- विकास किशोर की पोस्ट से बढ़ी बीजेपी में नाराजगी की चर्चा, लिखा- जहां मां-बाप का मान-सम्मान न हो, वहां नहीं रहना चाहिए, परिवार के पार्टी से अलग होने के कयास तेज
भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी की उम्मीदवार सूची सामने आने के बाद पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी खुलकर सामने आई है। कौशल किशोर को टिकट नहीं मिलने के बाद उनके बेटे और बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विकास किशोर ने सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट की, जिसे पार्टी नेतृत्व से असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
विकास किशोर ने पोस्ट में क्या लिखा?
बीजेपी के आठ राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद विकास किशोर ने लिखा, “जिस परिवार में मां-बाप का मान और सम्मान न हो, उस परिवार में नहीं रहना चाहिए।” पोस्ट के अंत में उन्होंने “जय अंबेडकर, जय संविधान, जय पारख” लिखा। विकास किशोर ने अपनी पोस्ट में बीजेपी छोड़ने या किसी दूसरे दल में जाने की सीधे तौर पर घोषणा नहीं की है। इसलिए परिवार के पार्टी छोड़ने की चर्चा फिलहाल अटकलों तक सीमित है।
कौशल किशोर को क्यों नहीं मिला टिकट?
बीजेपी ने यूपी की आठ राज्यसभा सीटों के लिए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। कौशल किशोर का नाम सूची में नहीं है। कौशल किशोर मोहनलालगंज से दो बार सांसद रह चुके हैं और मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री भी रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। राज्यसभा के जरिए उनकी संसद में वापसी की चर्चा जरूर थी, लेकिन पार्टी की मौजूदा सूची में उन्हें जगह नहीं मिली।
बेटे को कुछ दिन पहले ही मिली थी बड़ी जिम्मेदारी
इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी ने 1 अक्टूबर को विकास किशोर को उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया था। नई प्रदेश टीम में उन्हें 12 उपाध्यक्षों में शामिल किया गया। इस नियुक्ति के बाद कौशल किशोर ने बेटे को बधाई देते हुए पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताया था। इसके कुछ ही दिन बाद राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची आई और उसमें कौशल किशोर का नाम नहीं था। इसके बाद विकास किशोर की पोस्ट सामने आई।
पार्टी में अनदेखी का मुद्दा पहले भी उठा चुके हैं
कौशल किशोर पिछले कुछ समय से संगठन और सरकार की कार्यशैली को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते रहे हैं। अगस्त में उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में रही थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि “गेंद जितनी ऊपर जानी थी चली गई, अब नीचे आ रही है।” हालांकि उस पोस्ट में उन्होंने किसी नेता या पार्टी का नाम नहीं लिया था। बाद में उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी अनदेखी की बात भी सार्वजनिक रूप से कही थी। उनका कहना था कि कुछ लोग उन्हें किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं और कई कार्यक्रमों की जानकारी या निमंत्रण उन्हें नहीं दिया जाता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि वह जनता और कार्यकर्ताओं के मुद्दे उठाते रहेंगे।
प्रियंका रावत के चयन से भी जुड़ा है समीकरण
बीजेपी ने इस बार अवध क्षेत्र से पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। कौशल किशोर भी अवध क्षेत्र के प्रमुख दलित नेताओं में शामिल रहे हैं और पासी समुदाय से आते हैं। लिहाजा दोनों नामों की तुलना सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के नजरिए से की जा रही है। हालांकि बीजेपी ने कौशल किशोर को टिकट नहीं देने का कोई विस्तृत आधिकारिक कारण नहीं बताया है।


