- वाणिज्यिक जहाजों के लिए संयुक्त अस्थायी कॉरिडोर और माइन-क्लीयरिंग पर सहमति की दिशा में बढ़े कदम, बातचीत की उम्मीद से कच्चे तेल में तेज गिरावट, वैश्विक ऊर्जा बाजार ने दिखाई तत्काल प्रतिक्रिया
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सामान्य जहाजरानी अभी बहाल नहीं हुई है, लेकिन ईरान और ओमान ने वाणिज्यिक जहाजों के लिए एक संयुक्त अस्थायी नौवहन गलियारा बनाने की दिशा में नई पहल की है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बातचीत में जलमार्ग को सुरक्षित बनाने और समुद्री सुरंगों को साफ करने के लिए संयुक्त परियोजना पर भी चर्चा हुई।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज से होकर पहले वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था, लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष के बाद यहां से सामान्य वाणिज्यिक आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में प्रस्तावित कॉरिडोर को होर्मुज के पूरी तरह खुलने के बजाय पहले सीमित और नियंत्रित जहाजरानी बहाल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पहले अस्थायी कॉरिडोर, फिर सामान्य आवाजाही की तैयारी
ईरान और ओमान के बीच जिस ढांचे पर चर्चा हुई है, उसका केंद्र चरणबद्ध व्यवस्था है। शुरुआती योजना में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक संयुक्त अस्थायी मार्ग तैयार करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर है। इसके बाद ही व्यापक और स्थायी नौवहन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इसे होर्मुज के सामान्य रूप से खुलने की घोषणा नहीं माना जा सकता। सुरक्षा जोखिम और क्षेत्रीय तनाव बने हुए हैं, इसलिए प्रस्ताव को जमीन पर उतारना अगली बड़ी चुनौती होगी।
माइन-क्लीयरिंग बनी योजना का अहम हिस्सा
समुद्री रास्ते की बहाली के लिए सिर्फ कूटनीतिक सहमति पर्याप्त नहीं होगी। ईरान और ओमान ने जलडमरूमध्य से समुद्री सुरंगें हटाने के लिए संयुक्त परियोजना पर भी चर्चा की है। यही माइन-क्लीयरिंग प्रस्तावित कॉरिडोर की सफलता का सबसे अहम तकनीकी और सुरक्षा पहलू बन सकती है।
बातचीत शुरू होते ही तेल बाजार में तेज प्रतिक्रिया
होर्मुज में जहाजरानी बहाल होने की संभावना ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को तुरंत प्रभावित किया। बातचीत आगे बढ़ने की खबर के बाद ब्रेंट और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार ने इसे आपूर्ति बाधित रहने की आशंका कम होने के संकेत के रूप में लिया, हालांकि जलमार्ग को दोबारा सामान्य करने पर अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
दुनिया की नजर अब इस बात पर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान और ओमान की यह पहल कागज और कूटनीतिक बातचीत से आगे बढ़कर वास्तविक समुद्री कॉरिडोर का रूप कब लेती है। यदि अस्थायी रास्ते से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही शुरू होती है, तो इसका असर तेल, एलएनजी, मालभाड़े और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। भारत समेत एशिया और यूरोप के बड़े ऊर्जा आयातक देशों की नजर भी इसी पर टिकी है। फिलहाल खबर का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि होर्मुज पूरी तरह नहीं खुला है, लेकिन बंद पड़े इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में पहला अस्थायी रास्ता निकालने की कोशिश शुरू हो गई है।


