- सुजातगंज से लापता महिला की झांसी के होटल में मिली थी लाश, पुलिस ने मोहल्ले के नईम उर्फ लाला को बनाया था मुख्य आरोपी; पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने किया दोषमुक्त
भारत 19
कानपुर। कानपुर के रेलबाजार थाना क्षेत्र के सुजातगंज से करीब 17 साल पहले लापता हुई अनवर जहां की हत्या के मुकदमे में मुख्य आरोपी बनाए गए मोहम्मद नईम उर्फ लाला को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर बरी कर दिया। पुलिस ने नईम को आरोपी बनाकर जेल भेजा था। करीब 17 साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत के फैसले से उसे मामले में दोषमुक्त कर दिया गया।
2004 में लापता हुई थी अनवर जहां
असलम ने 28 जुलाई 2004 को रेलबाजार थाने में तहरीर देकर पत्नी अनवर जहां के लापता होने की सूचना दी थी। बेटी ने पुलिस को बताया था कि उसकी मां मोहल्ले के मोहम्मद नईम उर्फ लाला के साथ दवा लेने गई थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। परिवार की ओर से कई बार प्रार्थनापत्र दिए जाने के बाद मामले ने नया मोड़ लिया।
झांसी के होटल में मिली थी महिला की लाश
झांसी के नवाबाद क्षेत्र स्थित एक होटल में एक महिला का शव मिला था। होटल से मिले सामान में कपड़े और एक बैग था। असलम ने झांसी पहुंचकर शव की पहचान अपनी पत्नी के रूप में की। बैग में मिले पुरुषों के कपड़ों को भी उसने नईम के कपड़े होने का दावा किया था।
2007 में पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ केस
मामले में अदालत के आदेश पर एक मई 2007 को पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद की विवेचना में पुलिस ने अन्य आरोपियों को मामले से अलग कर उन्हें गवाह बना दिया, जबकि नईम को मुख्य आरोपी बनाया गया। इसके बाद मामला अदालत में चलता रहा।
बचाव पक्ष ने साक्ष्यों पर उठाए सवाल
नईम के अधिवक्ता करीम अहमद के मुताबिक, होटल से मिले महिला के शव के हाथ पर ‘सोनी’ नाम गुदा हुआ था और पुणे का भी जिक्र मिला था, लेकिन पुलिस ने इस पहलू को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि मूल पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अदालत में दाखिल नहीं की गईं। आरोप साबित करने के लिए मुख्य रूप से बैग से मिले दो कुर्ते और एक तहमत तथा असलम के बयान को आधार बनाया गया।
17 साल चली सुनवाई के बाद नईम बरी
मामले की लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों को नईम के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना और उसे बरी कर दिया। इस तरह करीब 17 साल पुराने हत्या के मुकदमे का अंत नईम के दोषमुक्त होने के साथ हुआ।


