NEW DELHI/ देश के कई हिस्सों में गर्मी ने पहले ही लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। उत्तर भारत, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच नौतपा 2026 को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय परंपरा और ज्योतिष में नौतपा को वर्ष के सबसे गर्म दिनों का दौर माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों की तपन का सीधा संबंध मानसून और कृषि उत्पादन से होता है। इस वर्ष नौतपा 25 मई 2026 से शुरू होकर 2 जून 2026 तक रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस दौरान कई क्षेत्रों में तापमान 42 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
क्या होता है नौतपा?
नौतपा वह अवधि होती है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश के बाद अगले नौ दिन विशेष महत्व रखते हैं। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक प्रभावी रूप से पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है। इसी कारण इन नौ दिनों को साल के सबसे गर्म दिनों में गिना जाता है।
नौतपा की तिथि- प्रारंभ: 25 मई 2026, समापन: 2 जून 2026 इन नौ दिनों के दौरान देश के कई हिस्सों में लू और भीषण गर्मी का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मई के अंतिम सप्ताह और जून के शुरुआती दिनों में उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बन सकती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों की तरह इस बार भी पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ इलाकों में आंधी और बारिश से राहत मिल सकती है।
नौतपा और मानसून का क्या संबंध माना जाता है?
भारतीय ग्रामीण समाज में नौतपा का मानसून से गहरा संबंध माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से यह कहावत प्रचलित है “नौतपा में जितनी तपन, उतनी बरखा सुखद।” किसानों का मानना है कि यदि नौतपा के दौरान अच्छी गर्मी पड़ती है तो मानसून भी बेहतर रहता है। माना जाता है कि तेज गर्मी के कारण भूमि अधिक गर्म होती है और समुद्र से उठने वाली नमी मानसूनी हवाओं को आकर्षित करती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण नौतपा को अलग नजरिए से देखता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार गर्मी के दौरान भूमि और समुद्र के तापमान में अंतर बढ़ता है, जो मानसूनी हवाओं की दिशा और गति को प्रभावित करता है। हालांकि वैज्ञानिक यह नहीं मानते कि केवल नौतपा की गर्मी के आधार पर पूरे मानसून का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पुराने पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं। इसलिए केवल पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर मानसून का पूर्वानुमान लगाना उचित नहीं माना जाता।
खेती के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नौतपा?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तेज गर्मी के कारण खेतों में मौजूद कई प्रकार के कीट, बैक्टीरिया और फफूंद नष्ट हो जाते हैं। इससे खरीफ फसलों को होने वाले नुकसान की संभावना कम हो जाती है।
नौतपा के दौरान पड़ने वाली गर्मी मिट्टी को मानसून के लिए तैयार करने में मदद करती है। इससे खेतों में नमी संतुलन बेहतर होता है और बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं।
ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार यदि नौतपा के दौरान पर्याप्त गर्मी नहीं पड़ती तो खेती पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। चूहों और कीटों की संख्या बढ़ सकती है। टिड्डियों के अंडे पूरी तरह नष्ट नहीं हो पाते। फसलों में रोग बढ़ने की संभावना रहती है। अनियमित बारिश से कृषि प्रभावित हो सकती है। हालांकि इन मान्यताओं के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञ कुछ सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं।
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- ओआरएस, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें।
- हल्के और सूती कपड़े पहनें।
- बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- लू के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
नौतपा 2026 की शुरुआत 25 मई से होने जा रही है। भारतीय परंपरा में इसे गर्मी, मानसून और कृषि से जोड़कर देखा जाता है। जहां ग्रामीण समाज इसे अच्छी बारिश का संकेत मानता है, वहीं वैज्ञानिक इसे मौसम की एक प्राकृतिक प्रक्रिया बताते हैं। आने वाले नौ दिन देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी लेकर आ सकते हैं, इसलिए लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की जरूरत है। किसानों और मौसम विशेषज्ञों की नजर भी इस बार के नौतपा और उसके प्रभाव पर बनी हुई है।



