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मई 2027 से नए आयकर कानून पर होगी CA परीक्षा

  • ICAI ने बदला टैक्सेशन पाठ्यक्रम, नए Income Tax Act 2025 से पहली बार होगी परीक्षा

भारत 19

राजीव सक्सेना, नई दिल्ली। चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए आयकर कानून की पढ़ाई अब नई किताबों और नई व्यवस्था के साथ होगी। मई 2027 की CA इंटरमीडिएट परीक्षा में पहली बार प्रश्न नए आयकर अधिनियम, 2025 के आधार पर पूछे जाएंगे। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने मई 2027 परीक्षा समूह के लिए नया पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री लागू कर दी है।

एक अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद ICAI ने भी कराधान विषय को नए कानून के अनुरूप ढालना शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा, जो मई 2027 से CA इंटरमीडिएट परीक्षा देंगे। उनके लिए 1961 के आयकर अधिनियम पर आधारित पुरानी अध्ययन व्यवस्था की जगह नया कानून पढ़ना अनिवार्य होगा।

मई 2027 से बदल जाएगा टैक्सेशन का सिलेबस

ICAI के नए पाठ्यक्रम में CA इंटरमीडिएट के कराधान विषय को नए आयकर अधिनियम के अनुरूप तैयार किया गया है। संस्थान ने मई 2027 परीक्षा समूह के लिए नई अध्ययन सामग्री जारी कर दी है, ताकि छात्र नए प्रावधानों के आधार पर प्रश्नों को समझ और हल कर सकें। इस बदलाव के तहत इंटरमीडिएट के कई विषयों की अध्ययन सामग्री को भी अद्यतन किया गया है। इनमें उन्नत लेखांकन, निगम एवं अन्य कानून, कराधान
लागत एवं प्रबंधन लेखांकन, लेखा-परीक्षण, वित्तीय प्रबंधन एवं रणनीतिक प्रबंधन शामिल हैं।

2026 और जनवरी 2027 के परीक्षार्थियों पर असर नहीं

यह बदलाव सभी मौजूदा CA छात्रों पर एक साथ लागू नहीं होगा। मई 2026, सितंबर 2026 और जनवरी 2027 की CA इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए आयकर कानून की अध्ययन सामग्री अभी पुराने आयकर अधिनियम, 1961 पर आधारित रहेगी। इसका मतलब है कि मई 2027 परीक्षा समूह से पहले तक परीक्षा देने वाले छात्रों को पुरानी व्यवस्था के अनुसार तैयारी करनी होगी, जबकि मई 2027 और उसके बाद के छात्रों को नए आयकर अधिनियम, 2025 के मुताबिक पढ़ना होगा।

‘पूर्व वर्ष’ की जगह आएगा ‘कर वर्ष’

नए आयकर कानून में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक कर से जुड़ी शब्दावली है। पुराने कानून में इस्तेमाल होने वाली ‘पूर्व वर्ष’ की अवधारणा की जगह नए कानून में ‘कर वर्ष’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। एक अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली अवधि को कर वर्ष 2026-27 के रूप में समझा जाएगा। इसका उद्देश्य आय अर्जित करने और कर निर्धारण से संबंधित अलग-अलग वर्षों की शब्दावली को सरल बनाना है। CA छात्रों के लिए यह बदलाव खास मायने रखता है, क्योंकि कराधान की पढ़ाई में आय की गणना, कर देयता और संबंधित प्रावधानों को समझने में वर्ष की अवधारणा महत्वपूर्ण होती है।

पुराने आयकर कानून की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं

नया कानून लागू होने के बावजूद CA छात्रों और पेशेवरों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की उपयोगिता तत्काल समाप्त नहीं होगी। एक अप्रैल 2026 से पहले शुरू होने वाले कर वर्षों से जुड़े मामले पुराने कानून के तहत ही निपटाए जाएंगे। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में CA पेशेवरों को ऐसे मामलों से भी निपटना पड़ सकता है, जहां किसी करदाता का पुराना मामला 1961 के कानून के तहत चल रहा हो, जबकि नई आय या नए कर वर्ष से जुड़ा मामला आयकर अधिनियम, 2025 के अनुसार देखा जाए। यानी नए CA के सामने सिर्फ नया कानून पढ़ने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि पुराने और नए आयकर कानून के बीच अंतर समझना भी पेशेवर कौशल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।

पुराने नोट्स और किताबें बदलनी होंगी

मई 2027 परीक्षा समूह के छात्रों के सामने व्यावहारिक चुनौती भी होगी। जिन्होंने पहले से आयकर अधिनियम, 1961 के आधार पर किताबें, नोट्स या कोचिंग सामग्री तैयार की है, उन्हें अपनी पढ़ाई नए कानून की संरचना के अनुरूप बदलनी होगी। नए अधिनियम में धाराओं, अनुसूचियों, नियमों और प्रपत्रों की संरचना में बदलाव किया गया है। इसलिए केवल पुराने प्रावधानों को पढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों को नई शब्दावली, नई संरचना और बदले हुए प्रावधानों के अनुसार तैयारी करनी पड़ेगी।

नए कानून वाली पहली CA पीढ़ी होगी तैयार

ICAI की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के पूर्व चेयरमैन दीप कुमार मिश्रा के अनुसार, नया आयकर कानून CA छात्रों के लिए शुरुआती दौर में चुनौती जरूर पैदा करेगा, लेकिन इसका उद्देश्य उन्हें बदली हुई कर व्यवस्था के अनुरूप तैयार करना है। मई 2027 परीक्षा समूह के छात्र वह पहली पीढ़ी होंगे, जिनका प्रत्यक्ष कर कानून का औपचारिक अध्ययन नए आयकर अधिनियम, 2025 के आधार पर होगा। पेशेवर जीवन की शुरुआत में उन्हें पुराने और नए कानून, दोनों से जुड़े मामलों को समझना पड़ सकता है। लेकिन यही दोहरी समझ आगे चलकर उनकी पेशेवर ताकत भी बन सकती है। आयकर रिटर्न, टैक्स प्लानिंग, टैक्स असेसमेंट, TDS, अपील और टैक्स कंप्लायंस जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले नए CA के लिए दोनों कानूनों के बीच अंतर समझना जरूरी होगा।

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