- जांच समिति की पड़ताल में आठ फाइलों में दस्तावेज और एनओसी की कमी मिली; छह जोनों में 24 बड़ी फर्मों को सात साल से काम मिलने की भी जांच
भारत 19
कानपुर। नगर निगम में ठेकेदार फर्मों के पंजीकरण और उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया अब जांच के घेरे में है। सीडीओ अभिनव जे. जैन की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति ने नगर निगम से मिली 20 पंजीकरण फाइलों में से आठ की जांच की। पड़ताल में कई फाइलों में जरूरी प्रमाणपत्र और अनिवार्य एनओसी नहीं मिलीं। समिति ने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है।
दस्तावेज अधूरे, फिर भी पंजीकरण का सवाल
जांच में फर्मों की पात्रता से जुड़े आयकर, टर्नओवर और अन्य प्रमाणपत्रों के अलावा आवश्यक एनओसी की उपलब्धता पर सवाल उठे हैं। ऐसे में जांच का अहम बिंदु यह है कि अधूरे दस्तावेजों के बावजूद संबंधित फर्मों का पंजीकरण या नवीनीकरण किस आधार पर किया गया। नगर निगम में वर्तमान में करीब 509 फर्मों के पंजीकृत होने की जानकारी सामने आई है।
24 फर्मों को बड़े काम मिलने की पड़ताल
समिति ने केवल पंजीकरण की फाइलों तक जांच सीमित नहीं रखी है। नगर निगम के छह जोनों में पिछले सात वर्षों के दौरान बड़े कार्य हासिल करने वाली करीब 24 फर्मों की भूमिका भी जांची जा रही है। इन फर्मों को लगातार बड़े काम मिलने के पीछे पंजीकरण और टेंडर प्रक्रिया किस तरह काम करती रही, इसे भी देखा जा रहा है।
टेंडर प्रक्रिया में पूलिंग के आरोपों की जांच
जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया में कथित पूलिंग की शिकायतें भी सामने आई हैं। हॉटमिक्स प्लांट जैसी शर्तों के आधार पर कुछ फर्मों के आवेदन निरस्त किए जाने और दूसरी फर्मों को कमियां होने के बावजूद मौका दिए जाने के आरोपों की भी पड़ताल हो रही है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
हॉटमिक्स प्लांट की शर्त भी हटाई गई
विवाद के बीच नगर निगम ने सड़क निर्माण से जुड़े टेंडरों में हॉटमिक्स प्लांट की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इससे उन फर्मों के लिए भी रास्ता खुला है, जो अन्य सरकारी विभागों में काम कर रही हैं, लेकिन इस शर्त के कारण नगर निगम के टेंडर में शामिल नहीं हो पा रही थीं।
पहले से जांच के घेरे में टेंडर
नगर निगम में फर्मों के पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल ऐसे समय उठे हैं, जब टेंडर प्रक्रिया को लेकर अलग से जांच चल रही है। एसआईटी नगर निगम पहुंचकर संबंधित फर्मों की फाइलें, टेंडर दस्तावेज और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल चुकी है।
अब काम और भुगतान की भी पड़ताल
फर्म पंजीकरण की जांच के बाद पड़ताल का अगला अहम हिस्सा यह होगा कि संबंधित फर्मों को कौन-कौन से बड़े काम दिए गए, टेंडर में कितनी प्रतिस्पर्धा हुई, काम की गुणवत्ता कैसी रही और भुगतान किस आधार पर किया गया। इससे जांच का दायरा पंजीकरण से लेकर टेंडर और काम के भुगतान तक पहुंच सकता है।


