लखनऊ/ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भीषण गर्मी के बीच खांसी और जुकाम के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो कई दिनों से लगातार खांसी, गले की समस्या और सांस संबंधी दिक्कतों से परेशान हैं। आमतौर पर खांसी-जुकाम को सर्दियों की बीमारी माना जाता है, लेकिन इस बार गर्मी के मौसम में भी बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार तेज गर्म हवाएं, धूल, प्रदूषण, तापमान में अचानक बदलाव और संक्रमण इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। लखनऊ के विभिन्न अस्पतालों में रोजाना लगभग 40 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो लगातार खांसी की शिकायत कर रहे हैं। इनमें बच्चों और युवाओं की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों में करीब 50 प्रतिशत युवा और बच्चे शामिल हैं।
हाल के दिनों में कुछ विशेषज्ञों ने बढ़ती खांसी और सांस संबंधी समस्याओं को हंता वायरस से जोड़कर देखा है। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि भारत में फिलहाल हंता वायरस के फैलने जैसी कोई स्थिति नहीं है।
हंता वायरस कोई नया वायरस नहीं है। इसका नाम कोरिया की हंटा नदी के नाम पर रखा गया था। सबसे पहले इसके मामले कोरिया में सामने आए थे, जिसके बाद यह कई देशों में देखा गया। विशेषज्ञों के अनुसार हंता वायरस के कई प्रकार होते हैं। सामान्य परिस्थितियों में यह इंसान से इंसान में बहुत कम फैलता है। कुछ विशेष स्ट्रेन ही सीमित परिस्थितियों में संक्रमण फैला सकते हैं।
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अब तक हंता वायरस का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। इसलिए लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। डॉक्टरों का मानना है कि वर्तमान में बढ़ रही खांसी के पीछे स्थानीय पर्यावरणीय और जीवनशैली संबंधी कारण ज्यादा जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब रखरखाव वाले एयर कंडीशनर भी खांसी और एलर्जी का बड़ा कारण बन सकते हैं।
यदि AC के फिल्टर नियमित रूप से साफ नहीं किए जाते, तो उनमें धूल, फंगस, बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं। यही दूषित हवा लगातार कमरे में घूमती रहती है और लोगों को बीमार कर सकती है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को इससे अधिक खतरा रहता है।
अस्थमा के मरीज, एलर्जी से पीड़ित लोग, छोटे बच्चे, बुजुर्ग, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक सीधे AC की हवा में बैठना और बंद कमरों में रहना समस्या को और बढ़ा सकता है।
खांसी को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बनी रहने वाली खांसी को सामान्य मौसमी समस्या समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो संक्रमण श्वसन तंत्र से होते हुए फेफड़ों तक पहुंच सकता है। कुछ मामलों में मरीजों की आवाज तक बदलने लगती है और गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी भी बढ़ सकती है।
लगातार खांसी, गले में खराश, बुखार, शरीर में कमजोरी, सांस फूलना, सिरदर्द, डायरिया या उल्टी (कुछ मामलों में), आवाज में बदलाव के लक्षण दिख सकते हैं।
अपनाएं ये उपाय
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, AC फिल्टर नियमित रूप से साफ करवाएं, सीधी ठंडी हवा से बचें, घर और कार्यालय में वेंटिलेशन बनाए रखें, धूल और प्रदूषण से बचाव करें, मास्क का उपयोग करें, स्वयं दवा लेने से बचें, लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। डॉक्टरों के अनुसार इस बार गर्मी में खांसी के मरीज बढ़ने से कफ सिरप की मांग भी बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सिरप या दवा नहीं लेनी चाहिए। डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण और बीमारी की गंभीरता को देखकर ही उचित दवा और सिरप लिखते हैं।
लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के बावजूद खांसी और जुकाम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार धूल, प्रदूषण, संक्रमण और खराब रखरखाव वाले AC इसके प्रमुख कारण हैं। फिलहाल हंता वायरस को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत या अन्य गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।



