कानपुर के पुरवामीर गांव में रक्षाबंधन की सुबह आंगन की जमीन धंसने से 18 वर्षीय यशी करीब 25 फीट गहरे गड्ढे में गिर गई।
पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
BHARAT 19/ कानपुर। रक्षाबंधन की सुबह कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव में एक दर्दनाक हादसे ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं। शुक्रवार सुबह करीब 6:40 बजे 18 वर्षीय यशी सविता नहाने के बाद बाथरूम से बाहर निकली। जैसे ही उसने आंगन की ओर कदम बढ़ाया, अचानक जमीन धंस गई और वह नीचे मौजूद पुरानी बोरिंग में जा गिरी।
हादसा इतना अचानक हुआ कि यशी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बड़ी बहन ने उसे गड्ढे में गिरते देखा और शोर मचाकर परिवार के अन्य सदस्यों को बुलाया।

रस्सी से बचाने की कोशिश, फिर और धंसी मिट्टी
परिवार के लोगों ने तत्काल रस्सी के सहारे यशी को बाहर निकालने की कोशिश की। इसी दौरान मिट्टी और धंस गई और यशी और नीचे चली गई। कुछ ही देर में वह दिखाई देना भी बंद हो गई।
घटना की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं।
60 जवानों ने बनाया दूसरा रास्ता
रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सीधे गड्ढे में उतरना सुरक्षित नहीं था। जमीन के दोबारा धंसने का खतरा बना हुआ था। इसके बाद टीम ने यशी तक पहुंचने के लिए बगल से दूसरा गड्ढा खोदने का फैसला किया।
करीब 60 जवानों ने बचाव अभियान में हिस्सा लिया। शुरुआत में जेसीबी से खुदाई की गई, लेकिन गहराई बढ़ने के बाद पोकलैंड मशीन मंगाई गई। लगातार खुदाई के बाद दोपहर करीब 2:50 बजे लगभग 24 फीट नीचे रेस्क्यू टीम यशी तक पहुंच सकी।
बाहर निकली तो अचेत थी
यशी को गड्ढे से बाहर निकाला गया तो वह अचेत थी। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सरसौल ले जाया गया।
सीएचसी सरसौल के डॉक्टर दीपेंद्र उत्तम के अनुसार, युवती को दोपहर 2:43 बजे अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों ने करीब 10 मिनट तक उसकी जांच की, लेकिन उसकी सांस नहीं चल रही थी। डॉक्टर के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
तीन साल पहले हुई थी पुरानी बोरिंग
परिवार के अनुसार, करीब तीन वर्ष पहले घर के अंदर बोरिंग कराई गई थी, लेकिन पानी नहीं निकलने के कारण उसे छोड़ दिया गया था। बाद में दूसरी जगह नई बोरिंग कराई गई और पुरानी बोरिंग के ऊपर फर्श बना दिया गया।
परिवार ने आशंका जताई कि लगातार बारिश के कारण जमीन कमजोर हुई और इसी वजह से पुरानी बोरिंग के ऊपर का हिस्सा अचानक धंस गया। हालांकि हादसे की वास्तविक तकनीकी वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिवार में छह भाई-बहनों के बीच थी यशी
पुरवामीर गांव जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर बताया गया है। यशी अपने पिता विनोद, मां रेखा, तीन बहनों रुचि, रूपा और अनुपमा तथा भाई भास्कर उर्फ अमित के साथ रहती थी।
रक्षाबंधन के दिन हुए इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जिस दिन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार मनाया जाना था, उसी दिन परिवार ने अपनी बेटी और बहन को खो दिया।
पुरवामीर का यह हादसा पुराने और निष्क्रिय बोरवेल को सुरक्षित तरीके से बंद करने की जरूरत पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। लगातार बारिश के बीच जमीन के कमजोर होने की आशंका भी सामने आई है। फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद स्पष्ट होगी, लेकिन यशी की मौत ने रक्षाबंधन की खुशियों को पूरे परिवार के लिए कभी न भूलने वाले दुख में बदल दिया।


