- थोक बाजार में एक महीने में 923 रुपये क्विंटल उछाल, फुटकर में 50 और ऑनलाइन 56 रुपये किलो तक पहुंचा भाव, 800 टन प्याज लेकर दिल्ली रवाना हुई कांदा एक्सप्रेस
राजीव सक्सेना, नई दिल्ली। त्योहारों और सहालग से पहले प्याज ने रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। महज 31 दिन में देश में प्याज के औसत थोक भाव में करीब 34 फीसदी की तेजी आ गई। थोक बाजार से शुरू हुई यह महंगाई अब आम आदमी की रसोई तक पहुंच चुकी है। कई फुटकर बाजारों में प्याज 50 रुपये किलो तक बिक रहा है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसका भाव 56 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कीमतों को और बढ़ने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक बाजार में उतारने की कवायद तेज कर दी है। इसी के तहत नासिक से 800 टन प्याज लेकर कांदा एक्सप्रेस 26 अगस्त को दिल्ली के लिए रवाना हुई। सरकारी एजेंसियों के जरिए इसे दिल्ली में 35 रुपये किलो की दर से बेचने की योजना है।
एक महीने में 923 रुपये क्विंटल चढ़ा प्याज
उपभोक्ता मामले विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक 25 जुलाई को देश में प्याज का औसत थोक भाव 2,750.31 रुपये प्रति क्विंटल** था। 25 अगस्त तक यह बढ़कर 3,673.05 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया। यानी 31 दिन में थोक भाव 922.74 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा और इसमें 33.55 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। सालाना आधार पर भी प्याज की कीमत में बड़ा उछाल है। 25 अगस्त 2025 को औसत थोक भाव 2,254.47 रुपये प्रति क्विंटल था। इस लिहाज से इस बार थोक भाव करीब 63 फीसदी अधिक है।
रसोई पर असर, बाजार से ऐप तक महंगा प्याज
प्याज की बढ़ती कीमत का असर अब सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। 25 अगस्त को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 44.72 रुपये किलो रहा। एक दिन पहले यह 43.53 रुपये किलो था। यानी एक ही दिन में औसत खुदरा कीमत में करीब 2.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कई फुटकर बाजारों में प्याज 50 रुपये किलो तक पहुंच चुका है। वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पिछले दो सप्ताह में कीमतों में करीब 40 फीसदी तक तेजी आने के बाद प्याज 56 रुपये किलो तक बिक रहा है। 24 अगस्त का औसत खुदरा भाव पिछले साल के 27.37 रुपये किलो के मुकाबले करीब 59 फीसदी अधिक था।
रबी का स्टॉक घटा, खरीफ की आवक अभी कम
प्याज की मौजूदा तेजी के पीछे फसलों के बीच का मौसमी अंतराल भी एक बड़ा कारण है। रबी और खरीफ फसल के बीच के इस दौर में भंडारित रबी प्याज का स्टॉक कम होने लगता है, जबकि खरीफ की नई फसल की आवक अभी पूरी तरह बाजार में नहीं पहुंचती। इस बार लगातार बारिश ने आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से मंडियों तक आवक और परिवहन प्रभावित होने की आशंका है। खेतों में अधिक नमी और जलभराव से नई फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि मौजूदा तेजी को सीधे उत्पादन में कमी से जोड़ना सही नहीं होगा। देश में प्याज का अनुमानित उत्पादन पिछले वर्ष के करीब-करीब बराबर है। ऐसे में कीमतों की मौजूदा चाल में मौसमी आपूर्ति दबाव और मंडियों में आवक की स्थिति बड़ी भूमिका निभा रही है।
1.21 लाख टन बफर से कीमतों पर लगाम
प्याज के दाम और न बढ़ें, इसके लिए केंद्र सरकार अपने 1.21 लाख टन के बफर स्टॉक का इस्तेमाल कर रही है। नासिक से दिल्ली समेत प्रमुख खपत केंद्रों तक रेल के जरिए प्याज पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। 800 टन प्याज लेकर रवाना हुई कांदा एक्सप्रेस इस कवायद की पहली बड़ी कड़ी है। दिल्ली में सरकारी एजेंसियों के माध्यम से प्याज को 35 रुपये किलो बेचने की योजना है। यह 25 अगस्त के राष्ट्रीय औसत खुदरा भाव 44.72 रुपये किलो से करीब 22 फीसदी कम है। सरकार ने दिल्ली के अलावा चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे प्रमुख खपत केंद्रों में भी बफर स्टॉक से प्याज भेजने की व्यवस्था की है। मकसद बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों की तेजी को थामना है।
त्योहार और सहालग बढ़ाएंगे सरकार की चुनौती
आने वाले महीनों में प्याज की मांग और बढ़ने की संभावना है। सितंबर से त्योहारों का सिलसिला शुरू होगा। इसके बाद नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ और दीपावली जैसे बड़े पर्व आएंगे। होटल, रेस्तरां, ढाबों और कैटरिंग कारोबार में भी खपत बढ़ने की उम्मीद है। इसके बाद सहालग का दौर शुरू होने पर सामूहिक भोज और विवाह समारोहों से प्याज की मांग और तेज हो सकती है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती सिर्फ मौजूदा कीमतों को कम करने की नहीं, बल्कि त्योहारों के दौरान आपूर्ति बनाए रखने और प्याज को फिर महंगा होने से रोकने की भी है। अब अगले कुछ सप्ताह में बारिश का रुख, खरीफ प्याज की नई आवक और केंद्र सरकार की बफर स्टॉक से बिक्री तय करेगी कि प्याज के दाम थमते हैं या त्योहारों से पहले रसोई पर महंगाई का दबाव और बढ़ता है।
