- विक्रेता का जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाने के बाद भी अब खरीदार को मिलेगा इनपुट टैक्स क्रेडिट
भारत 19 न्यूज
राजीव सक्सेना, कानपुर। देशभर के लाखों कारोबारियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को लेकर बड़ी राहत की खबर है। अब यदि किसी कारोबारी ने सभी कानूनी शर्तों का पालन करते हुए माल खरीदा है और जीएसटी का भुगतान किया है, तो केवल इस आधार पर उसका ITC नहीं रोका जा सकेगा कि बाद में विक्रेता का GST रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई 2026 को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट का फैसला प्रभावी हो गया है, जिससे ऐसे मामलों में खरीदार कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
क्या था पूरा विवाद?
जीएसटी लागू होने के बाद कई मामलों में विभाग ने उन खरीदार कारोबारियों को नोटिस जारी किए, जिन्होंने ऐसे विक्रेताओं से माल खरीदा था जिनका बाद में किसी कारण से GST रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया। विभाग का तर्क था कि ऐसे मामलों में खरीदार ITC का लाभ नहीं ले सकता। जबकि खरीदार का कहना था कि उसने माल खरीदते समय टैक्स का भुगतान कर दिया था और उस समय विक्रेता का पंजीकरण वैध था। ऐसे में बाद की कार्रवाई का खामियाजा खरीदार पर नहीं डाला जा सकता। जीएसटी लागू होने के बाद पिछले नौ वर्षों में देशभर में हजारों कारोबारियों ने अपना कारोबार बंद किया या उनका पंजीकरण रद्द हो गया। इससे बड़ी संख्या में खरीदार कारोबारियों का करोड़ों रुपये का ITC विवादों में फंस गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2025 को अपने फैसले में कहा था कि यदि खरीदार ने कानून के अनुसार सभी आवश्यक शर्तों का पालन किया है तो केवल विक्रेता का पंजीकरण रद्द होने के आधार पर उसे ITC से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले के खिलाफ जीएसटी विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही हाईकोर्ट का निर्णय प्रभावी हो गया। इसका मतलब है कि भविष्य में ऐसे मामलों में केवल विक्रेता का रजिस्ट्रेशन रद्द होने के आधार पर खरीदार का ITC स्वतः खारिज नहीं किया जा सकेगा।
ITC पाने के लिए किन शर्तों का पालन जरूरी?
चार्टर्ड अकाउंटेंट शिवम ओमर के अनुसार, केंद्रीय जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा-16 के तहत खरीदार को ITC का लाभ तभी मिलेगा जब—
– माल या सेवा की वास्तविक आपूर्ति हुई हो।
- वैध टैक्स इनवॉइस उपलब्ध हो।
- आवश्यक होने पर ई-वे बिल जारी किया गया हो।
- परिवहन से संबंधित बिल्टी या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों।
- भुगतान बैंकिंग चैनल के माध्यम से किया गया हो।
- विक्रेता ने आपूर्ति को अपनी GSTR-1 में घोषित किया हो।
- संबंधित इनवॉइस खरीदार की GSTR-2B में दिखाई दे रही हो।
कारोबारियों के लिए फैसले का क्या मतलब?
कोर्ट के इस निर्णय से उन कारोबारियों को राहत मिलेगी जो ईमानदारी से कारोबार करते हुए टैक्स का भुगतान करते हैं, लेकिन बाद में विक्रेता के खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई के कारण ITC विवाद में फंस जाते थे। हालांकि, यदि लेनदेन फर्जी पाया जाता है, माल की वास्तविक आपूर्ति नहीं हुई है या दस्तावेज अपूर्ण हैं, तो विभाग जांच और कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।


