विक्सन सिकरोडिया | भारत 19 न्यूज़ | कानपुर
-एक ऐसी जेल जहां किताब पढ़ने पर कैदियों की सजा हो जाती है कम, पढ़ाई करके कैदी एक साल में अधिकतम 48 दिन की सजा को कम करा सकते हैं, दर्शनशास्त्र, विज्ञान या साहित्य की किताबों को पढ़कर उनको करनी होती है समीक्षा
‘पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे खराब इस कहावत के मायने भले खेल जगत में कामयाबी की बुलंदियां छूने वालों ने बदल दिए हों पर दुनिया में एक जगह है जहां पढ़ाई अपराधियों की किस्मत बदल रही है। ज्ञान पाकर शातिर अपराधी सजा में छूट तो पाते ही हैं, बल्कि जेल से छूटने के बाद वह समाज में सम्मान भी पा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं दक्षिण अफ्रीकी देश ब्राजील की संघीय जेलों की। वहां की जेलों में रिमीशन फाॅर रीडिंग योजना के तहत पढ़ाई लिखाई से कैदियों की सजा कम की जाती हैं।योजना का लाभ उन्हीं कैदियों को मिलता है जो पठन पाठन में रुचि रखते हैं। ब्राजील की अनूठी योजना के अंतर्गत आवेदन करने वाले कैदियों को दर्शनशास्त्र, विज्ञान या साहित्य की एक किताब पढ़कर उसकी समीक्षा लिखनी होती है। एक किताब की समीक्षा लिखने पर चार दिन की सजा कम हो जाती है। रिमीशन फाॅर रीडिंग योजना के अंतर्गत एक साल में अधिकतम 48 दिन की सजा कम किए जाने का नियम है। कैदी जेल की लाइब्रेरी में जाकर वह दिन भर इन विषयों से संबंधित विभिन्न पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं। जब उन्हें पुस्तकों का ज्ञान हो जाता है तब उन्हें उसकी समीक्षा करनी होती है।तन्हाई से दूर रखने व मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश
अपराध करने के बाद जब कोई कैदी जेल की चारदीवारों में पहुंचता है तो वहां का माहौल बड़ा भयानक होता है। चारोंओर नाउम्मीद व तन्हाई उसे अंदर ही अंदर खाने लगती है। ब्राजील की जेलों में इस अनूठी पहल का मकसद कैदियों को तन्हाई से दूर रखकर उन्हें पठन पाठन की ओर अग्रसर करना व समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। किताबों के संसार के बीच कब उनकी सजा खत्म हो जाती है उन्हें पता भी नहीं चलता। किताबों में नए-नए टाॅपिक पढ़ने से न केवल उनके ज्ञान में वृद्धि होती है बल्कि जेल की कालकोठरी से बाहर निकलने के बाद समाज की मुख्य धारा से जुड़ना भी उनके लिए आसान हो जाता है।


