- पहले विदेश में होने की थी आशंका, अब भारत में तलाश तेज, शुभम जायसवाल के करीबी वरुण सिंह के ठिकाने का सुराग जुटा रहीं जांच एजेंसियां, गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं
भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चर्चित कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में जांच एजेंसियों को आरोपी वरुण सिंह के ठिकाने को लेकर नया सुराग मिला है। पहले उसके सिंडिकेट के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल और गौरव जायसवाल के साथ दुबई में होने की आशंका जताई जा रही थी। अब जांच एजेंसियों को जानकारी मिली है कि वरुण दुबई से काफी पहले भारत लौट आया था। फिलहाल वह जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर है और उसकी तलाश की जा रही है।
दुबई में होने की आशंका के बाद बदला जांच का रुख
वरुण सिंह के दुबई जाने की जानकारी मिलने के बाद एजेंसियां मान रही थीं कि वह शुभम और गौरव के साथ वहीं मौजूद है। हालांकि, उसके बारे में जुटाई गई जानकारी की पड़ताल में सामने आया कि वह काफी पहले भारत लौट चुका था। अब उसकी तलाश के साथ यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह किन ठिकानों पर रह रहा है और नेटवर्क के दूसरे सदस्यों से उसका संपर्क बना हुआ है या नहीं। यह जानकारी जांच एजेंसियों के आकलन और तलाश से जुड़ी है। वरुण की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
शुभम जायसवाल के साथ कारोबार में अहम भूमिका का आरोप
जांच में वरुण सिंह को शुभम जायसवाल का करीबी सहयोगी बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वह धनबाद और रांची में सिंडिकेट का कारोबार संभालता था। गिरफ्तार आरोपी आलोक सिंह ने पूछताछ में शुभम के सहयोगियों वरुण सिंह, गौरव जायसवाल और विशाल मेहरोत्रा से संपर्क होने की जानकारी दी थी। जांच के मुताबिक, जनवरी 2024 में धनबाद में आलोक सिंह के नाम से श्रेयसी मेडिकल एजेंसी की फर्म खोली गई थी। आरोप है कि इस तरह की फर्मों के जरिए कफ सिरप की खरीद-बिक्री को वैध कारोबारी गतिविधि के रूप में दिखाया जाता था। एजेंसियां संबंधित फर्मों, बिलों, ई-वे बिल और बैंक लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही हैं।
फर्जी दस्तावेजों से लाइसेंस लेने का भी आरोप
कफ सिरप मामले की जांच में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस हासिल करने और दवा कंपनियों की कथित भूमिका की भी पड़ताल हुई है। अमर उजाला की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, एसटीएफ की विवेचना और चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि शुभम जायसवाल ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिरप की आपूर्ति का लाइसेंस हासिल किया था। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि लाइसेंस के दायरे से बाहर दूसरे राज्यों में भी सिरप की सप्लाई की गई। इन आरोपों की कानूनी स्थिति का निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में किन फर्मों, वितरकों और अन्य लोगों की भूमिका रही।
मुख्य आरोपी शुभम और गौरव को भारत लाने की प्रक्रिया
एसटीएफ ने हाल में शुभम जायसवाल, गौरव जायसवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई है। 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, शुभम और गौरव को भारत लाने के लिए गृह एवं विदेश मंत्रालय के स्तर पर पत्राचार किया गया है। उनकी वापसी की प्रक्रिया जारी बताई गई थी। इस बीच, 12 अक्टूबर की एक अन्य रिपोर्ट में एसटीएफ की जांच के दायरे में 100 और दवा फर्मों के आने की जानकारी दी गई। इनमें कुछ फर्मों के डमी होने और कथित तौर पर सिंडिकेट के इशारे पर बनाए जाने की आशंका जताई गई है। इससे जांच का दायरा केवल मुख्य आरोपियों तक सीमित न रहकर सप्लाई चेन और वित्तीय लेनदेन तक फैलता दिखाई दे रहा है।
गिरफ्तारी से खुल सकती हैं सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि वरुण सिंह की गिरफ्तारी से धनबाद और रांची में संचालित कारोबार, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और सिरप की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल उसका ठिकाना सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं है। कफ सिरप मामले में आगे की जांच का अहम पहलू यही है कि कथित अवैध सप्लाई के नेटवर्क में शामिल लोगों, फर्जी फर्मों और पैसों के लेनदेन की पूरी कड़ी कैसे सामने आती है। वरुण के भारत में होने का नया सुराग इस तलाश में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही जांच की अगली तस्वीर स्पष्ट होगी।


