- प्रदेश में 2.25 लाख सीटों के लिए 4.60 लाख आवेदन, 23,213 शिक्षक पदों पर भर्ती की उम्मीद से बढ़ा रुझान
- “शिक्षक भर्ती की उम्मीद ने बदली तस्वीर, वर्षों बाद बीएड कॉलेजों में सभी सीटें भरने की संभावना; प्रदेश में हर सीट पर दो से अधिक दावेदार।”
Vickson Sikroriya
कानपुर। कुछ वर्ष पहले तक अस्तित्व के संकट से जूझ रहे बीएड कॉलेजों में एक बार फिर रौनक लौट आई है। उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती की संभावनाओं ने बीएड को दोबारा युवाओं की पहली पसंद बना दिया है। प्रदेश के 2,250 बीएड कॉलेजों की करीब 2.25 लाख सीटों के लिए इस वर्ष 4.60 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। यानी हर सीट पर औसतन दो से अधिक दावेदार हैं।
संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने कराया। इस बार आवेदन संख्या पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। शिक्षा विशेषज्ञ इसे केवल प्रवेश परीक्षा का आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रदेश में सरकारी शिक्षक भर्ती के प्रति बढ़ते भरोसे का संकेत मान रहे हैं।
इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की प्रस्तावित भर्ती है। प्रदेश सरकार ने 23,213 सहायक अध्यापक पदों का अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेज दिया है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद से लाखों युवाओं का भरोसा फिर मजबूत हुआ है। यही कारण है कि बीएड कोर्स में प्रवेश लेने की होड़ बढ़ गई है।
इसका असर कानपुर मंडल में भी साफ दिखाई दे रहा है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध 100 से अधिक बीएड कॉलेजों की लगभग 15 हजार सीटों पर इस बार प्रवेश होगा। कॉलेज संचालकों का कहना है कि पिछले कई वर्षों के बाद अधिकांश संस्थानों में सभी सीटें भरने की संभावना बन गई है।
उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी के अनुसार पिछले वर्ष कई बीएड कॉलेजों में 20 से 30 प्रतिशत सीटें भी नहीं भर सकी थीं, जबकि इस बार सीटों से अधिक आवेदन आने के कारण लगभग सभी कॉलेजों में प्रवेश पूरे होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों की संभावनाओं ने युवाओं का विश्वास लौटाया है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आज के छात्र ऐसे प्रोफेशनल कोर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनसे रोजगार की संभावना अधिक हो। बीएड एक बार फिर रोजगार आधारित पाठ्यक्रम के रूप में अपनी पहचान मजबूत करता दिखाई दे रहा है।
एक नजर में
प्रदेश के बीएड कॉलेज: 2,250
कुल सीटें: 2.25 लाख
इस वर्ष आवेदन: 4.60 लाख
प्रति सीट दावेदार: 2 से अधिक
सीएसजेएमयू से संबद्ध कॉलेज: 100 से अधिक
सीएसजेएमयू क्षेत्र की सीटें: लगभग 15,000
प्रस्तावित शिक्षक भर्ती: 23,213 पद
क्यों बढ़ा बीएड का आकर्षण
- माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती की तैयारी
- लंबे समय बाद बड़े पैमाने पर नियुक्तियों की उम्मीद
- रोजगारपरक कोर्स के रूप में बढ़ा विश्वास
- सरकारी नौकरी पाने की बढ़ी संभावना
- पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्लेसमेंट की उम्मीद
“सरकारी शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ने से छात्रों का बीएड के प्रति भरोसा लौटा है। इस बार लगभग सभी कॉलेजों की सीटें भरने की संभावना है।”
— विनय त्रिवेदी, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन
बीएड काउंसलिंग : आगे की तारीखें
दूसरा चरण
2 अगस्त : सीट आवंटन
3–6 अगस्त : फीस जमा व अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड
7 अगस्त : सीट रिलीज व सीट मैट्रिक्स अपडेट
तीसरा चरण (डायरेक्ट एडमिशन)
9–11 अगस्त : रजिस्ट्रेशन व चॉइस फिलिंग
12 अगस्त : सीट आवंटन
13 अगस्त : अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड
14 अगस्त : सीट मर्ज व सीट मैट्रिक्स अपडेट
16–31 अगस्त : कॉलेजों में सीधे प्रवेश
आखिर क्यों लौटा बीएड का आकर्षण
बीते चार-पांच वर्षों में बीएड पाठ्यक्रम की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी। अनेक निजी कॉलेजों में आधी से भी कम सीटें भर रही थीं और कई संस्थानों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया था। इसकी बड़ी वजह शिक्षक भर्तियों का वर्षों तक लंबित रहना और सरकारी नौकरियों में अनिश्चितता थी।
लेकिन पिछले कुछ महीनों में तस्वीर तेजी से बदली है। माध्यमिक विद्यालयों में 23,213 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ने से युवाओं में यह भरोसा पैदा हुआ है कि बीएड की डिग्री फिर रोजगार का मजबूत माध्यम बन सकती है। यही कारण है कि इस वर्ष प्रवेश परीक्षा में रिकॉर्ड संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के बाद शिक्षा व्यवस्था में लगातार बदलाव हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर निजी क्षेत्र में रोजगार की सीमित संभावनाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच बड़ी संख्या में युवा अब ऐसे प्रोफेशनल कोर्स चुन रहे हैं, जिनसे सरकारी नौकरी मिलने की संभावना अधिक हो।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सरकार नियमित अंतराल पर शिक्षक भर्तियां जारी रखती है तो बीएड कॉलेजों में दाखिले का यह बढ़ता रुझान आने वाले वर्षों में भी बना रह सकता है। वहीं यदि भर्ती प्रक्रिया फिर लंबी अवधि तक ठप रही तो इसका सीधा असर दोबारा बीएड कॉलेजों की सीटों पर पड़ सकता है। यानी बीएड का भविष्य अब काफी हद तक शिक्षक भर्ती की नियमितता पर निर्भर करेगा।


