- अगस्त की MPC बैठक के मिनट्स में महंगाई को लेकर बढ़ी चिंता, तेल और खाद्य कीमतों के असर से आगे मौद्रिक सख्ती का संकेत; रेपो रेट फिलहाल 5.25 प्रतिशत पर बरकरार
भारत 19
कानपुर। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भले ही अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा हो, लेकिन बुधवार को जारी बैठक के मिनट्स ने ब्याज दरों के भविष्य को लेकर बाजार की तस्वीर बदल दी है। केंद्रीय बैंक के नीति-निर्माताओं ने संकेत दिया है कि अगर महंगाई का दबाव व्यापक और टिकाऊ होता है तो आगे चलकर मौद्रिक नीति को सख्त करना पड़ सकता है। खास चिंता खाद्य और ईंधन कीमतों के साथ-साथ उत्पादन लागत बढ़ने से महंगाई के दूसरे दौर के असर को लेकर है।
अभी दर बढ़ाने का फैसला नहीं
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5 अगस्त को रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया था। यह लगातार चौथी बैठक थी जिसमें दर में बदलाव नहीं किया गया। समिति ने अपना रुख भी न्यूट्रल रखा था। उस समय RBI ने कहा था कि महंगाई के रास्ते को लेकर और स्पष्टता के लिए आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी है। लेकिन 19 अगस्त को जारी मिनट्स में महंगाई के जोखिम को लेकर सदस्यों का स्वर अपेक्षाकृत सख्त दिखाई दिया। इसका अर्थ यह नहीं है कि अगली बैठक में निश्चित रूप से दर बढ़ेगी, बल्कि यह है कि अगर महंगाई के जोखिम अनुमान से ज्यादा बढ़ते हैं तो दर कटौती की गुंजाइश के बजाय बढ़ोतरी का विकल्प सामने आ सकता है।
तेल की कीमत बनी सबसे बड़ी चिंता
RBI के सामने सबसे बड़ी बाहरी चुनौती कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। महंगा कच्चा तेल भारत के लिए सीधे आयात बिल को बढ़ाता है और इसका असर रुपये, परिवहन लागत तथा उत्पादन लागत के रास्ते अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि RBI केवल मौजूदा खुदरा महंगाई के आंकड़े को नहीं देख रहा, बल्कि यह भी परख रहा है कि ईंधन और इनपुट लागत में बढ़ोतरी आगे चलकर व्यापक महंगाई में बदलती है या नहीं।
महंगाई अभी नियंत्रण दायरे में
दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा महंगाई दर अभी RBI के निर्धारित सहनशीलता दायरे के भीतर है। जुलाई में उपभोक्ता महंगाई 4.45 प्रतिशत रही। RBI का लक्ष्य 4 प्रतिशत है और सहनशीलता दायरा 2 से 6 प्रतिशत है। यानी मौजूदा स्तर तत्काल संकट की स्थिति नहीं बताता, लेकिन केंद्रीय बैंक भविष्य के जोखिमों को लेकर सतर्क है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत CPI महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत रखा है, जबकि आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया गया है। इससे स्पष्ट है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
गवर्नर ने भी दिए सावधानी के संकेत
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेताया है कि खाद्य, ईंधन और इनपुट लागत में बढ़ोतरी यदि व्यापक रूप लेती है तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। उनका जोर इस बात पर है कि नीति में किसी बदलाव से पहले महंगाई के रुझान और उसकी स्थायित्व को लेकर पर्याप्त स्पष्टता जरूरी है। डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने भी संकेत दिया कि फिलहाल दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित है और अगर महंगाई का जोखिम बढ़ता है तो आगे चलकर सख्त नीति की जरूरत पड़ सकती है।
ब्याज दर बढ़ने का कर्जदारों पर असर
अगर भविष्य में RBI को महंगाई रोकने के लिए रेपो रेट बढ़ाना पड़ता है तो इसका सीधा असर बैंकिंग ब्याज दरों पर पड़ सकता है। होम लोन, वाहन ऋण और कारोबार के लिए लिए जाने वाले फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज महंगे हो सकते हैं। दूसरी तरफ, जमा पर ब्याज दरों में भी बदलाव की संभावना बन सकती है। हालांकि अभी ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल इसे “दरें बढ़ने वाली हैं” की बजाय “महंगाई बढ़ी तो RBI दरें बढ़ा सकता है” के संकेत के तौर पर देखना अधिक सटीक होगा।
RBI के सख्त संकेतों से बाजार की प्रतिक्रिया
RBI के अपेक्षाकृत सख्त रुख का असर सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी दिखाई दिया। गुरुवार को भारतीय सरकारी बॉन्ड में बिकवाली देखी गई, क्योंकि बाजार ने मिनट्स को उम्मीद से अधिक ‘हॉकिश’ यानी महंगाई के खिलाफ सख्त संकेत के रूप में लिया। इसका मतलब यह है कि बाजार अब केवल RBI के मौजूदा 5.25 प्रतिशत रेपो रेट को नहीं देख रहा, बल्कि यह आकलन कर रहा है कि तेल और महंगाई के जोखिम कितने समय तक बने रहते हैं।
महंगाई और तेल से तय होगी आगे की दिशा
आने वाले महीनों में दो संकेतक RBI की नीति के लिए सबसे महत्वपूर्ण होंगे, कच्चे तेल की कीमत और घरेलू महंगाई का व्यापक रुझान। यदि तेल महंगा रहता है लेकिन उसका असर सीमित रहता है, तो RBI दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है। लेकिन अगर ईंधन, खाद्य और उत्पादन लागत का दबाव अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों तक फैलता है और महंगाई टिकाऊ रूप से बढ़ती है, तो मौद्रिक सख्ती की संभावना मजबूत हो सकती है। अगस्त की MPC बैठक का संदेश साफ है, RBI ने अभी दर नहीं बढ़ाई है, लेकिन महंगाई बढ़ने की स्थिति में दर बढ़ाने का विकल्प खुला रखा है।
