- महंत राजकुमार दास की पहल पर दिल्ली में आमने-सामने मिले दोनों; पतंजलि के घी और उत्पादों को लेकर 2022 से चल रही थी बयानबाजी, रामदेव ने कहा- बातचीत से दूर हुईं भ्रांतियां
भारत 19
नई दिल्ली। बाबा रामदेव और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच करीब चार साल से चल रहा विवाद अब खत्म होने की बात सामने आई है। बुधवार को दिल्ली में दोनों की आमने-सामने मुलाकात हुई। अयोध्या के श्रीरामवल्लभाकुंज के महंत राजकुमार दास ने दोनों के बीच संवाद कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने मतभेदों और लंबे समय से बनी गलतफहमियों पर चर्चा की। मुलाकात के बाद बाबा रामदेव ने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह के मन में कुछ भ्रांतियां थीं, जो बातचीत के बाद दूर हो गईं और मामले का पटाक्षेप हो गया। रामदेव ने साथ ही पतंजलि के गाय के घी और दवाओं को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया।
महंत राजकुमार दास ने तैयार कराया संवाद
दोनों के बीच सुलह की पहल अयोध्या से शुरू हुई। श्रीरामवल्लभाकुंज के महंत राजकुमार दास ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता तैयार किया। उनके मुताबिक, उद्देश्य किसी एक पक्ष को सही या गलत साबित करना नहीं था, बल्कि दोनों को आमने-सामने बैठाकर अपनी बात रखने और एक-दूसरे को सुनने का अवसर देना था। बातचीत में महंत राजकुमार दास के साथ पूज्य आलोक दास महाराज और चित्रकूट धाम की मध्यस्थता का भी उल्लेख सामने आया है। बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक माहौल बनने और विवाद को आगे नहीं बढ़ाने की दिशा में सहमति की बात कही गई।
2022 में पतंजलि के उत्पादों से शुरू हुआ था विवाद
रामदेव और बृजभूषण के बीच मतभेदों की पृष्ठभूमि वर्ष 2022 तक जाती है। उस दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने पतंजलि के घी और दूसरे उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से समय-समय पर बयान सामने आते रहे और मामला सार्वजनिक बहस का विषय बना रहा। हाल के दिनों में भी दोनों के बीच बयानबाजी तेज हुई थी। सितंबर में बृजभूषण की ओर से पतंजलि के उत्पादों को लेकर फिर टिप्पणियां की गईं। इसके जवाब में पतंजलि फूड्स की ओर से उनके खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर किया गया। इस मामले की कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी है।
मुलाकात से कुछ दिन पहले भी तीखे थे तेवर
दिल्ली में मुलाकात से कुछ दिन पहले तक बृजभूषण शरण सिंह और रामदेव के बीच सार्वजनिक बयानबाजी जारी थी। 19 सितंबर को बृजभूषण ने मानहानि मामले का सामना करने की बात कही थी। वहीं 20 सितंबर को उन्होंने 50 करोड़ रुपये के दावे को लेकर भी सार्वजनिक टिप्पणी की थी। इसके बाद दोनों का आमने-सामने बैठना इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर सामने आया है। हालांकि मानहानि का मुकदमा अपने कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30 जुलाई 2026 के आदेश से भी इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया की पुष्टि होती है।
रामदेव बोले- विवाद बढ़ाने के पक्ष में नहीं
मुलाकात के बाद रामदेव ने कहा कि वह विवाद को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उनके मुताबिक बातचीत के दौरान बृजभूषण ने संतों और सनातन के प्रति सम्मान तथा देश के लिए किए जा रहे उनके काम के प्रति सम्मान की बात कही। रामदेव ने भी विवाद समाप्त होने की बात कही। रामदेव ने पतंजलि के उत्पादों पर उठे सवालों पर अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि कंपनी का गाय का घी नकली नहीं है और उसकी दवाएं भी नकली नहीं हैं। ये रामदेव की ओर से किए गए दावे हैं; उत्पादों की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग नियामकीय या न्यायिक मामलों को इस बयान से स्वतः समाप्त मानना उचित नहीं होगा।
अयोध्या से शुरू हुई पहल दिल्ली की मुलाकात तक पहुंची
महंत राजकुमार दास का रामदेव के साथ पहले से धार्मिक और सामाजिक संपर्क रहा है। जनवरी 2026 में रामदेव के अयोध्या दौरे के दौरान श्रीरामवल्लभाकुंज में उनका अभिनंदन भी किया गया था। इसी संपर्क के जरिए दोनों पक्षों के बीच संवाद की पहल आगे बढ़ने की बात सामने आई है। अब दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद चार साल पुराने सार्वजनिक विवाद को खत्म करने की घोषणा हुई है। हालांकि पतंजलि फूड्स का मानहानि मुकदमा अदालत में लंबित है, इसलिए व्यक्तिगत विवाद खत्म होने की घोषणा और कानूनी मामले की स्थिति, दोनों को अलग-अलग देखना होगा।


