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आज से ई-बस और ई-ट्रक में ट्रैक्शन मोटर लोकल जरूरी

  • PM E-DRIVE के तहत स्थानीयकरण की शर्त लागू, मोटर के अहम हिस्सों की मैन्युफैक्चरिंग भारत में जरूरी; ऑटो उद्योग ने अप्रैल 2027 तक मांगी मोहलत

भारत 19
नई दिल्ली।
इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाने वाली कंपनियों के लिए 1 सितंबर से स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को लेकर अहम बदलाव लागू हो गया है। PM E-DRIVE योजना के Phased Manufacturing Programme (PMP) के तहत पात्र ई-बस और ई-ट्रक में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्शन मोटर से जुड़े निर्धारित निर्माण और असेंबली कार्य अब भारत में करने होंगे। सरकार का मकसद इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के महत्वपूर्ण कंपोनेंट में घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

पूरा मोटर नहीं, अहम हिस्सों का स्थानीयकरण

नई शर्त को सिर्फ इस रूप में समझना सही नहीं होगा कि अब पूरा ट्रैक्शन मोटर भारत में ही बनाना अनिवार्य है। PMP में मोटर से जुड़े कई अहम फिटमेंट और असेंबली कार्य भारत में करने की व्यवस्था है। इसमें मैग्नेट फिटमेंट, रोटर और स्टेटर की असेंबली, शाफ्ट और बेयरिंग फिटमेंट, मोटर एनक्लोजर, कनेक्टर और केबल फिटमेंट जैसे काम शामिल हैं। ई-ट्रक के मामले में ट्रैक्शन मोटर के साथ मोटर कंट्रोलर और इन्वर्टर से जुड़े निर्धारित स्थानीयकरण कार्य भी नियमों का हिस्सा हैं।

ई-बस और ई-ट्रक की किन श्रेणियों पर असर

स्थानीयकरण की यह शर्त मुख्य रूप से M2 और M3 श्रेणी की इलेक्ट्रिक बसों तथा N2 और N3 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों से संबंधित है। खास तौर पर PM E-DRIVE के तहत योजना का लाभ लेने वाले निर्माताओं के लिए इन शर्तों का पालन महत्वपूर्ण होगा। इसलिए इसे सभी इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों पर लागू सामान्य बिक्री प्रतिबंध के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह मुख्य रूप से PM E-DRIVE की पात्रता और उसके तहत मिलने वाले लाभ से जुड़ा स्थानीयकरण ढांचा है।

आयात की छूट अब खत्म

सरकार ने कंपनियों को स्थानीय सप्लाई चेन तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। मार्च 2026 में भारी उद्योग मंत्रालय ने रेयर-अर्थ मैग्नेट वाले ट्रैक्शन मोटर को आयात करने की अनुमति 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाई थी। इसके बाद स्थानीयकरण की संशोधित समयसीमा 1 सितंबर 2026 निर्धारित की गई। यह समयसीमा पहले भी बढ़ाई जा चुकी है। अब नई व्यवस्था लागू होने के साथ कंपनियों को घरेलू उत्पादन क्षमता और स्थानीय विक्रेता नेटवर्क को तेजी से मजबूत करना होगा।

ऑटो उद्योग ने फिर मांगी सात महीने की मोहलत

नई समयसीमा लागू होने के बीच उद्योग संगठन SIAM ने सरकार से एक और विस्तार की मांग की है। Business Standard की 1 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक SIAM ने स्थानीयकरण की समयसीमा को 1 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 1 अप्रैल 2027 करने का अनुरोध किया है। संगठन ने 22 जुलाई को भारी उद्योग मंत्रालय को इस संबंध में पत्र भेजा था। उद्योग की चिंता मुख्य रूप से ट्रैक्शन मोटर में इस्तेमाल होने वाले रेयर-अर्थ मैग्नेट की उपलब्धता को लेकर है। चीन की ओर से भारी रेयर-अर्थ तत्वों और परमानेंट मैग्नेट के निर्यात पर नियंत्रण बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे भारतीय निर्माताओं के लिए जरूरी मैग्नेट की नियमित आपूर्ति चुनौती बनी हुई है।

सरकार का जोर घरेलू EV सप्लाई चेन पर

PM E-DRIVE का उद्देश्य सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि देश में EV मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना भी है। सरकार के मुताबिक PM E-DRIVE के तहत पंजीकृत वाहन निर्माता अपने मॉडलों में स्थानीयकरण की दिशा में काम कर रहे हैं और कई मॉडलों को PMP अनुपालन प्रमाणपत्र भी मिल चुके हैं। ट्रैक्शन मोटर का स्थानीयकरण इसी रणनीति का अहम हिस्सा है। हालांकि कंपनियों के सामने अब दोहरी चुनौती है—स्थानीय उत्पादन बढ़ाना और रेयर-अर्थ मैग्नेट की भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना।

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