-यूपीएमआरसी ने बारिश को बताया था वजह, 2 दिन बाद 7 अन्य मकानों में दरारें मिलने से उठे गंभीर सवाल
– देर रात विधायक ने संभाला मोर्चा; IIT कानपुर और HBTU से पूरी अंडरग्राउंड लाइन की जांच कराने की मांग
कानपुर/ काकादेव में मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट के अचानक धंसने के मामले में उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। दो दिन पहले मेट्रो प्रशासन ने बारिश के कारण मिट्टी कमजोर होने को हादसे की वजह बताया था। हालांकि, अब आसपास के सात अन्य मकानों में भीषण दरारें आने और जमीन के नीचे गहरा धंसाव मिलने से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। शुक्रवार देर रात गोविंद नगर विधायक सुरेंद्र मैथानी ने मेट्रो की तकनीकी टीम के साथ प्रभावित इलाके का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण में खुले जमीनी हकीकत के राज
विधायक द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 82 स्थानों पर दरारें: धंसे हुए अपार्टमेंट के ठीक बगल स्थित एक मकान में लगभग 82 जगहों पर दरारें मिलीं। मकान के नीचे बने दो चैंबर जमीन धंसने से काफी नीचे चले गए थे और ढक्कन हटाने पर नीचे गहरा गड्ढा दिखाई दिया। नींव के नीचे 6 फीट का गड्ढा: एक अन्य मकान की नींव के नीचे करीब 6 फीट तक जमीन धंस गई, जिससे मकान की पूरी दीवार दो हिस्सों में बंट गई। विधायक ने अपार्टमेंट के दोनों तरफ 20-20 मीटर के दायरे में सुरक्षात्मक बैरिकेडिंग और सपोर्ट कराने को कहा। उन्होंने अंडर ग्राउंड हिस्से में ग्राउंडिंग के काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा। साथ ही उन्होंने कहा कि रावतपुर से डबल पुलिया तक बिछाई गई अंडर ग्राउंड मेट्रो लाइन की पूरी तकनीकी जांच आईआईटी कानपुर और हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के विशेषज्ञों से कराई जाए।
प्रभावित परिवारों को सुरक्षा का आश्वासन
विधायक ने रात में ही सभी सात प्रभावित मकानों के निवासियों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि जान-माल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शनिवार को मेट्रो के जीएम को कानपुर बुलाकर मौके का स्थलीय निरीक्षण कराने और आवश्यक इंजीनियरिंग सुधार युद्धस्तर पर लागू करने की बात कही गई है।
बड़ा सवाल: सिर्फ कुदरत की मार या तकनीकी चूक?
काकादेव की इस घटना ने मेट्रो प्रोजेक्ट्स के दौरान आसपास की इमारतों की सुरक्षा (Structural Integrity) पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। क्या यह नुकसान सिर्फ बारिश का परिणाम है या अंडरग्राउंड टनलिंग के दौरान हुई किसी तकनीकी चूक का? इसका वास्तविक उत्तर आईआईटी, एचबीटीयू की निष्पक्ष और विस्तृत तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा।
यूपीएमआरसी के ‘बारिश वाले तर्क’ पर उठ रहे सवाल
शुरुआत में यूपीएमआरसी ने पूरी घटना का ठीकरा बारिश पर फोड़ते हुए मिट्टी कमजोर होने की बात कही थी। लेकिन 7 अन्य मकानों के प्रभावित होने, गहरे धंसाव और खोखले हुए चैंबरों की तस्वीरें सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि—क्या इतनी बड़ी तबाही सिर्फ बारिश का नतीजा है या इसके पीछे मेट्रो के अंडरग्राउंड निर्माण की कोई तकनीकी लापरवाही है? निरीक्षण के दौरान विधायक ने मौके पर मौजूद मेट्रो के अधिशासी अभियंता अभिनव पटेल और तकनीकी टीम से तीखे सवाल किए। उन्होंने मेट्रो अधिकारी अज़हर सरताज से फोन पर वार्ता कर सख्त नाराजगी जताई और तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।


