- IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम के सुझाव के बाद संवेदनशील स्थानों पर शुरू हुआ सुधार, जुलाई में सड़क खिसकने वाले हिस्से की भी मरम्मत
भारत 19
कानपुर। नये बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर जलभराव रोकने के लिए अब ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव शुरू कर दिया गया है। बारिश के दौरान सड़क और पक्के शोल्डर पर पानी जमा होने की समस्या सामने आने के बाद संवेदनशील स्थानों पर मौजूदा सॉसर ड्रेन में कट और अतिरिक्त निकासी मार्ग बनाए जा रहे हैं। यह काम आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम के निरीक्षण और सुझाए गए सुधारात्मक उपायों के बाद शुरू हुआ है।
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुधार ऐसे समय शुरू हुआ है, जब एक्सप्रेसवे को खुले अभी कुछ ही सप्ताह हुए हैं और इसके एक हिस्से में सड़क की सतह खिसकने के बाद निर्माण गुणवत्ता, मिट्टी और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठ चुके हैं। एनएचएआई के अनुसार 26 जुलाई को किमी 64 के पास करीब 300 मीटर हिस्से में स्लिपेज पाया गया था, जिसके बाद तकनीकी आकलन और जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई शुरू की गई।
दो दर्जन मशीनें उतरीं, पानी निकालने पर फोकस
रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक सप्ताह से भारी मशीनों और करीब दो दर्जन अर्थमूवर को उन स्थानों पर लगाया गया है, जहां बारिश के बाद पानी जमा होने की आशंका अधिक है। मौजूदा ड्रेनेज नाली में ऐसे रास्ते बनाए जा रहे हैं, जिनसे अतिरिक्त पानी पक्के शोल्डर या कैरिजवे पर रुकने के बजाय बाहर की ओर बने ढलान और निकासी क्षेत्र तक पहुंच सके। ड्रेनेज नाली एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड हिस्से के दोनों ओर बनाई गई व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सड़क की सतह से अतिरिक्त पानी को स्टॉर्मवाटर सिस्टम की ओर पहुंचाना है। लेकिन कमजोर स्थानों पर पानी रुकने की समस्या के बाद अब उसी व्यवस्था में अतिरिक्त निकासी के लिए बदलाव किया जा रहा है।
जहां सड़क खिसकी, वहां भी मरम्मत पूरी
उन्नाव-लखनऊ सेक्शन में किमी 64 के पास करीब 300 मीटर के उस हिस्से की मरम्मत और बहाली भी की गई है, जहां जुलाई में सड़क की सतह खिसकने की घटना हुई थी। एनएचएआई ने उस समय इसे गंभीरता से लेते हुए एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली और रखरखाव की जिम्मेदार कंपनी, स्वतंत्र इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की जानकारी दी थी। हालांकि नई रिपोर्ट में बताया गया है कि एक्सप्रेसवे पर यातायात फिलहाल सामान्य बना हुआ है और वाहन 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रहे हैं। फिर भी करीब आठ से दस स्थानों पर पहले हुई सतह की बैठने की समस्या के कारण हल्के उभार महसूस होने की बात सामने आई है।
जांच में पहले ही सामने आई थीं ड्रेनेज की कमियां
एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच में ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर सवाल पहले ही सामने आ चुके थे। अगस्त के पहले सप्ताह में आईआईटी खड़गपुर, एनएचएआई और अन्य तकनीकी एजेंसियों की जांच के दौरान ड्रेनेज और अर्थवर्क से जुड़ी कमियों की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद सड़क के प्रभावित हिस्से के कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच कराई गई। ताजा सुधार कार्य से यह साफ है कि समस्या को केवल सतह की मरम्मत तक सीमित नहीं रखा गया है। अब पानी को सड़क संरचना के आसपास जमा होने से रोकने के लिए निकासी व्यवस्था में हस्तक्षेप किया जा रहा है। एनएचएआई के एक अधिकारी के अनुसार विशेषज्ञ टीम ने समस्या वाले स्थानों की पहचान कर तत्काल सुधारात्मक उपाय सुझाए हैं, जिन्हें रियायतग्राही कंपनी लागू कर रही है।
नई परियोजना की गुणवत्ता जांच पर फिर सवाल
करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना में उद्घाटन के कुछ ही सप्ताह बाद सड़क खिसकने और अन्य तकनीकी दिक्कतें सामने आने से पहले ही गुणवत्ता पर बहस छिड़ चुकी है। 22 अगस्त को भी एक स्थान पर ताजा मिट्टी कटाव की खबर सामने आई थी, जहां सड़क के नीचे की मिट्टी बहने से कैरिजवे को नुकसान का खतरा बताया गया। अब जलभराव रोकने के लिए ड्रेनेज सिस्टम में बदलाव शुरू होने के बाद सवाल यह है कि क्या मानसून से पहले इस व्यवस्था की क्षमता और संवेदनशील स्थानों का पर्याप्त परीक्षण किया गया था। हालांकि एनएचएआई और विशेषज्ञ एजेंसियां इसे जांच के बाद लागू किया जा रहा सुधारात्मक कदम बता रही हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं ने एक्सप्रेसवे की डिजाइन, निर्माण और निगरानी व्यवस्था को जांच के दायरे में ला दिया है।

