कानपुर के चर्चित 3200 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन मामले में चकेरी पुलिस ने एक और अहम आरोपी संजीव दीक्षित को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 13 फर्जी कंपनियां और 18 बैंक खाते संचालित किए, जिनके जरिए करोड़ों रुपये का अवैध वित्तीय लेनदेन किया गया।
KANPUR/ कानपुर में सामने आए 3200 करोड़ रुपये के कथित अवैध लेनदेन मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। चकेरी थाना पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले से जुड़े शातिर आरोपी संजीव दीक्षित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी फर्मों और बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का संचालन कर रहा था।
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— Bharat19 News (@bharat19com) June 12, 2026
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार आरोपी संजीव दीक्षित, पहले से जेल भेजे जा चुके महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी का करीबी सहयोगी है। जांच में सामने आया है कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और मजदूरों को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं बीमा सुविधाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था।
गरीबों के दस्तावेजों से खड़ी कीं फर्जी कंपनियां
पुलिस जांच के मुताबिक संजीव दीक्षित ने कई लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 13 फर्जी कंपनियां खड़ी कीं। इसके अलावा विभिन्न बैंकों में 18 खाते भी खुलवाए गए, जिनका संचालन वास्तविक खाताधारकों के बजाय आरोपी और उसके सहयोगी करते थे।
जांच में इन फर्जी कंपनियों के जरिए लगभग 323 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। पुलिस का दावा है कि इन खातों का उपयोग टैक्स चोरी, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कथित दुरुपयोग और बड़ी रकम को इधर-उधर स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।
3200 करोड़ रुपये के नेटवर्क से जुड़े तार
यह मामला फरवरी 2026 में चकेरी क्षेत्र में हुई 24 लाख रुपये की लूट की जांच के दौरान सामने आया था। पुलिस जांच आगे बढ़ी तो महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी और उसके नेटवर्क से जुड़े कई बैंक खातों एवं फर्जी फर्मों का खुलासा हुआ।
पुलिस के अनुसार महफूज अली और उसके सहयोगियों ने विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर दर्जनों बैंक खाते खुलवाकर करीब 3200 करोड़ रुपये के लेनदेन का नेटवर्क तैयार किया था। इसी कड़ी में संजीव दीक्षित की भूमिका भी सामने आई।
स्क्रैप कारोबार और अन्य लेनदेन की जांच
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पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कुछ स्क्रैप कारोबारियों और अन्य व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी संदेह के दायरे में आए हैं। हालांकि पुलिस ने अभी किसी कारोबारी को दोषी नहीं ठहराया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
अधिकारियों के अनुसार संदिग्ध लेनदेन से जुड़े सभी दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
पहले भी दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार संजीव दीक्षित के खिलाफ पहले से भी धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े कई मुकदमे दर्ज हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पहले भी इसी तरह के मामलों में जेल जा चुका है।
चकेरी और अनवरगंज थाना क्षेत्रों में उसके खिलाफ आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। पुलिस अब उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में भी जुटी हुई है।
सिंडीकेट पर लगातार कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 3200 करोड़ रुपये के कथित अवैध लेनदेन मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। संजीव दीक्षित की गिरफ्तारी इस नेटवर्क के खिलाफ की गई प्रमुख कार्रवाइयों में से एक है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर का 3200 करोड़ रुपये के कथित अवैध लेनदेन का मामला लगातार नए खुलासों के कारण चर्चा में बना हुआ है। संजीव दीक्षित की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का फोकस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों और वित्तीय गतिविधियों पर है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



