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सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री का भंडाफोड़

सहारनपुर के तीतरों क्षेत्र में पुलिस ने नकली 20 रुपये के सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, छह मशीनों से रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के तैयार करने की क्षमता थी और नेटवर्क का कारोबार 70 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।

Bharat 19/ saharanpur/ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में नकली नोटों के बाद अब नकली सिक्कों के बड़े नेटवर्क का मामला सामने आया है। तीतरों क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जहां कथित तौर पर 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार किए जा रहे थे।पुलिस ने इस मामले में अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल सहारनपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों और विदेशों तक जुड़े होने की बात कही जा रही है।हालांकि, नेटवर्क के कुल कारोबार और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

छह मशीनों से रोज बनते थे हजारों सिक्के

पुलिस के अनुसार, तीतरों में जिस फैक्ट्री का पता चला, वहां नकली सिक्कों के उत्पादन के लिए बाकायदा मशीनरी और अन्य सामान लगाया गया था। फैक्ट्री में छह मशीनों की मदद से रोजाना करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता होने की बात सामने आई है।छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 6,400 तैयार सिक्के बरामद किए। इसके अलावा करीब पांच लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के और 59 डाई भी बरामद होने की जानकारी दी गई है। बरामद सामान से पुलिस को आशंका है कि यहां बड़े पैमाने पर नकली सिक्कों का उत्पादन किया जा रहा था।

पांच-छह रुपये की लागत, 12 से 15 रुपये में बिक्री

पूछताछ में नकली सिक्कों के कथित कारोबार का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह करीब पांच से छह रुपये की लागत में 20 रुपये का नकली सिक्का तैयार करता था। इसके बाद इन सिक्कों को एजेंटों को करीब 12 से 15 रुपये में बेच दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, एजेंट आगे इन नकली सिक्कों को बाजार में असली मुद्रा के तौर पर चलाते थे। यानी उत्पादन की लागत और बिक्री कीमत के बीच अच्छा खासा मुनाफा कमाया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिक्कों को किन इलाकों और बाजारों में खपाया गया।

70 करोड़ रुपये से अधिक के नेटवर्क की जांच

पुलिस की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े लेनदेन और गतिविधियों का दायरा बड़ा होने की बात सामने आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्कों के कथित कारोबार की जांच की जा रही है। यह आंकड़ा जांच के दौरान सामने आए नेटवर्क और लेनदेन से संबंधित बताया जा रहा है। इसे नकली सिक्कों की बरामद रकम समझना सही नहीं होगा। पुलिस अब दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का वास्तविक आकार पता करने की कोशिश कर रही है।

2017 की जांच से भी जुड़ रहा मुख्य आरोपी

पुलिस के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह का नाम वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में भी सामने आया था। पुलिस का कहना है कि उस समय उसके संपर्क नेपाल और थाईलैंड तक पाए गए थे। जांच के मुताबिक, नेपाल में छिपने के दौरान भी नकली सिक्के बनाने के ठिकाने को लेकर गतिविधियां सामने आई थीं। पुलिस के अनुसार, उपकार वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के इस कथित कारोबार से जुड़ा हुआ है। इन पुराने मामलों और मौजूदा नेटवर्क के बीच संबंधों की भी जांच की जा रही है।

आठ लोग संभाल रहे थे अलग-अलग जिम्मेदारियां

पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क में करीब आठ लोग अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। कुछ लोग मशीनों और उत्पादन की व्यवस्था देखते थे, जबकि कुछ की जिम्मेदारी तैयार सिक्कों को एजेंटों तक पहुंचाने की थी। इसके बाद बाजार में इन सिक्कों को चलाने का काम अलग लोगों के जरिए किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस को मौके से आठ मोबाइल फोन और सात रजिस्टर भी मिले हैं। इन रजिस्टरों और मोबाइल फोन की जांच से लेनदेन, संपर्कों और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

नेपाल और थाईलैंड तक कनेक्शन की जांच

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के पुराने संपर्क नेपाल और थाईलैंड तक बताए जा रहे हैं। साथ ही भारत के कई राज्यों में भी इसके संपर्क होने की जानकारी जांच में सामने आई है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली सिक्कों के निर्माण के लिए मशीनें, डाई और अन्य सामान कहां से लाया गया था और तैयार सिक्कों की सप्लाई किन माध्यमों से होती थी।

सहारनपुर के तीतरों में नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा पुलिस के लिए एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। छह मशीनों, हजारों तैयार सिक्कों, अधबने सिक्कों और डाई की बरामदगी से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन की तस्वीर सामने आती है।

फिलहाल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, लेनदेन और बाजार में नकली सिक्कों की सप्लाई की कड़ियों की जांच कर रही है। 70 करोड़ रुपये से अधिक के कथित नेटवर्क का वास्तविक दायरा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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