- ऑपरेशन ब्लैक हॉक में 18.64 किलो कच्ची हेरोइन बरामद, तीन आरोपी गिरफ्तार, असम से आई कार और सिलीगुड़ी-लखनऊ रूट के ट्रक में बनाए थे गुप्त ठिकाने
भारत 19
लखनऊ। हेरोइन तस्करों ने इस बार पुलिस और जांच एजेंसियों की सामान्य तलाशी को चकमा देने के लिए वाहनों की बनावट ही बदल डाली। एक कार के फ्यूल टैंक में विशेष गुप्त जगह बनाई गई, जबकि दूसरी खेप ट्रक के बॉडी फ्रेम के भीतर छिपाई गई। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने ऑपरेशन ब्लैक हॉक के तहत दो कार्रवाई में कुल 18.64 किलो कच्ची हेरोइन बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई ने उत्तर-पूर्व से उत्तर प्रदेश तक सक्रिय उस ड्रग रूट की ओर भी इशारा किया है, जिसमें लंबी दूरी की यात्रा और सामान्य दिखने वाले वाहनों का इस्तेमाल कर मादक पदार्थों की खेप पहुंचाई जा रही थी।
500 किमी में चार बार फ्यूल भरवाया, यहीं से बढ़ा शक
CBN की मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश इकाइयों को उत्तर-पूर्व से लखनऊ की ओर हेरोइन की खेप लाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीमों ने 20 और 21 अगस्त की रात सुल्तानपुर-लखनऊ हाईवे पर निगरानी शुरू की और टोल प्लाजा के जरिए संदिग्ध वाहन की गतिविधियों पर नजर रखी। 21 अगस्त को लखनऊ के पास असम नंबर की एक Hyundai Creta को रोका गया। शुरुआती तलाशी में कुछ नहीं मिला, लेकिन पूछताछ के दौरान वाहन सवारों ने करीब 500 किलोमीटर की यात्रा में चार बार ईंधन भरवाने की बात कही। यहीं से जांचकर्ताओं का संदेह गहरा गया। विस्तृत तकनीकी जांच के बाद कार को CBN कार्यालय ले जाया गया और फ्यूल टैंक खोला गया। उसके भीतर बनाई गई विशेष कैविटी से 25 वाटरप्रूफ पैकेटों में छिपाई गई 16.48 किलो कच्ची हेरोइन बरामद हुई। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

सिलीगुड़ी-लखनऊ रूट पर ट्रक से दूसरी खेप
पहली कार्रवाई के बाद CBN को दूसरी सूचना मिली कि सिलीगुड़ी से लखनऊ की ओर आ रहे एक भारी वाहन में भी मादक पदार्थ छिपाया गया है। एजेंसी ने वाहन को टोल प्लाजा के जरिए ट्रैक किया और बाराबंकी के पास उसे रोक लिया। ट्रक की सामान्य तलाशी में कुछ नहीं मिला। लेकिन विस्तृत जांच में उसके बॉडी फ्रेम के भीतर बनाया गया गुप्त चैंबर सामने आया। यहां से 2.16 किलो कच्ची हेरोइन बरामद की गई और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों कार्रवाई को मिलाकर बरामदगी 18.64 किलो पहुंच गई।

तस्करों ने बदली तस्करी की तकनीक
इस मामले का सबसे अहम पहलू बरामद हेरोइन की मात्रा से ज्यादा उसका छिपाने का तरीका है। एक खेप वाहन के फ्यूल टैंक में बनाई गई गुप्त जगह में रखी गई थी, जबकि दूसरी को ट्रक की संरचना के भीतर छिपाया गया। इस तरह की तस्करी सामान्य जांच और सतही तलाशी को बेअसर करने की कोशिश मानी जा रही है। वाहनों को बाहर से सामान्य रखते हुए उनकी मूल संरचना में बदलाव करना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ाता है।
उत्तर-पूर्व से यूपी तक नेटवर्क
अब CBN की जांच का फोकस केवल गिरफ्तार तीन आरोपियों तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि हेरोइन की खेप उत्तर-पूर्व में किसने तैयार या उपलब्ध कराई, उसे उत्तर प्रदेश तक पहुंचाने के लिए कौन-सा नेटवर्क सक्रिय था और लखनऊ पहुंचने के बाद इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। जांच में वित्तीय लेन-देन, मोबाइल संपर्क, वाहन नेटवर्क और संभावित सप्लायरों की कड़ियां भी खंगाली जा रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि असम से लखनऊ और सिलीगुड़ी-लखनऊ के रास्ते केवल ये दो खेप आई थीं या इसी नेटवर्क के दूसरे वाहन भी उत्तर प्रदेश तक मादक पदार्थ पहुंचा रहे हैं।

तीन गिरफ्तारियां, जांच अब पूरे नेटवर्क तक
तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। बरामदगी के बाद CBN के सामने अब अगला लक्ष्य सप्लाई चेन के उन लोगों तक पहुंचना है, जो उत्तर-पूर्व से खेप भेजने, परिवहन की व्यवस्था करने और उत्तर प्रदेश में उसके वितरण से जुड़े हो सकते हैं।

