- स्कूल-कॉलेजों में ELC 2.0 को मजबूत करेगा आयोग, फेक न्यूज से लेकर EVM और मतदान प्रक्रिया तक नई पीढ़ी को समझाने की तैयारी
भारत 19
लखनऊ। चुनाव आयोग अब केवल 18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए मतदाताओं तक सीमित रहने के बजाय उनसे पहले की पीढ़ी तक अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी में है। जेन जी के नए और संभावित मतदाताओं के साथ अब जेन अल्फा को भी चुनावी प्रक्रिया, EVM, मतदाता पंजीकरण और फेक न्यूज की पहचान से परिचित कराने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को बड़े नेटवर्क के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। लखनऊ में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के दो दिवसीय दौरे में सामने आया यह फोकस आयोग की चुनावी साक्षरता रणनीति के नए विस्तार का संकेत देता है।
चुनाव आयोग ने हाल में Electoral Literacy Clubs 2.0 (ELC 2.0) शुरू किया है। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनावी साक्षरता क्लबों को अधिक संगठित, सालभर सक्रिय और डिजिटल रूप से जुड़ा मंच बनाया जा रहा है। लखनऊ में 24 अगस्त को आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने छात्रों और शिक्षकों से कहा कि युवा नागरिकों को चुनावी व्यवस्था, मतदाता पंजीकरण, मतदान, मतगणना और चुनाव आयोग की भूमिका की जानकारी होना जरूरी है।
स्कूलों से शुरू होगी भविष्य के मतदाताओं तक पहुंच
आयोग की पहुंच केवल उन युवाओं तक नहीं रहेगी जो अगले चुनाव में वोट डालने जा रहे हैं। स्कूल स्तर पर चुनावी साक्षरता का विस्तार उन बच्चों तक भी पहुंचेगा जो अभी मतदान की उम्र से काफी दूर हैं। जेन जी के बड़े हिस्से ने या तो मतदान की उम्र हासिल कर ली है या वह जल्द पहली बार वोटर बनने वाला है। दूसरी ओर जेन अल्फा अभी वोटर नहीं हैं। लेकिन चुनाव आयोग उन्हें भावी मतदाता के रूप में चुनावी प्रक्रिया से परिचित कराने के लिए शैक्षणिक संस्थानों का इस्तेमाल करना चाहता है। यह निष्कर्ष ELC 2.0 की उस संरचना से निकलता है, जिसमें स्कूलों से विश्वविद्यालयों तक चुनावी साक्षरता गतिविधियों का प्रावधान किया गया है।
फेक न्यूज, EVM और वोटिंग पर सीधा संवाद
ज्ञानेश कुमार के लखनऊ दौरे ने इस रणनीति का दूसरा पहलू भी स्पष्ट किया। कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में छात्रों के साथ संवाद के दौरान उन्होंने चुनावी प्रक्रिया, EVM की कार्यप्रणाली, मतदान और गलत सूचनाओं के खतरे पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों को सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को बिना जांचे स्वीकार या साझा न करने की सलाह दी। EVM को लेकर भी उन्होंने कहा कि भारतीय मशीनें इंटरनेट, ब्लूटूथ और वाई-फाई से जुड़ी नहीं हैं।
यानी आयोग की नई चुनावी साक्षरता केवल “वोट जरूर दें” तक सीमित नहीं रहने वाली है। इसमें यह समझाना भी शामिल है कि मतदाता कैसे पंजीकृत होता है, वोट कैसे पड़ता है, मतगणना कैसे होती है और चुनाव से जुड़ी सूचना में सही और गलत की पहचान कैसे की जाए।
15 लाख स्कूलों का विशाल नेटवर्क
ELC 2.0 के पीछे आयोग को देश के विशाल शैक्षणिक ढांचे का सहारा मिलेगा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 15 लाख स्कूल, लगभग 25 करोड़ विद्यार्थी और एक करोड़ से अधिक शिक्षक हैं। उच्च शिक्षा क्षेत्र में करीब 1,500 विश्वविद्यालय और लगभग 70 हजार संस्थान हैं, जिनमें 4.33 करोड़ के आसपास छात्र नामांकित हैं। इसी नेटवर्क के जरिए चुनाव आयोग चुनावी साक्षरता को परिवारों और समुदायों तक भी पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है। ELC 2.0 को ECINET से जोड़ा जाएगा, जहां मतदाता सूची से लेकर मतदान तक चुनाव से जुड़ी विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं।
भरोसा भी नई रणनीति का बड़ा हिस्सा
चुनाव आयोग की इस पहल को केवल मतदाता जागरूकता अभियान के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। पिछले कुछ चुनावों में EVM की विश्वसनीयता, मतदाता सूची और फेक न्यूज को लेकर लगातार राजनीतिक बहस हुई है। ऐसे माहौल में आयोग स्कूल-कॉलेजों के जरिए नई पीढ़ी को चुनावी प्रक्रिया की प्रत्यक्ष जानकारी देने पर जोर दे रहा है। ELC 2.0 के आधिकारिक उद्देश्यों में चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और प्रक्रियाओं की समझ को बढ़ाना भी शामिल है। ज्ञानेश कुमार ने भी युवा नागरिकों के भरोसे और उनकी जानकारीपूर्ण भागीदारी को लोकतंत्र के भविष्य में निवेश बताया है।
यूपी दौरे में दो तरफा चुनावी तैयारी
लखनऊ दौरे में एक ओर CEC ने छात्रों और शिक्षकों के बीच ELC 2.0 और चुनावी साक्षरता पर जोर दिया, वहीं दूसरे दिन बूथ लेवल अधिकारियों से संवाद कर जमीनी चुनावी व्यवस्था और मतदाता सेवाओं पर फीडबैक लिया गया। करीब 500 BLO के साथ बातचीत का कार्यक्रम इसी व्यापक चुनावी ढांचे का हिस्सा था। इस तरह आयोग की रणनीति के दो छोर साफ दिखते हैं—एक तरफ मौजूदा मतदाता सूची और बूथ स्तर का चुनावी तंत्र, दूसरी तरफ भविष्य के मतदाताओं को तैयार करने के लिए स्कूल-कॉलेजों का नेटवर्क।
जेन जी से आगे की तैयारी क्यों अहम
भारत में नई पीढ़ी की राजनीतिक और सामाजिक जानकारी का बड़ा हिस्सा अब मोबाइल स्क्रीन, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पहुंचता है। इसी वजह से गलत सूचना और चुनाव संबंधी भ्रामक सामग्री भी तेजी से फैलती है। ELC 2.0 और ECINET के जरिए आयोग अब उसी डिजिटल दौर में चुनावी जानकारी का अपना संगठित नेटवर्क तैयार करना चाहता है। इसका लक्ष्य सिर्फ पहली बार वोट डालने वाले जेन जी मतदाताओं तक पहुंचना नहीं, बल्कि स्कूल स्तर से ऐसी चुनावी समझ विकसित करना है जो आगे चलकर जेन अल्फा के भावी मतदाताओं तक भी पहुंचे।
