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विवाद के बाद EC का फैसला, फॉर्म 6 से Annexure-D हटा

  • नए वोटरों के लिए बदली ऑनलाइन प्रक्रिया, SIR वाले राज्यों में अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था रहेगी

भारत 19

नई दिल्ली। वोटर लिस्ट में पहली बार नाम जुड़वाने वालों के लिए चुनाव आयोग ने Form 6 की प्रक्रिया को लेकर अहम बदलाव किया है। 30 सितंबर से उन राज्यों में Form 6 के साथ जुड़ा अतिरिक्त SIR Declaration यानी Annexure-D हटा दिया गया है, जहां SIR की प्रक्रिया लागू नहीं है या पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग ने इसके अनुरूप ECINET पर भी Form 6 की प्रक्रिया में बदलाव किया है। हालांकि SIR के दायरे वाले राज्यों में अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था अलग हो सकती है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर चुनाव आयोग के भीतर और बाहर सवाल उठे थे। आयोग का कहना रहा है कि Form 6 के वैधानिक प्रारूप में बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR के लिए उसके साथ अलग से Declaration जोड़ा गया था।

अब Form 6 के साथ Annexure-D नहीं

चुनाव आयोग के नए फैसले का सीधा असर उन राज्यों के नए मतदाताओं पर पड़ेगा, जहां SIR लागू नहीं है या उसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे राज्यों में मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए सामान्य Form 6 भरना होगा। उसके साथ SIR से जुड़ा अतिरिक्त Annexure-D नहीं देना होगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि Form 6 की पूरी प्रक्रिया बदल गई है। उम्र, भारतीय नागरिकता, सामान्य निवास और अन्य जरूरी जानकारियों से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया लागू रहेगी।

SIR वाले राज्यों में नियम अलग

इस बदलाव को पूरे देश में Annexure-D खत्म करने के फैसले के तौर पर देखना सही नहीं होगा। जहां Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है, वहां चुनाव आयोग के SIR संबंधी निर्देश लागू होंगे। ऐसे राज्यों में Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा या दस्तावेजों की जरूरत अलग हो सकती है। यही वजह है कि नए मतदाताओं को आवेदन करते समय अपने राज्य में लागू व्यवस्था देखना जरूरी होगा।

क्या है Form 6?

Form 6 चुनाव आयोग का वह आवेदन पत्र है, जिसके जरिए पात्र नागरिक पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करते हैं। 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके या निर्धारित पात्रता तिथि पर 18 वर्ष के होने वाले भारतीय नागरिक इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। आवेदन संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के समक्ष किया जाता है। Form 6 में आवेदक का नाम, जन्मतिथि, पता और अन्य निर्धारित जानकारियां ली जाती हैं। पात्रता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज भी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

Annexure-D क्यों चर्चा में आया?

SIR के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें नए मतदाता से केवल मौजूदा जानकारी ही नहीं, बल्कि पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित अतिरिक्त जानकारी भी मांगी जा सकती थी। कुछ मामलों में आवेदक को अपने या परिवार के पुराने चुनावी रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी देने की व्यवस्था थी। पुराने मतदाता सूची के विवरण को नए आवेदन से जोड़ने की यह प्रक्रिया सामान्य Form 6 से अलग थी। यही अतिरिक्त जानकारी राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बनी।

विवाद का असल मुद्दा क्या था?

विवाद यह नहीं था कि नए मतदाताओं से Form 6 क्यों भरवाया जा रहा है। सवाल Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़ने की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार को लेकर उठा। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयोग के भीतर भी इस अतिरिक्त घोषणा को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। सवाल यह था कि वैधानिक Form 6 के साथ अतिरिक्त अनिवार्य जानकारी जोड़ने के लिए किस प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। दूसरी ओर आयोग का पक्ष रहा कि उसने Form 6 में बदलाव नहीं किया, बल्कि SIR की जरूरतों के तहत अलग Declaration जोड़ा था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी आया संदर्भ

Annexure-D को लेकर बहस में बिहार में SIR से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के 2026 के फैसले का भी संदर्भ आया। चुनाव आयोग ने SIR के दौरान दस्तावेज और जानकारी मांगने के अपने अधिकार का उल्लेख किया। वहीं कानूनी बहस में यह सवाल भी उठा कि अदालत के सामने विचार किए गए प्रावधान और बाद में लागू अतिरिक्त Declaration को पूरी तरह समान माना जा सकता है या नहीं। इसलिए Annexure-D को लेकर विवाद केवल प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि इसकी कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठे।

ECINET पर भी बदली व्यवस्था

चुनाव आयोग ने Form 6 की ऑनलाइन प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। ECINET पर SIR से बाहर या SIR प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों के लिए अतिरिक्त Declaration को हटाकर सामान्य Form 6 प्रक्रिया लागू की गई है। इसका मतलब है कि ऐसे राज्यों में ऑनलाइन आवेदन करने वाले नए मतदाताओं को अब अतिरिक्त Annexure-D की प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। हालांकि SIR वाले राज्यों की ऑनलाइन व्यवस्था को इसी आधार पर सामान्य राज्यों के समान नहीं माना जा सकता।

नए वोटरों के लिए क्या बदला?

नए मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जहां यह व्यवस्था हटाई गई है, वहां Form 6 के साथ पुराने चुनावी रिकॉर्ड से जुड़ा अतिरिक्त Annexure-D नहीं देना होगा। लेकिन मतदाता पंजीकरण की मूल शर्तें बनी रहेंगी। आवेदक को पात्रता, उम्र, नागरिकता और सामान्य निवास से जुड़ी जरूरी जानकारी देनी होगी। इसलिए इसे Form 6 में बदलाव से ज्यादा SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला माना जा रहा है।

अब नजर SIR वाले राज्यों पर

चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद अगली नजर उन राज्यों पर होगी जहां SIR की प्रक्रिया जारी है। वहां Form 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था किस तरह लागू रहती है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल स्पष्ट तस्वीर यह है कि Form 6 की मूल व्यवस्था कायम है, जबकि SIR से जुड़ा Annexure-D उन राज्यों में हटा दिया गया है जहां इसकी अतिरिक्त जरूरत नहीं रह गई है।

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