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KANPUR में 31 अगस्त तक सभी नदियाँ और बहती जलधाराएँ ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित, मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध

कानपुर नगर प्रशासन ने मछलियों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने और मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए जनपद की सभी नदियों एवं बहती जलधाराओं को 1 जून से 31 अगस्त 2026 तक ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित कर दिया है। इस अवधि में मछली पकड़ने तथा जलधाराओं में घेराबंदी (बाड़े) लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने आदेश के सख्त अनुपालन और सतत निगरानी के निर्देश दिए हैं।

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KANPUR/ कानपुर नगर प्रशासन ने जल संसाधनों और मत्स्य संपदा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार जनपद की समस्त नदियों एवं बहती जलधाराओं को 1 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित किया गया है। यह निर्णय मछलियों के प्रजनन काल के दौरान उनके संरक्षण और प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों के संवर्धन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

क्या है आदेश?

जारी निर्देशों के अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी नदी अथवा बहती जलधारा में मत्स्य आखेट (मछली पकड़ना) पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही जलधाराओं में बाड़े या घेराबंदी लगाकर मछलियां पकड़ने की गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। प्रशासन का मानना है कि मानसून के दौरान अधिकांश मछलियां प्रजनन करती हैं। ऐसे समय में मत्स्य आखेट होने से उनकी संख्या और प्राकृतिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए यह प्रतिबंध मत्स्य संसाधनों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

कब और कहाँ लागू रहेगा प्रतिबंध?

यह प्रतिबंध 1 जून 2026 से प्रभावी होकर 31 अगस्त 2026 तक लागू रहेगा। आदेश कानपुर नगर जनपद की सभी नदियों और बहती जलधाराओं पर लागू होगा। इस अवधि में किसी भी व्यक्ति या संस्था को मत्स्य आखेट की अनुमति नहीं होगी।

कौन करेगा निगरानी?

जिलाधिकारी ने मत्स्य विभाग को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग को नियमित निरीक्षण, निगरानी और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है ताकि प्रतिबंध अवधि के दौरान नियमों का उल्लंघन न हो। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मत्स्य संरक्षण से संबंधित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

मत्स्य विभाग ने की सहयोग की अपील

सहायक निदेशक मत्स्य, कानपुर नगर डॉ. जितेंद्र कुमार ने सभी मत्स्यजीवी सहकारी समितियों, मछुआरा समुदाय तथा आम नागरिकों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मत्स्य संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से प्रतिबंध अवधि के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करने और अवैध मत्स्य आखेट की सूचना संबंधित विभाग को देने का अनुरोध किया है।

क्यों जरूरी है ‘नो फिशिंग जोन’?

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून का समय अधिकांश प्रजातियों की मछलियों के प्रजनन का प्रमुख काल होता है। यदि इस अवधि में बड़े पैमाने पर मछली पकड़ने की गतिविधियां जारी रहती हैं तो मत्स्य उत्पादन में कमी आ सकती है। ‘नो फिशिंग जोन’ जैसी व्यवस्थाएं मछलियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करती हैं, जिससे उनकी संख्या और जैव विविधता में वृद्धि होती है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि भविष्य में मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों की आजीविका को भी मजबूत करने में सहायक मानी जा रही है।

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