- सीएसजेएमयू के ‘उत्साह 3.0’ में विशेषज्ञों ने बताया- नींद, शारीरिक गतिविधि और व्यवहार में बदलाव मानसिक स्वास्थ्य के शुरुआती संकेत; AI और डिजिटल तकनीक से पहचान की संभावनाओं पर शोध
भारत 19
कानपुर। मानसिक बीमारी का मतलब हमेशा उदासी, रोना, बेचैनी या चुप्पी नहीं होता। कई बार शरीर और व्यवहार में आने वाले बदलाव इससे पहले खतरे का संकेत देने लगते हैं। नींद का लगातार बिगड़ना, शारीरिक गतिविधि कम होना, लोगों से दूरी बढ़ना, काम में रुचि घटना या एकाग्रता कमजोर होना ऐसे संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अब मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े शोध में स्मार्टफोन और पहनने योग्य उपकरणों से मिलने वाले व्यवहार संबंधी आंकड़ों को भी शुरुआती संकेतों के तौर पर समझने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
इसी बदलती वैज्ञानिक सोच को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग ने साइकोलॉग्स मैगजीन के सहयोग से राष्ट्रव्यापी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान ‘उत्साह 3.0’ आयोजित किया।
मानसिक बीमारी की पहचान का नजरिया बदल रहा
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने शोध और अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया कि भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। मानसिक परेशानी को समझने के लिए अब केवल व्यक्ति के बताए अनुभवों पर निर्भर रहने के बजाय उसके व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों में आने वाले बदलावों को भी महत्व दिया जा रहा है। नींद और शारीरिक सक्रियता से जुड़े आंकड़े जुटाने वाले पहनने योग्य उपकरण इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि इन संकेतों को मानसिक बीमारी का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता, बल्कि शुरुआती बदलावों को समझने और समय पर सहायता की दिशा में संभावित मदद के तौर पर देखा जा रहा है। स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के निदेशक डॉ. अमित कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा है और इसके बारे में बातचीत को सामान्य जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका शुक्ला ने मानसिक समस्याओं को समझने, संवेदनशीलता बरतने और समय रहते सहायता लेने की जरूरत बताई।
‘मिथ एंड रियलिटी बस्टर’ से टूटे मानसिक स्वास्थ्य के भ्रम
कार्यक्रम में छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों और वैज्ञानिक तथ्यों से परिचित कराने के लिए ‘मिथ एंड रियलिटी बस्टर’ संवादात्मक गतिविधि कराई गई। फैकल्टी कोऑर्डिनेटर डॉ. अहमद अब्दुल्लाह, डॉ. अनमोल शेखर श्रीवास्तव और डॉ. दुर्गा यादव के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी प्रचलित धारणाओं पर चर्चा की।
AI और डिजिटल तकनीक खोल रही नई संभावनाएं
विशेषज्ञों ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मोबाइल आधारित सेवाएं, आभासी वास्तविकता और डिजिटल निगरानी मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार की तस्वीर बदल रहे हैं। इन तकनीकों के जरिए मानसिक समस्याओं की शुरुआती पहचान, उपचार और लगातार निगरानी की संभावनाओं पर शोध किया जा रहा है।
डॉ. अहमद अब्दुल्लाह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की शुरुआत अपनी भावनाओं को पहचानने और स्वीकार करने से होती है। डॉ. अनमोल शेखर श्रीवास्तव ने आत्म-जागरूकता के साथ प्रियजनों के व्यवहार में बदलाव पहचानने पर जोर दिया। डॉ. दुर्गा यादव ने सही जानकारी और समय पर सहयोग को भावनात्मक मजबूती का आधार बताया।


