- FIA की 2026 रेड बुक में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित कर गिरफ्तारी की सूचना पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम; अक्टूबर की FATF प्लेनरी से पहले उठे कदम को अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच कार्रवाई दिखाने की कोशिश माना जा रहा
भारत 19
पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) प्रमुख मसूद अजहर को अपनी 2026 की मोस्ट वांटेड आतंकियों की रेड बुक में शामिल किया है। फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने उसे भगोड़ा बताते हुए उसकी गिरफ्तारी या दोषसिद्धि तक पहुंचाने वाली सूचना पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया है। पिछले रिकॉर्ड में यह राशि 50 लाख पाकिस्तानी रुपये थी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अक्टूबर में FATF की प्लेनरी बैठक होने वाली है। FATF की आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक बैठक 26 से 30 अक्टूबर 2026 तक पेरिस में होगी।
रेड बुक में मसूद अजहर, इनाम बढ़कर 70 लाख
FIA की 2026 रेड बुक में मसूद अजहर को मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल किया गया है। एजेंसी के रिकॉर्ड में उसे जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख बताया गया है और गिरफ्तारी से जुड़ी सूचना पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम का प्रावधान किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक पिछले रिकॉर्ड में मसूद अजहर पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम था। नई सूची में इसे 20 लाख रुपये बढ़ाकर 70 लाख किया गया है।
अक्टूबर की FATF प्लेनरी से पहले बड़ा कदम
मसूद अजहर को रेड बुक में शामिल करने और इनाम बढ़ाने का समय खासा महत्वपूर्ण है। FATF की अक्टूबर प्लेनरी में सदस्य देशों के वित्तीय अपराध, आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने से जुड़े उपायों की समीक्षा होती है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इस कदम को पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई प्रदर्शित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में इसे FATF के संभावित दबाव से पहले उठाया गया प्रतीकात्मक कदम भी बताया गया है।
पाकिस्तान 2022 में ग्रे लिस्ट से बाहर हुआ था
यहां एक अहम तथ्य पाकिस्तान की मौजूदा FATF स्थिति से जुड़ा है। पाकिस्तान को FATF ने 21 अक्टूबर 2022 को बढ़ी हुई निगरानी यानी ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था। जून 2026 की मौजूदा FATF ग्रे लिस्ट में भी पाकिस्तान शामिल नहीं है। इसलिए मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाने को सीधे तौर पर पाकिस्तान के मौजूदा ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने की कार्रवाई कहना सही नहीं होगा। इसे आगामी FATF समीक्षा से पहले अपनी आतंकवाद-रोधी कार्रवाई प्रदर्शित करने के कदम के रूप में देखना ज्यादा सटीक है।
अफगानिस्तान वाले दावे पर भी सवाल
पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर देश में नहीं है और अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। दूसरी ओर, भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से हालिया रिपोर्टों में उसके पाकिस्तान में मौजूद होने का दावा किया गया है। ऐसे में पाकिस्तान की नई रेड बुक में उसका नाम और गिरफ्तारी पर बढ़ा हुआ इनाम उसके पुराने दावों पर भी नए सवाल खड़े करता है।
मसूद अजहर का नाम भारत के बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा
मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक प्रमुख है और भारत में कई बड़े आतंकी मामलों से उसका नाम जुड़ा रहा है। इनमें 2019 का पुलवामा हमला भी शामिल है। जैश-ए-मोहम्मद को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया है। FIA की नई रेड बुक में 2008 के मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार इनमें हमले के लिए वित्तीय मदद, लॉजिस्टिक सहयोग या नावों की व्यवस्था से जुड़े लोगों के नाम शामिल हैं।
कार्रवाई की असली कसौटी गिरफ्तारी और जांच
मसूद अजहर को रेड बुक में शामिल करना और इनाम बढ़ाना पाकिस्तान की ओर से उठाया गया औपचारिक कदम है। अब इसकी वास्तविक प्रभावशीलता गिरफ्तारी, जांच और आतंकवादी नेटवर्क तथा उसकी वित्तीय व्यवस्था पर होने वाली कार्रवाई से तय होगी। FATF का ढांचा भी केवल नाम घोषित करने तक सीमित नहीं है। आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था तथा उसके क्रियान्वयन को भी महत्व दिया जाता है।


