- नए बेनिफिशियरी के बाद भुगतान की समय सीमा एक समान करने की तैयारी; चिराग पासवान की पहल पर वित्त मंत्रालय ने शुरू की कार्रवाई
भारत 19
नई दिल्ली। चार, छह या 10 लाख रुपये का भुगतान करना हो और नया बेनिफिशियरी जोड़ने के बाद बैंक भुगतान की अनुमति ही न दे तो पूरा कारोबार अटक जाता है। NEFT और RTGS से बड़े भुगतान में आ रही इसी परेशानी को दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पहल के बाद वित्त मंत्रालय ने मामले में कार्रवाई शुरू की है। मंत्रालय के अधिकारियों ने ऑल इंडिया जेम्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) से संपर्क कर समस्या पर बातचीत की है। RBI और NPCI की ओर से भी इस मामले में जवाब मिल चुका है। अब वित्त मंत्रालय की ओर से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के कार्यालय को आधिकारिक जवाब भेजे जाने की उम्मीद है।
AIJGF के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने बताया कि वित्त मंत्रालय के अधिकारी फेडरेशन के संपर्क में हैं और इस मुद्दे पर मौखिक बातचीत हो चुकी है। व्यापारियों की मुख्य मांग है कि नया बेनिफिशियरी जोड़ने के बाद NEFT और RTGS भुगतान शुरू होने की समय सीमा सभी बैंकों में सरल और एक समान हो। फिलहाल अलग-अलग बैंकों के अलग नियम होने से तत्काल होने वाले बड़े व्यापारिक भुगतान में परेशानी आती है।
कहीं आठ तो कहीं 24 घंटे तक अटकता है भुगतान
अरोड़ा के अनुसार, कई बार अंतिम उपभोक्ता को चार लाख, छह लाख या 10 लाख रुपये का भुगतान तत्काल करना होता है। व्यापारी सामान देने के लिए तैयार रहता है, लेकिन नया बेनिफिशियरी जोड़ने के बाद बैंक तत्काल भुगतान की अनुमति नहीं देता। ग्राहक के पास दूसरा भुगतान विकल्प नहीं होने पर लेन-देन वहीं अटक जाता है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग बैंकों में नया बेनिफिशियरी जोड़ने के बाद भुगतान की अनुमति देने की अवधि भी अलग है। कुछ बैंक आठ घंटे, कुछ 12 घंटे और कुछ 24 घंटे तक भुगतान की अनुमति नहीं देते। इसका असर उन ग्राहकों पर पड़ता है, जिन्हें सामान खरीदते समय तत्काल बड़ी राशि चुकानी होती है। भुगतान नहीं मिलने से व्यापारी भी बिक्री पूरी नहीं कर पाता।
व्यापारियों ने सरकार से मांगी थी एक समान व्यवस्था
फेडरेशन ने इसी व्यावहारिक समस्या को सरकार के सामने उठाया था। व्यापारियों का कहना था कि NEFT और RTGS बड़े भुगतान के लिए सुविधाजनक माध्यम हैं, लेकिन नया बेनिफिशियरी सक्रिय होने में लगने वाला अलग-अलग समय व्यापारिक लेन-देन में बाधा बन रहा है। व्यापारियों की मांग थी कि सभी बैंकों में इस प्रक्रिया के लिए सरल और एक समान व्यवस्था हो, ताकि वैध व्यापारिक भुगतान सिर्फ बैंकिंग प्रक्रिया में लगने वाले अतिरिक्त समय के कारण न रुके।
चिराग पासवान ने वित्त मंत्री को लिखा था पत्र
पंकज अरोड़ा ने बताया कि कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने व्यापारियों की इस समस्या को लेकर वित्त मंत्री को पत्र लिखा था। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने मामले को आगे बढ़ाया और फेडरेशन से संपर्क कर समस्या की जानकारी ली> RBI और NPCI की ओर से जवाब मिलने के बाद अब मंत्रालय की ओर से आधिकारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। फेडरेशन को उम्मीद है कि जल्द ही समाधान के संबंध में औपचारिक जानकारी मिल सकती है।
एक नियम हुआ तो व्यापारियों और ग्राहकों को राहत
अरोड़ा के मुताबिक, वित्त मंत्रालय, RBI और NPCI के स्तर पर जिस तरह मामला आगे बढ़ा है, उससे व्यापारियों और ग्राहकों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। नए बेनिफिशियरी को सक्रिय करने के बाद भुगतान की समय सीमा में एकरूपता आने से बड़े मूल्य के वैध व्यापारिक लेन-देन में होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी। इससे उन कारोबारियों और ग्राहकों को खास राहत मिलेगी, जहां सामान की डिलीवरी और भुगतान एक ही समय में पूरा करना जरूरी होता है।


