उकठा चना, अरहर और मसूर जैसी दलहन फसलों में होने वाला मृदा जनित रोग है। यह मुख्य रूप से फ्यूजेरियम कवक से फैलता है, जो मिट्टी में लंबे समय तक जीवित रह सकता है। रोग की शुरुआत में पौधों की पत्तियां पीली पड़कर ऊपर से सूखने लगती हैं। दोपहर में पौधा मुरझा सकता है और शाम को कुछ हरा दिखाई दे सकता है। सूखे पौधे के तने को चीरने पर अंदर गहरी भूरी या काली धारी दिखाई देना भी इसका लक्षण है।

KWR-108 से किसानों को क्या फायदा

  • उकठा रोग के प्रति रोगरोधी क्षमता
  • पूर्वी यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए अनुकूल
  • 22-23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक संभावित उपज
  • रोग प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का जोखिम घटाने में मदद
  • रोग प्रबंधन की लागत कम करने की संभावना
  • उत्पादन को अपेक्षाकृत स्थिर रखने में सहायक

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News