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फेसलेस आरसी में फंसे 80 हजार वाहन मालिक, चालान का डर!

  • ऑनलाइन प्रिंट मिली, लेकिन मूल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का पता नहीं, आरटीओ से परिवहन मुख्यालय तक लगा रहे चक्कर, दूसरे राज्यों में वाहन ले जाने पर भी चिंता

भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की फेसलेस आरसी व्यवस्था वाहन मालिकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी करीब 80 हजार वाहन मालिकों को मूल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) नहीं मिल पा रहा है। ऑनलाइन प्रिंट पर ही स्पष्ट लिखा है कि यह मूल प्रमाणपत्र नहीं है। ऐसे में वाहन मालिकों को समझ नहीं आ रहा कि मूल आरसी कहां से मिलेगी। दूसरे राज्यों में वाहन ले जाने पर जांच के दौरान परेशानी की आशंका भी सता रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 80 हजार वाहन स्वामी इस समस्या से जूझ रहे हैं।

ऑनलाइन आरसी मिली, लेकिन मूल प्रमाणपत्र कहां से आएगा?

फेसलेस व्यवस्था का उद्देश्य परिवहन संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराकर लोगों को आरटीओ के चक्कर लगाने से राहत देना है, लेकिन आरसी के मामले में प्रक्रिया अधूरी नजर आ रही है। लखीमपुर खीरी के दीपक वर्मा ने सेकेंड हैंड कार खरीदी और फेसलेस प्रक्रिया के तहत वाहन का स्वामित्व हस्तांतरण करा लिया। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन आरसी प्रिंट की, लेकिन उस पर लिखा था कि मूल प्रमाणपत्र जारी करने वाले कार्यालय से प्राप्त करना होगा।

मूल आरसी के लिए वह पहले जिले के एआरटीओ कार्यालय पहुंचे। वहां समाधान नहीं मिला तो लखनऊ आरटीओ गए। इसके बाद उन्हें परिवहन मुख्यालय भेजा गया, लेकिन वहां भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। यह मामला उस व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, जिसमें ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आवेदक को यह स्पष्ट नहीं बताया जा रहा कि मूल दस्तावेज कहां और कैसे मिलेगा।

दूसरे राज्यों में वाहन ले जाने से भी कतरा रहे लोग

ऑनलाइन प्रिंट पर मूल प्रमाणपत्र नहीं होने का उल्लेख वाहन मालिकों की चिंता बढ़ा रहा है। उन्हें आशंका है कि दूसरे राज्यों में वाहन की जांच के दौरान दस्तावेज को लेकर सवाल उठ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ वाहन मालिक इसी आशंका के चलते अपनी गाड़ियां बाहर ले जाने से बच रहे हैं। हालांकि, केवल इस प्रिंट के आधार पर चालान होने की पुष्टि नहीं है, लेकिन मूल आरसी हासिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट न होने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है।

परिवहन विभाग के अधिकारियों के पास स्पष्ट जवाब नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, आरटीओ अधिकारियों का कहना है कि फेसलेस आवेदन के बाद मूल आरसी जारी करने की प्रक्रिया पर मुख्यालय से स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। वहीं, परिवहन विभाग के आईटी विभाग से भी आवेदकों को समाधान नहीं मिल पा रहा है। करीब दो महीने बाद भी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने से लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

सुविधा देने वाली व्यवस्था में प्रक्रिया का पेच

फेसलेस व्यवस्था तभी कारगर होगी, जब आवेदन से लेकर मूल दस्तावेज मिलने तक की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट और समयबद्ध हो। परिवहन विभाग को यह बताना होगा कि ऑनलाइन आरसी प्रिंट करने के बाद मूल प्रमाणपत्र कहां से मिलेगा, कौन-सा कार्यालय इसके लिए जिम्मेदार है और आवेदक को कितने समय में दस्तावेज उपलब्ध कराया जाएगा। जब तक इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते, डिजिटल सुविधा का लाभ लेने वाले वाहन मालिकों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलना मुश्किल है।

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