- माध्यमिक शिक्षकों, DIET प्रवक्ताओं और SCERT अधिकारियों के लिए आठ सप्ताह का AI Training; Scratch से Python, AI Tools और Robotics तक होगा व्यावहारिक अभ्यास
भारत 19
कानपुर। उत्तर प्रदेश के स्कूलों में अब AI, कोडिंग, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और रोबोटिक्स का इस्तेमाल कक्षा शिक्षण में बढ़ाने की तैयारी है। IIT कानपुर ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के सहयोग से अपने Digital Literacy and Computational Thinking and AI (DLCCAI) कार्यक्रम का विस्तार माध्यमिक शिक्षा तक किया है। इसके तहत करीब 900 शिक्षकों, DIET प्रवक्ताओं और SCERT से जुड़ी इकाइयों के अधिकारियों को आठ सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण सिर्फ AI या Coding की तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षकों को इन्हें कक्षा शिक्षण और रोजमर्रा के स्कूल कार्यों में व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। पाठ योजना, डिजिटल सामग्री, मूल्यांकन और परियोजना आधारित सीखने में तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर रहेगा।

छह बैचों में 900 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण
कार्यक्रम छह बैचों में संचालित होगा और हर बैच में 150 प्रतिभागी होंगे। प्रशिक्षण ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों प्रारूपों में होगा। पहले चरण में IIT कानपुर में पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद छह सप्ताह तक Google Classroom के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं, साप्ताहिक मेंटरिंग और लाइव डाउट-सॉल्विंग सत्र होंगे। अंतिम चरण में IIT कानपुर में दो दिन की परियोजना प्रस्तुति और प्रदर्शन कराया जाएगा।

नोटिस से मार्कशीट तक, तकनीक सीखेंगे शिक्षक
प्रशिक्षण का फोकस रोजमर्रा के स्कूल कार्यों पर रहेगा। शिक्षक नोटिस और पाठ तैयार करने, मार्कशीट व प्रेजेंटेशन बनाने, मूल्यांकन करने और डिजिटल अध्ययन सामग्री तैयार करने जैसे कार्यों के जरिए तकनीक का इस्तेमाल सीखेंगे। प्रशिक्षण कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों की बुनियादी समझ से शुरू होगा। इसके बाद MS Office, Google Workspace, डिजिटल संचार, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नागरिकता जैसे विषय शामिल किए जाएंगे।
Scratch से Python और AI Tools तक ट्रेनिंग
जिन शिक्षकों को Coding या AI का पूर्व अनुभव नहीं है, उनके लिए पाठ्यक्रम शुरुआती स्तर से तैयार किया गया है। प्रशिक्षण की शुरुआत Scratch आधारित ब्लॉक प्रोग्रामिंग से होगी। इसके बाद Python की बुनियादी जानकारी, AI और शैक्षणिक तकनीकी उपकरणों का अभ्यास कराया जाएगा। ChatGPT, Google Classroom और Khan Academy जैसे प्लेटफॉर्म के व्यावहारिक इस्तेमाल के जरिए पाठ योजना, सामग्री निर्माण और विद्यार्थियों के मूल्यांकन को तकनीक से जोड़ने पर जोर रहेगा।
रोबोट बनाएंगे, सेंसर चलाएंगे और चुनौती लेंगे
प्रशिक्षण में Robotics का व्यावहारिक हिस्सा भी शामिल है। शिक्षक रोबोट असेंबल करने और सेंसर आधारित गतिविधियों को सीखेंगे। इसके बाद Robotics Challenge आयोजित की जाएगी। इसमें समस्या समाधान, प्रयोग और जिज्ञासा आधारित सीखने पर जोर रहेगा। इससे शिक्षक विद्यार्थियों के साथ प्रोजेक्ट और प्रयोग आधारित गतिविधियां कराने के लिए भी तैयार होंगे।
पहले 750 प्राथमिक शिक्षक ले चुके प्रशिक्षण
IIT कानपुर के मुताबिक DLCCAI कार्यक्रम के तहत पहले 750 प्राथमिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। संस्थान के अनुसार इससे 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों तक इसका लाभ पहुंचा है। अब कार्यक्रम का विस्तार माध्यमिक शिक्षा तक किया गया है। SCERT के अनुसार डिजिटल और कम्प्यूटेशनल अवधारणाओं को कक्षा 6 से 8 की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जा चुका है, जिससे करीब 48 लाख विद्यार्थियों तक इन अवधारणाओं की पहुंच बनी है।
AI के साथ शिक्षक की भूमिका रहेगी केंद्र में
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. रामकुमार जे. के अनुसार कोडिंग, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI अब केवल इंजीनियरिंग संस्थानों तक सीमित विषय नहीं हैं। प्रो. सत्यकी राय ने कहा कि तकनीक शिक्षण को बेहतर बना सकती है, लेकिन शिक्षक का विवेक, संवेदनशीलता और व्यक्तिगत उपस्थिति उसका विकल्प नहीं हो सकती। आउटरीच गतिविधियों के प्रभारी प्रो. विमल कुमार ने इसे IIT कानपुर की परिसर से बाहर ज्ञान और तकनीकी कौशल के प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
प्रशिक्षण पूरा करने पर मिलेगा संयुक्त प्रमाणपत्र
प्रशिक्षण के दौरान प्रश्नोत्तरी, असाइनमेंट और परियोजनाएं कराई जाएंगी। अंतिम समेकित परियोजना की प्रस्तुति भी होगी। तय गतिविधियां पूरी करने वाले प्रतिभागियों को SCERT उत्तर प्रदेश और IIT कानपुर का संयुक्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षकों को डिजिटल, कम्प्यूटेशनल और AI आधारित शिक्षण के लिए जरूरी कौशल और आत्मविश्वास देना है।


