- ऑपरेशन सिंदूर में वेस्टर्न एयर कमांड संभाल चुके रिटायर्ड एयर मार्शल बने पहले CEO, 5,585 आवेदनों में से हुआ चयन, गोविंद देव गिरी को महासचिव की जिम्मेदारी
भारत 19
लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब उसके संचालन और प्रशासन को नई व्यवस्था देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ट्रस्ट की बुधवार को अयोध्या में हुई बैठक में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगा दी गई। वह मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO होंगे।
करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में अहम पदों पर रह चुके जितेंद्र मिश्रा को ऐसे समय यह जिम्मेदारी दी गई है, जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ प्रशासन, संचालन, सुरक्षा, सुविधाओं और वित्तीय प्रबंधन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ट्रस्ट में पहली बार CEO का पद बनाया जाना इसी बदलती जरूरत के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
5,585 आवेदनों में से चुने गए जितेंद्र मिश्रा
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति के लिए व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई गई। इस पद के लिए 5,585 आवेदन मिले थे। स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों को आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया और तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने अंतिम चरण में तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा। बुधवार की बैठक में इसी पैनल में से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी। यह अपने आप में महत्वपूर्ण है कि ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासन के लिए पहली बार एक पूर्णकालिक पेशेवर CEO की व्यवस्था की है। इससे मंदिर के रोजमर्रा के संचालन और बड़े प्रशासनिक कामों के लिए जिम्मेदारी का एक स्पष्ट केंद्र तैयार होगा।
ऑपरेशन सिंदूर में संभाली थी पश्चिमी कमान
जितेंद्र मिश्रा का चयन उनकी लंबी सैन्य सेवा और नेतृत्व के अनुभव को देखते हुए खास महत्व रखता है। वह भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट, कॉम्बैट लीडर और टेस्ट पायलट के रूप में काम कर चुके हैं। वह वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रहे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। करीब 38 साल की सैन्य सेवा के बाद वह अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त हुए थे।
मंदिर संचालन में बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच फैसला
राम मंदिर अब केवल निर्माण परियोजना नहीं रह गया है। मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, सुविधाएं, कर्मचारी प्रबंधन, परिसर का संचालन, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और वित्तीय निगरानी जैसी जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में CEO का पद बनाकर ट्रस्ट ने प्रशासनिक जिम्मेदारी के लिए एक अलग पेशेवर व्यवस्था तैयार की है। जितेंद्र मिश्रा के सैन्य प्रशासन और बड़े स्तर पर संचालन के अनुभव को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दान विवाद के बाद प्रशासनिक ढांचे में बदलाव
पहले CEO की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब ट्रस्ट दान की कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े विवाद के बाद अपने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत कर रहा है। इस विवाद के बाद कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और जून में ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने पद से इस्तीफा दिया था। CEO चयन की प्रक्रिया भी इसी पृष्ठभूमि में शुरू हुई थी। ऐसे में नए CEO की नियुक्ति को केवल एक नई प्रशासनिक नियुक्ति के तौर पर नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के संचालन को अधिक पेशेवर और जवाबदेह बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
राम मंदिर के प्रशासन में अब नई कमान
जितेंद्र मिश्रा के CEO बनने के साथ ट्रस्ट के प्रशासन में अब धार्मिक नेतृत्व और पेशेवर संचालन की जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन दिखाई देता है। ट्रस्ट का धार्मिक और नीतिगत नेतृत्व अपनी जगह रहेगा, जबकि पहली बार CEO के जरिए मंदिर के दैनिक प्रशासन और संचालन को पूर्णकालिक पेशेवर नेतृत्व मिलेगा।
गोविंद देव गिरी अब ट्रस्ट के महासचिव
बैठक में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक और अहम बदलाव हुआ। अब तक कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज को महासचिव बनाया गया है। चंपत राय के इस्तीफे के बाद महासचिव का पद खाली था और अंतरिम व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी संभाली जा रही थी। इसके अलावा ट्रस्ट ने मदन मोहन पांडेय, महेश भागचंदका और निर्मला यादव को नए सदस्य के रूप में शामिल किया है।


